Uttarakhand Tunnel Rescue Operation Latest Update: उत्तरकाशी के सिल्कयारा टनल में 11 दिन से फंसे 41 मजदूरों को निकालने के लिए जद्दोजहद जारी हैं। टनल के प्रवेश द्वार से एक बार फिर ऑगर मशीन से ड्रिलिंग शुरू हो चुकी है। अभी तक 46 मीटर की ड्रिलिंग पूरी हो चुकी है। इससे पहले 17 नवंबर को चट्टान आने के बाद ड्रिलिंग रोकनी पड़ी थी। इससे पहले कैमरे के जरिए कल पूरे देश ने टनल में फंसे 41 मजदूरों की पहली तस्वीर देखीं। इसके लिए टनल में मजदूरों तक 6 इंच की पाइपलाइन डाली गई थी। फिलहाल पाइपलाइन से मजदूरों को सेब, संतरे का ज्यूस, पनीर की सब्जी, दाल, रोटी और चावल की भेजे गए हैं।
इस बीच बचाव अभियान का नेतृत्व कर रहे अधिकारियों ने इंटरनेशनल टनल एक्सपर्ट की मदद ली है। टनल एक्सपर्ट डिक्स अपनी पूरी टीम के साथ डटे हुए हैं। ऑपरेशन में लगे अधिकारियों के मुताबिक मजदूरों तक पहुंचने के लिए 28 मीटर की ड्रिलिंग ही बाकी है। अब तक मलबे में 46 मीटर तक 800 एमएम के स्टील के पाइप डाले जा चुके हैं। इसी के जरिए टनल के अंदर फंसे मजदूरों को बाहर लाया जाएगा।
https://twitter.com/ANI/status/1727203923721863534
48 घंटे में पूरा हो सकता है ऑपरेशन
एक्सपर्ट की मानें तो अगर ऑगर मशीन के सामने कोई चट्टान नहीं आई तो यह ऑपरेशन 2 से 3 दिन में पूरा हो सकता है। इसके अलावा ड्रिलिंग के लिए दो और प्लान पर काम किया जा रहा है। इसके तहत टनल में आज से वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू हो सकती है। इसके लिए ओडिशा और गुजरात से दो और मशीनें उत्तरकाशाी पहुंचने वाली है।
https://twitter.com/ANI/status/1727201200561619179
इन तीन प्लान के जरिए निकाले जाएंगे मजदूर
- पहला प्लान ऑगर मशीन से है। अगर कोई रुकावट नहीं आती है तो 2.3 दिन में सुंरग बनाकर मजदूरों को बाहर निकाला जा सकता है। हालांकि इसमें एक डर यह भी है कि ड्रिलिंग के दौरान और मलबा आ सकता है इसलिए दूसरी ओर से ड्रिलिंग मशीनें बुलाई गई हैं।
- दूसरी योजना सिलक्यारा टनल की दोनों साइड की खुदाई करके रास्ता बनाने की है इस काम में 10.15 दिन लग सकते हैं।
- वहीं तीसरी योजना के अनुसार डंडालगांव की ओर से टनल की खुदाई है इस काम में 35.40 दिन लग सकते हैं।
https://twitter.com/ANI/status/1727188435587486199
Uttarakhand Tunnel Rescue Operation Latest Update: उत्तरकाशी के सिल्कयारा टनल में 11 दिन से फंसे 41 मजदूरों को निकालने के लिए जद्दोजहद जारी हैं। टनल के प्रवेश द्वार से एक बार फिर ऑगर मशीन से ड्रिलिंग शुरू हो चुकी है। अभी तक 46 मीटर की ड्रिलिंग पूरी हो चुकी है। इससे पहले 17 नवंबर को चट्टान आने के बाद ड्रिलिंग रोकनी पड़ी थी। इससे पहले कैमरे के जरिए कल पूरे देश ने टनल में फंसे 41 मजदूरों की पहली तस्वीर देखीं। इसके लिए टनल में मजदूरों तक 6 इंच की पाइपलाइन डाली गई थी। फिलहाल पाइपलाइन से मजदूरों को सेब, संतरे का ज्यूस, पनीर की सब्जी, दाल, रोटी और चावल की भेजे गए हैं।
इस बीच बचाव अभियान का नेतृत्व कर रहे अधिकारियों ने इंटरनेशनल टनल एक्सपर्ट की मदद ली है। टनल एक्सपर्ट डिक्स अपनी पूरी टीम के साथ डटे हुए हैं। ऑपरेशन में लगे अधिकारियों के मुताबिक मजदूरों तक पहुंचने के लिए 28 मीटर की ड्रिलिंग ही बाकी है। अब तक मलबे में 46 मीटर तक 800 एमएम के स्टील के पाइप डाले जा चुके हैं। इसी के जरिए टनल के अंदर फंसे मजदूरों को बाहर लाया जाएगा।
48 घंटे में पूरा हो सकता है ऑपरेशन
एक्सपर्ट की मानें तो अगर ऑगर मशीन के सामने कोई चट्टान नहीं आई तो यह ऑपरेशन 2 से 3 दिन में पूरा हो सकता है। इसके अलावा ड्रिलिंग के लिए दो और प्लान पर काम किया जा रहा है। इसके तहत टनल में आज से वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू हो सकती है। इसके लिए ओडिशा और गुजरात से दो और मशीनें उत्तरकाशाी पहुंचने वाली है।
इन तीन प्लान के जरिए निकाले जाएंगे मजदूर
- पहला प्लान ऑगर मशीन से है। अगर कोई रुकावट नहीं आती है तो 2.3 दिन में सुंरग बनाकर मजदूरों को बाहर निकाला जा सकता है। हालांकि इसमें एक डर यह भी है कि ड्रिलिंग के दौरान और मलबा आ सकता है इसलिए दूसरी ओर से ड्रिलिंग मशीनें बुलाई गई हैं।
- दूसरी योजना सिलक्यारा टनल की दोनों साइड की खुदाई करके रास्ता बनाने की है इस काम में 10.15 दिन लग सकते हैं।
- वहीं तीसरी योजना के अनुसार डंडालगांव की ओर से टनल की खुदाई है इस काम में 35.40 दिन लग सकते हैं।