कैंसर के इलाज में मददगार साबित हो रहे ये इनोवेशन, एक्सपर्ट्स से जानिए इनके बारे में सबकुछ...
Edited By Bhoopendra Rai

Cancer treatment
Edited By Bhoopendra Rai

Cancer treatment
Cancer treatment: मौजूदा वक्त में कैंसर एक भयानक बीमारी बनकर उभरा है। कैंसर का इलाज मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं। कैंसर एक ऐसा रोग है, जो किसी भी उम्र में हो सकता है। यह एक साल के बच्चे से लेकर 80 साल के बुजुर्ग तक में पाया जा सकता है। कैंसर को लेकर लोगों में जागरूक बढ़ाने और इस का बीमारी इलाज समय पर करने के लिए तरह-तरह के इनोवेशन किए जा रहे हैं।
कैंसर के 100 से अधिक प्रकार हैं। हालांकि, सभी कैंसरों में होने वाला मूल बदलाव कोशिका के आनुवंशिक मानचित्र में परिवर्तन होता है, जो अपने होता है और आगे चलकर असामान्य वृद्धि का निर्माण शुरू करता है, जिससे पेशेंट की परेशानी और दर्द बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में अगर समय पर इलाज नहीं मिलने से अंत में उसकी मौत भी हो सकती है। कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसका इलाज महंगा है। ये व्यक्ति, परिवार और समाज के शारीरिक, भावनात्मक, वित्तीय स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
पिछले कुछ सालों में कैंसर रोग की उत्पत्ति, रोकथाम, शीघ्र निदान और इलाज के लिए कई इनोवेशन किए गए हैं। इन इनोवशन के बारे में डॉ. तेजिंदर कटारिया ने विस्तार से बताया है। डॉ. तेजिंदर कटारिया गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में विकिरण कैंसर विज्ञान सैंटर की चेयरपर्सन हैं।
कैंसर की रोकथाम और इलाज में मददगार साबित हो रहे ये इनोवेशन
1. तरल बायोप्सी
तरल बायोप्सी एक मामूली सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें शरीर के प्रभावित हिस्सों से कोशिकाओं या ऊतकों का एक नमूना (सैंपल) लेकर माइक्रोस्कोप के जरिए उसकी जांच कर कैंसर की उपस्थिति का पता लगाया जाता है। यह बायोप्सी रक्त जैसे शरीर के तरल पदार्थ पर की जाती है। यह माना जाता है कि विशेष परीक्षणों के साथ परिसंचारी रक्त में कैंसर कोशिकाओं की पहचान की जा सकती है। फेफड़ों के कैंसर के रोगियों के लिए लिक्विड बायोप्सी बहुत मददगार रही है, जो इलाज के दौरान अपनी बीमारी की प्रगति दिखाते हैं।
2. आणविक निदान
किसी भी कैंसर के इलाज के लिए व्यक्तिगत जैविक अणुओं का पता लगाना जरूरी होता है। ये आणविक निदान प्रक्रिया के तहत संभव है। इसे आसान शब्दों में समझें तो कई अलग-अलग जैविक तकनीक “आणविक निदान” छतरी के नीचे आती हैं। सबसे आम तकनीकों में से एक पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) है, जो विशेष रूप से परिभाषित डीएनए या आरएनए के टुकड़ों की बड़ी मात्रा में उत्पादन करने का एक तरीका है, जो तब कई उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें कुछ बीमारियों के साथ जुड़े रोगजनक पहचान और असमान जीन अभिव्यक्ति का पता लगाना शामिल है।
3. आणविक निदान प्रक्रिया से क्या मदद मिलती है?
आणविक निदान प्रक्रिया के तहत इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री (IHC) और रिसेप्टर विश्लेषण (स्तन कैंसर के लिए एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन या Her2neu) कैंसर के पूर्वानुमान के साथ-साथ रोगियों के लिए विशिष्ट उपचार तैयार करने में सहायता करती है। जब से आणविक निदान का विकास हुआ तब से वंशानुगत कैंसर सिंड्रोम (बीआरसीए 1, बीआरसीए 2 जीन), (बीआरएफ, एएलके, फेफड़ों के कैंसर के लिए आरओएस) (सीडीएनए, आरएनए) को समझने के मदद मिली है।
कैंसर की जांच और इलाज के लिए कुछ तकनीकी नवाचार भी हुए हैं। इनमें सीआरआईएसपीआर, टेलीमेडिसिन, क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी, रोबोटिक रेडियो सर्जरी, रोबोटिक सर्जरी, रेडियोथेरेपी जैसी तकनीख शामिल हैं। इनकी मदद से इक्कीसवीं सदी में कैंसर के उपचार और परिणामों में मदद मिल रही है। सबसे पहले CRISPR के बारे में जानते हैं। ये नोबेल पुरस्कार विजेता ऐनी डूडना और चार्पेंटियर द्वारा विकसित एक उपकरण है, जो जीन संपादन की सुविधा प्रदान करता है। इसे वायरल जीन एडिट के लिए विकसित किया गया था और इसका इस्तेमाल पहले से ही कोविड वायरस के खिलाफ टीके के विकास के लिए किया जा चुका है। इससे भविष्य में कैंसर के टीकों के विकास की उम्मीद जगी है।
कैंसर के इलाज में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धि) का उपयोग भी किया जा रहा है। इसके तहत एक कम्प्यूटर में डेटा विश्लेषण, नई दवा विकास के बारे में जानकारी एकट्ठा की जाती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कंप्यूटर सिमुलेशन नए और असरदार इलाज का पता लगाने और वास्तविक विश्व उपचार से पहले परिणामों का पता करने में एक जुड़वा मॉडल बना सकता है, क्योंकि यह कम समय अधिक से अधिक रोगियों की जांच कर सकता है। जिससे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
टेलीमेडिसिन को सरल शब्दों में समझें तो यह डॉक्टर्स और चिकित्सा संस्थानों द्वारा विभिन्न दूरसंचार सुविधाओं के उपयोग को संदर्भित करता है, जो इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल माध्यम से अपने रोगियों को स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करते हैं। इससे रोगी की यात्रा का समय और पैसा दोनों बचता है। साथ ही वह घर बैठे डॉक्टर्स से परामर्श कर सकता है।
रोबाटिक सर्जरी एक ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसके तहत डॉक्टर एक कॉन्सोल से रोबोट का नियंत्रण करता है। रोबोट सर्जरी, या रोबोट-असिस्टेड सर्जरी, डॉक्टरों को पारंपरिक तकनीकों से अधिक सटीक, नम्यता और नियंत्रण के साथ कई प्रकार की मुश्किल प्रक्रियाओं को करने में मदत करता है। रोबोटिक सर्जरी फेफड़े, प्रोस्टेट, गर्भाशय और पेट के कैंसर के लिए न्यूनतम पहुंच उपचार है, जिसके परिणामस्वरूप कम रक्त हानि के साथ अस्पताल में रहने का समय भी कम हो जाता है, खास बात ये है कि रिकवरी में भी जल्दी मदद मिलती है।
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