आबादी कम होने से क्यों टेंशन में आ जाते हैं कई देश? घटती जनसंख्या से परेशान जापान, जानिए किस बात का खतरा

जनसंख्या संकट से निपटने के लिए जापान सरकार कई कदम उठा रही है. शादी और परिवार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से टोक्यो प्रशासन ने एआई आधारित डेटिंग ऐप ‘टोक्यो एनमुसुबी’ लॉन्च किया है, जिसकी मदद से सैकड़ों शादियां हो चुकी हैं.

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आबादी के मामले में भारत दुनिया में पहले नंबर पर पहुंच चुका है. यूनाइटेड नेशन के मुताबिक भारत की जनसंख्या चीन से भी अधिक हो गई है. हालांकि भारत की जनसंख्या वास्तव में कितनी है, वो तो जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पता चल सकेगा. आबादी की बात होते ही, कई लोग सोचते हैं कि किसी देश के लिए उसकी बड़ी आबादी होना ज्यादा चिंताजनक बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जनसंख्या कम होने से भी देशों की परेशानी बढ़ जाती है.

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जापान की घटती आबादी

जी हां, अगर किसी देश की जनसंख्या दर में गिरावट आती है तो, वहां की सरकार आबादी को बढ़ाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं शुरू करती है, लुभावने ऑफर देना शुरू कर देती है. हालांकि बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि आखिर आबादी कम होने से कोई देश टेंशन में क्यों आ जाते हैं. ऐसा ही कुछ दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था जापान के साथ हो रहा है. जापान की आबादी कई दशकों बाद 12 करोड़ से निचले स्तर तक पहुंच गई है. बुजुर्गों की बढ़ती संख्या से परेशान जापान अब घटती जनसंख्या से भी परेशान है.

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42 वर्षों में पहली बार 12 करोड़ के नीचे आबादी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों में बताया गया कि 42 वर्षों में पहली बार जापान की आबादी 12 करोड़ से नीचे पहुंच गई है. 1 जनवरी तक देश में जापानी नागरिकों की संख्या करीब 11.97 करोड़ दर्ज की गई, जबकि विदेशी नागरिकों को मिलाकर कुल आबादी 12.38 करोड़ है. जापान में 2009 के बाद से लगातार 17वें वर्ष जनसंख्या में गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, देश की कुल प्रजनन दर घटकर 1.14 पर पहुंच गई है, जो रिकॉर्ड निचला स्तर है.

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आबादी घटने से सबसे बड़ा खतरा


आबादी घटना का सीधा असर मैनपावर (काम करने वाले लोगों की कमी) पर पड़ रहा है. कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या कम होने से उद्योगों में कर्मचारियों की कमी बढ़ रही है, जबकि बुजुर्ग आबादी के बढ़ने से पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा पर सरकारी खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी कारण सरकार टैक्स कलेक्शन और आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने की चुनौती से भी जूझ रही है.

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सुरक्षा और कारोबार का खतरा


घटती आबादी का असर केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहता. युवाओं की संख्या कम होने से सेना में भर्ती के लिए योग्य उम्मीदवारों की संख्या कम होती है, जिससे भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ सकता है. दूसरी ओर, बाजार में उपभोक्ताओं की संख्या घटने से निवेश, कारोबार और नए रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं. कई क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर भी इसका असर दिखाई देने लगता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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