इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है. 15 से 21 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में दोनों पक्ष अपनी अपनी रेड लाइन्स पर अड़े रहे, जिसके कारण कोई समझौता नहीं हो सका. US उपराष्ट्रपति JD Vance ने रविवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा, ‘हम 21 घंटे तक लगातार बातचीत करते रहे, लेकिन ईरान ने हमारे प्रस्तावित टर्म्स को मंजूर नहीं किया’ ईरानी मीडिया Tasnim और Mehr ने भी पुष्टि की कि वार्ता का पहला दिन बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गया. दूसरे राउंड की उम्मीद थी, लेकिन बातचीत ब्रेकडाउन हो गई. जानें किन 4 मुख्य शर्तों पर फंसा पेंच
#WATCH | US-Iran peace talks | Islamabad, Pakistan: US Vice President JD Vance says, "…The bad news is that we have not reached an agreement. I think that is bad news for Iran much more than it's bad news for the USA. So, we go back to the US having not come to an… pic.twitter.com/jWHpJYemYz
---विज्ञापन---— ANI (@ANI) April 12, 2026
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नियंत्रण, सबसे बड़ा विवाद
न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की मांग है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बिना किसी शर्त के पूरी तरह खुला रहे. कोई फीस या टोल नहीं लगेगा और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को बिना रुकावट गुजरने की पूरी आजादी हो. ईरान चाहता है कि अपना नियंत्रण बरकरार रहे या कम से कम आंशिक अधिकार मान्यता दी जाए. याद रहे, युद्ध के दौरान ईरान ने इस जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% प्रभावित हुआ था. यह पूरे वार्ताकार में सबसे बड़ा स्टिकिंग पॉइंट साबित हुआ.
लेबनान में सीजफायर को लेकर गतिरोध
ईरान ने लेबनान में इजरायल हिजबुल्लाह के बीच सीजफायर को वार्ता की पूर्व-शर्त बना दिया था. अमेरिका और इजरायल ने इसे साफ साफ खारिज कर दिया. JD Vance ने इसे रीजनेबल मिसअंडरस्टैंडिंग बताया, लेकिन ईरान इस पर तैयार नहीं हुआ. फिलहाल इजरायल लेबनान में अपने स्ट्राइक्स जारी रखे हुए है.
सैंक्शंस राहत, ब्लॉक्ड एसेट्स और न्यूक्लियर कार्यक्रम
ईरान की मुख्य मांग थी कि उसके ब्लॉक्ड विदेशी एसेट्स रिलीज किए जाएं, आर्थिक सैंक्शंस हटाए जाएं और न्यूक्लियर एनरिचमेंट का अधिकार दिया जाए.
अमेरिका ने न्यूक्लियर हथियार क्षमता से जुड़ी किसी भी राहत से इनकार कर दिया. US ने 15-पॉइंट प्रस्ताव दिया था, जिसे ईरान ने एक्ट्रीमली ग्रीडी करार दिया.
अन्य शर्तें
ईरान ने जंग में हुए नुकसान के लिए मुआवजा और पूरे क्षेत्र में व्यापक सीजफायर की मांग भी रखी, जिसे अमेरिका ने ठुकरा दिया.
अब क्या करेंगे ट्रंप? पहले ही दी थी बड़े हमले की धमकी
वार्ता शुरू होने से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी थी कि ‘अगर डील नहीं बनी तो हम स्ट्राइक्स फिर शुरू कर देंगे. हमारे वॉरशिप्स को सबसे बेहतरीन हथियारों से लैस किया जा रहा है.’ ट्रंप ने कहा था, “ईरान के पास होर्मुज के शॉट टर्म एक्सट्रोशनके अलावा कोई कार्ड नहीं बचा है.’ वार्ता फेल होने के बाद ट्रंप ने कहा, “चाहे जो हो, हम जीत चुके हैं. ईरान को पूरी तरह हरा दिया गया है. डील बने या न बने, कोई फर्क नहीं पड़ता’. जेडी वेंस ने भी बताया कि अमेरिका बिना किसी डील के वापस लौट रहा है.
अभी क्या होने वाला है?
12 अप्रैल सुबह तक किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है. दोनों पक्षों के बीच 2 हफ्ते का नाजुक सीजफायर अभी भी लागू है. हालांकि ट्रंप की कार्यशैली को देखते हुए अमेरिका अब दबाव बढ़ा सकता है – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह क्लियर करने के लिए नौसेना अभियान या फिर टारगेटेड स्ट्राइक्स हो सकते हैं. अमेरिका का कहना है कि उसके पास मजबूत मिलिट्री पोजिशन है, इसलिए किसी बैकअप प्लान की जरूरत नहीं. ईरान ने भी साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका उसकी शर्तें नहीं मानता तो वह भी ईंट का जवाब पत्थर से देगा.










