---विज्ञापन---

Explainer angle-right

महाराष्ट्र सरकार ने क्यों दिया सारे चर्च और मिशनरी संगठनों की जमीन के ऑडिट का ऑर्डर?

महाराष्ट्र में ईसाई संस्थाओं की जमीन किसी एक चर्च संस्था के पास नहीं, बल्कि सैकड़ों अलग-अलग संस्थाओं के पास है. ये अपनी संपत्ति अलग-अलग एजुकेशनल ट्रस्ट, अस्पतालों और चैरिटेबल सोसायटियों के जरिए रखते हैं.

---विज्ञापन---

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य भर के चर्च और ईसाई मिशनरी संगठनों की जमीन का ऑडिट कराने का फैसला किया है. नासिक में कथित तौर पर 300 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले के बाद यह कदम उठाया गया है. इसको लेकर आरोप हैं कि दशकों तक फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके चर्च की कीमती जमीन को गैर-कानूनी तरीके से लीज पर दिया गया और बेचा गया. यह मामला सामने आने के बाद, यह मुद्दा इतना बड़ा हो गया कि सरकार को पूरे राज्य में चर्च और मिशनरी संगठनों की जमीन का ऑडिट करने का फैसला करना पड़ा.

महाराष्ट्र में ईसाई संस्थाओं की जमीन किसी एक चर्च संस्था के पास नहीं, बल्कि सैकड़ों अलग-अलग संस्थाओं के पास है. ये अपनी संपत्ति अलग-अलग एजुकेशनल ट्रस्ट, अस्पतालों और चैरिटेबल सोसायटियों के जरिए रखते हैं. इनके पास जो जमीन है वह बहुत पहले या तो खरीदी गई थी, या फिर लोगों से दान में मिली थी. इसके अलावा इन्हें पुर्तगाली शासन के समय तटीय कोंकण और ब्रिटिश काल में ग्रांट के तौर पर भी मिली थी.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : महाराष्ट्र में UCC नियम तैयार करने के लिए रंजना देसाई की अध्यक्षता में बनेगी समिति, CM फडणवीस ने की घोषणा

बता दें, 2011 की जनगणना के मुताबिक, महाराष्ट्र में ईसाइयों की संख्या लगभग 10.8 लाख है, जो राज्य की कुल आबादी का 0.96 प्रतिशत है. यह समुदाय मुख्य रूप से मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, पुणे, अहमदनगर और कोंकण के कुछ हिस्सों में बसा हुआ है.

---विज्ञापन---

क्या था नासिक वाला मामला?

पुलिस का कहना है कि नासिक में चर्च की करीब 300 करोड़ रुपये की छह एकड़ जमीन को सरकारी विभागों को लीज पर दिया गया और कुछ को बेच दिया गया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह डील ‘नासिक डायोसेसन काउंसिल’ (NDC) नाम की संस्था ने की थी, जबकि उसका इस जमीन पर कोई मालिकाना हक भी नहीं था. इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया. जांचकर्ताओं का कहना है कि यह जमीन कानूनी तौर पर ‘नासिक डायोसेसन ट्रस्ट एसोसिएशन’ (NDTA) की है.

यह भी पढ़ें : अब 4 घंटे में पहुंच सकेंगे मुंबई से वडोदरा, इस दिन चालू होगा 157 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे

---विज्ञापन---

पुलिस खुद हुई शिकार

इस घोटाले की शिकार नासिक पुलिस खुद भी है. साल 1990 से नासिक पुलिस कमिश्नरेट लीज के तहत उसी जमीन पर चल रहा था. फिर 2014 में यह दफ्तर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया. हालांकि, अभी भी उस जमीन पर पुलिस के कुछ दफ्तर चल रहे हैं. पुलिस इस जमीन के लिए उन लोगों को किराया देती रही, जिनका इस पर कोई हक ही नहीं बनता था.

जब विधानसभा में उठा मुद्दा

यह मामला विधानसभा में भाजपा विधायक देवयानी फरांडे ने उठाया था. उन्होंने सरकार से मांग की थी कि यह जांच की जाए कि क्या महाराष्ट्र में कहीं और भी ऐसे विवाद हैं. इसके बाद राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने चर्च और मिशनरी की जमीन का राज्यव्यापी ऑडिट कराने का ऐलान कर दिया.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : 20 साल का वनवास खत्म: पिंपलेश्वर महादेव मंदिर को मिली सवा 4 एकड़ भूमि, 8 जून को होगा ऐतिहासिक शिवोत्सव

क्या-क्या होगा ऑडिट में?

सरकार के मुताबिक, ऑडिट के लिए डिविजनल लेवल की कमेटी बनाई जाएंगी. इसको लीड डिविजनल कमिश्नर करेंगे. इन कमेटियों में सेटलमेंट कमिश्नर के ऑफिस, पुलिस विभाग और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन के अधिकारी भी शामिल होंगे. यह कमेटी चर्च और मिशनरी की जमीन के मालिकाना हक के रिकॉर्ड और आजादी से पहले और बाद में हुए जमीन के ट्रांसफर की जांच करेंगी. इसके अलावा ये कमेटियां इन जमीनों पर कब्जों और फर्जी लेन-देन की भी जांच करेंगी. इन जमीनों का ऑडिट पूरे तीन महीने में पूरा किया जाएगा.

---विज्ञापन---

First published on: Jul 09, 2026 07:44 PM

End of Article
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola