माउस और कीबोर्ड को किस USB पोर्ट में लगाना चाहिए? ज्यादातर लोग करते हैं ये गलती

अगर आपके कंप्यूटर या लैपटॉप में USB 2.0 और USB 3.0 दोनों पोर्ट हैं, तो माउस और कीबोर्ड किस पोर्ट में लगाने चाहिए? अधिकतर लोग बिना सोचे किसी भी पोर्ट का इस्तेमाल कर लेते हैं. जानते है सही USB पोर्ट कैसे चुने?

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Mouse और Keyboard को गलत USB पोर्ट में लगा रहे हैं? ये छोटी-सी गलती कर सकती है आपका नुकसान.

आज के समय में कंप्यूटर और लैपटॉप सिर्फ ऑफिस तक सीमित नहीं है. वर्कफ्रॉम होम, पढ़ाई और रोजमर्रा के कई काम इन्हीं के जरिए पूरे होते हैं. बेहतर काम करने के लिए ज्यादातर लोग माउस और कीबोर्ड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता होता है कि इन्हें किस USB पोर्ट में लगाना सही रहता है. अगर आपके सिस्टम में USB 2.0 और USB 3.0 दोनों तरह के पोर्ट हैं, तो सही पोर्ट चुनने सन सिर्फ सिस्टेम बेहतर इस्तेमाल होता है, बल्कि दूसरे हाई-स्पीड डिवाइस के लिए भी जरूरी पोर्ट खाली रहते हैं.

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माउस और कीबोर्ड के लिए कौन-सा USB पोर्ट बेहतर है?

अगर लैपटॉप या कंप्यूटर में USB 2.0 और USB 3.0 दोनों पोर्ट है तो, माउस और कीबोर्ड को USB 2.0 पोर्ट में लगाना बेहतर माना जाता है. इसकी वजह ये है कि इन दोनों डिवाइस को ज्यादा डेटा ट्रांसफर स्पीड की जरूरत नहीं होती. यूएसबी 2.0 की स्पीड इनके लिए सक्षम होती है और ये बिना दिक्कत के कर करेंगे.

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Photo-AI

USB 3.0 पोर्ट कैसे करें यूज?

USB 3.0 या USB 3.2 हाई-स्पीड पोर्ट है. इनका इस्तेमाल आप एक्सटर्नल SSD, पेन ड्राइव, हार्डडिस्क या दूसरे डिवाइस के लिए कर सकते हैं, जिन्हें तेज डेटा ट्रांसफर स्पीड की जरूरत होती है. इससे सिस्टम के भी पोर्ट सही तरीके से इस्तेमाल हो पाते हैं.

क्या USB 3.0 में लगाने से कोई नुकसान होता है?

अगर आप माउस या कीबोर्ड को USB 3.0 पोर्ट में लगाते हैं, तो इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं होता. दोनों डिवाइस सामान्य तरीके से काम करते हैं. हालांकि, इससे हाई-स्पीड पोर्ट का इस्तेमाल ऐसे डिवाइस के लिए हो जाता है, जिन्हें उसकी जरूरत नहीं होती. इसलिए बेहतर यही माना जाता है कि USB 3.0 पोर्ट को उन डिवाइस के लिए बचाकर रखा जाए, जिन्हें ज्यादा स्पीड चाहिए.

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वायरलेस माउल और कीबोर्ड में आ सकती है ये परेशानी

कुछ मामलों में वायरलेस माउस और कीबोर्ड के USB रिसीवर को USB 3.0 पोर्ट के पास लगाने से सिग्नल इंटरफेरेंस की समस्या देखने को मिल सकती है. इस वजह से कनेक्श कमजोर हो सकता है या हो सकता है डिवाइस सही से रिस्पॉन्ड न करें. ऐसे में USB 2.0 पोर्ट का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प माना जाता है.

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क्या सभी USB पोर्ट एक जैसे होते हैं?

ऐसा बिल्कुल नहीं है. कम्प्यूटर और लैपटॉप में USB 2.0, USB 3.0, USB 3.2 और USB-C जैसे अलग-अलग पोर्ट दिए जाते हैं. इनमें USB 3.0 और इनके नए वर्जन की डेटा ट्रांसफर स्पीड USB 2.0 के मुकाबले कई ज्यादा होती है. आमतौर पर USB 3.0 पोर्ट के अंदर का रंग नीला होता है, जबकि USB 2.0 पोर्ट काले या सफेद रंग के होते हैं.

सही USB पोर्ट कैसे चुनें?

अगर आपके सिस्टमें दोनों तरह के पोर्ट मौजूद हैं तो माउस औ कीबोर्ड को हमेशा USB 2.0 में लगाएं. वहीं USB 3.0 पोर्ट में एक्सटर्नल SSD, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और दूसरे हाई-स्पीड डिवाइस के लिए इस्तेमाल करें. इससे काम करने का अनुभव बेहतर होगा.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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