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Union Budget 2026: 28 फरवरी की बजाय 1 फरवरी को ही क्यों पेश होता है आम बजट? जानिए वजह

Budget 2026: केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण साल 2026-27 के लिए 1 फरवरी को बजट पेश करने वाली हैं, जिसका इंतजार पूरा देश कर रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अब ये बजट 28 फरवरी की बजाय 1 फरवरी को ही क्यों पेश किया जाता है?

Author Written By: Varsha Sikri Updated: Jan 23, 2026 14:10
Union Budget 2026
Credit: NEWS 24 GFX

Budget 2026 Explainer: 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण साल 2026 के लिए बजट पेश करेंगी. भारत में हर साल आम बजट पेश किया जाता है. ये अब 28 फरवरी की बजाय 1 फरवरी को ही पेश होता है. कई लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि आखिर बजट की तारीख क्यों बदली गई, इसके पीछे की कहानी क्या है? चलिए इस बारे में आज हम विस्तार से चर्चा करते हैं.

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आखिर क्यों बदली गई तारीख?

पहले आजादी के बाद से लेकर साल 2016 तक देश का आम बजट 28 फरवरी को पेश होता था. पहले बजट पेश होने से लेकर लागू होने तक समय कम नहीं पड़ता था. लेकिन धीरे-धीरे ऐसा महसूस होने लगा कि मैनेजमेंट में दिक्कतें आ रही हैं. इसीलिए साल 2017 से केंद्र सरकार ने बजट पेश करने की तारीख बदलकर 1 फरवरी कर दी. इसका मुख्य उद्देश्य था प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाना और विकास योजनाओं में देरी को रोकना.

जल्दी बजट पेश करने का फायदा

बजट पेश होने के बाद संसद में इसकी चर्चा होती है, फिर इसे पास कराना होता है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलती है. अगर बजट 28 फरवरी को पेश किया जाए, तो मार्च का पूरा महीना इसी प्रक्रिया में निकल जाता है. 1 फरवरी को बजट आने से सरकार को अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष से पहले पूरी तैयारी का समय मिल जाता है. मंत्रालय और विभाग पहले ही अपने खर्च का अनुमान लगा सकते हैं. इससे विकास योजनाओं और सरकारी परियोजनाओं पर काम में तेजी आती है.

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राज्यों और मंत्रालयों को मिलता है फायदा

  • जल्दी बजट पेश होने से राज्यों और मंत्रालयों को पहले से ये पता होता है कि उन्हें कितने पैसे मिलेंगे.
  • वो अपनी योजनाओं को समय पर तैयार कर सकते हैं.
  • सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स बिना देरी के शुरू हो जाते हैं.
  • पहले कई बार बजट देर से आने की वजह से सरकार को वोट ऑन अकाउंट लाना पड़ता था.
  • इस व्यवस्था में केवल जरूरी खर्च की मंजूरी मिलती थी और नई योजनाएं शुरू नहीं हो पाती थीं.
  • अब 1 फरवरी को बजट पेश होने से ऐसी अस्थायी व्यवस्था की जरूरत काफी हद तक खत्म हो गई है.
  • इससे सरकारी कामकाज में रफ्तार आती है और योजनाएं कागजों तक सीमित नहीं रहतीं।

अंतरराष्ट्रीय परंपरा को अपनाया

दुनिया के कई देशों में बजट वित्त वर्ष शुरू होने से पहले पेश किया जाता है. इससे सरकार को योजनाओं पर काम शुरू करने का समय मिल जाता है. भारत ने भी इसी अंतरराष्ट्रीय परंपरा को अपनाया. कुल मिलाकर, 28 फरवरी की बजाय 1 फरवरी को बजट पेश करने का मकसद यही है कि सरकार नए वित्त वर्ष में बिना किसी देरी के काम शुरू कर सके. इससे मंत्रालयों और राज्यों को फायदा होता है, विकास योजनाओं में तेजी आती है और सरकारी कामकाज व्यवस्थित होता है.

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First published on: Jan 23, 2026 02:10 PM

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