धरती से लाखों किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में अगर कोई अंतरिक्ष यात्री अपराध कर दे तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई किस देश के कानून के तहत होगी और सजा देने का अधिकार किसे मिलेगा? यह सवाल अब सिर्फ साइंस का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि अंतरिक्ष अभियानों के बढ़ते दायरे के साथ एक गंभीर कानूनी मुद्दा भी बन चुका है.

अंतरिक्ष किसी एक देश के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है. ऐसे में वहां कानून-व्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय नियम और समझौते महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. अलग-अलग देशों के बीच हुई संधियों के जरिए यह तय किया गया है कि अंतरिक्ष में होने वाले अपराधों की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी और दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कैसे की जाएगी. आइए समझते हैं कि अंतरिक्ष में कानून किस तरह लागू होता है और किसी अपराधी को सजा देने की प्रक्रिया क्या है.

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एस्ट्रोनॉट स्पेस में कर दे गलती तो कौन करेगा कार्रवाई?

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून के तहत अंतरिक्ष पर किसी एक देश का अधिकार नहीं है. 1967 की Outer Space Treaty के अनुसार, जिस देश के रजिस्टर में कोई अंतरिक्ष यान दर्ज है, उसे उस यान और उसमें मौजूद अपने कर्मियों पर अधिकार और नियंत्रण हासिल रहता है. इसलिए किसी देश के अंतरिक्ष यान में अपराध होने पर आम तौर पर उसी देश के कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

ISS में जिस देश का मॉड्यूल उसमें उसी देश का कानून

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी ISS कई देशों की साझी परियोजना है. इसमें अमेरिका, रूस, जापान, कनाडा और यूरोपीय देशों के अंतरिक्ष यात्री काम करते हैं. इसलिए यहां किसी अपराध की स्थिति में एक ही देश का कानून सीधे लागू नहीं हो जाता है. ISS के लिए अलग से Intergovernmental Agreement बनाया गया है, जिसमें अपराध से जुड़ी परिस्थितियों के लिए अधिकार क्षेत्र के नियम तय किए गए हैं.

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बता दें कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में जिस देश ने अपना मॉड्यूल लगाया होता है वहां पर मतलब उस हिस्से में उसी देश का कानून प्रभावी होता है. इस व्यवस्था को रजिस्ट्रेशन का नियम कहते हैं. इसके तहत कोई देश अपने नागरिक अंतरिक्ष यात्री के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई कर सकता है. उदाहरण के लिए, अगर कोई अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री ISS पर अपराध करता है तो अमेरिकी कानून के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.

दूसरे देश का नागरिक होने पर क्या होगा?

वहीं, अगर अपराध का शिकार किसी दूसरे साझेदार देश का नागरिक है, तो कुछ परिस्थितियों में उस देश को भी कार्रवाई का अधिकार मिल सकता है. ऐसी स्थिति में पीड़ित का देश आरोपी के खिलाफ अपने यहां आरोपी के प्रत्यर्पण की मांग भी कर सकता है और उसके खिलाफ केस चलाने की मांग भी कर सकता है. इसके अलावा अगर आरोपी का देश आरोपी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं करता है तो पीड़ित देश अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रास्तों (International diplomatic channels) और अंतर-सरकारी समझौतों (Inter-governmental agreements) के जरिए भी न्याय की मांग कर सकता है.

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1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी क्या है?

अंतरिक्ष में जाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वहां शांति बनाए रखने के लिए साल 1967 में आउटर स्पेस ट्रीटी लागू की गई थी. इसे अंतरिक्ष से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानून का बुनियादी ढांचा माना जाता है. इस संधि के अनुसार, अंतरिक्ष पूरी मानवता की साझा विरासत है और कोई भी देश चांद, तारों या किसी अन्य खगोलीय पिंड पर अपना झंडा लगाकर वहां मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता. इसके अलावा, अंतरिक्ष में परमाणु हथियार या किसी भी तरह के हथियार तैनात करने पर पूरी तरह से रोक है.

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ISS इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) क्या है?

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के सुरक्षित संचालन और वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था है. इस समझौते में अमेरिका, रूस, जापान, कनाडा और यूरोपीय साझेदार देशों की भागीदारी है. इसके तहत ISS पर होने वाली आपराधिक घटनाओं, संपत्ति से जुड़े नुकसान या अनुशासन संबंधी मामलों से निपटने के लिए संबंधित देशों के बीच समन्वय और जांच की प्रक्रिया तय की गई है. किसी मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का फैसला निर्धारित नियमों और संबंधित देशों के अधिकार क्षेत्र के आधार पर किया जाता है.

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