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गुब्बारों वाली गैस कैसे चलाती है दुनिया? जानिए- ईरान युद्ध से कैसे हुआ हीलियम गैस क्राइसिस

हीलियम गैस धरती पर बहुत कम पाई जाती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह कमी बरकरार रही, तो स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल और एआई टूल्स के प्रोडेक्शन में भारी गिरावट आ सकती है.

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मिडल ईस्ट में जारी युद्ध की वजह से एक ऐसी गैस की कमी पैदा हो गई है, जिसका कोई विकल्प नहीं है. यह वह गैस है, जो पार्टी के गुब्बारों को हवा में रखने के लिए जानी जाती है. लेकिन आप यह नहीं जानते होंगे कि यह गैस कैसे दुनिया की इकॉनमी चलाती है. वह गैस है हीलियम, जिसका ईरान युद्ध की वजह से विश्व में क्राइसिस हो गया है. यह गैस रंगहीन और गंधहीन होती है. इसका इस्तेमाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को चलाने वाली कंप्यूटर चिप्स और अस्पतालों में जीवन बचाने वाली MRI मशीनों के लिए किया जाता है.

हीलियम क्यों है इतनी खास?

हाइड्रोजन के बाद हीलियम यूनिवर्स में दूसरा सबसे आम एलिमेंट है. लेकिन यह धरती पर बहुत कम पाया जाता है. LNG प्रोडक्शन के दौरान, गैस को क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन का इस्तेमाल करके मीथेन, नाइट्रोजन और दूसरी गैसों से अलग किया जाता है और फिर सुपरकूल्ड लिक्विड के तौर पर भेजा जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका ‘कूलिंग एजेंट’ होना है.

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सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री – कंप्यूटर चिप्स बनाने के दौरान ‘वेफर्स’ को ठंडा रखने के लिए हीलियम चाहिए होती है. नक्काशी की प्रक्रिया में तापमान स्थिर रखने के लिए इसका उपयोग होता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल हीलियम का कोई विकल्प मौजूद नहीं है.

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मेडिकल सेक्टर – अस्पतालों में MRI मशीनों के भीतर सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा रखने के लिए हीलियम का इस्तेमाल होता है.

स्पेस इंडस्ट्री – रॉकेट ईंधन टैंकों को साफ करने के लिए भी इसकी भारी मांग रहती है.

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क्यों हुआ संकट?

दुनिया की कुल हीलियम सप्लाई का करीब 30% हिस्सा अकेले कतर आता है. हाल ही में कतर के रास लफान प्लांट में प्रोडेक्शन ठप होने से वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है. यह दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नैचुरल गैस प्लांट है.

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सबसे बड़ी चुनौती हॉर्मुज स्ट्रेट में ईरान का कब्जा है. युद्ध की वजह से हीलियम से भरे सैकड़ों कंटेनर खाड़ी के पानी में फंसे हुए हैं. हीलियम को लिक्विड फॉर्म में केवल 35 से 48 दिनों तक ही स्टोर किया जा सकता है, उसके बाद यह गैस बनकर उड़ने लगती है. ऐसे में ट्रांसपोर्टेशन में देरी का सीधा मतलब है बेशकीमती गैस का नुकसान.

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बाजार पर क्या होगा असर?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह कमी बरकरार रही, तो स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल और एआई टूल्स के प्रोडेक्शन में भारी गिरावट आ सकती है. रूस पर लगे बैन की वजह से वहां से भी आपूर्ति संभव नहीं है, जिससे अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका पर टिकी हैं, जो हीलियम का सबसे बड़ा उत्पादक है.

First published on: Mar 31, 2026 04:24 PM

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