Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग अब एक वैश्विक आर्थिक युद्ध में तब्दील होती दिख रही है. ट्रंप ने जहां बुधवार तक ईरान को अपने पावर प्लांट बचाने का अल्टीमेटम दिया है, वहीं ईरान ने अब ‘बाब अल-मंदेब’ जलमार्ग को बंद करने की धमकी दी है. अगर यह बंद हुआ तो दुनिया की 25 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई एक झटके में बंद हो जाएगा. होर्मुज स्ट्रेट की वजह से पहले ही कई देशों में एनर्जी क्राइसिस पैदा हो गया है, बाब अल-मंदेब बंद होने की वजह से बीजिंग से लेकर बर्लिन और दिल्ली से लेकर न्यूयॉर्क तक हड़कंप मच सकता है.
बाब अल-मंदेब एक संकरा स्ट्रेट है जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. भौगोलिक रूप से यह उत्तर-पूर्व में यमन और दक्षिण-पश्चिम में जिबूती और इरिट्रिया (अफ्रीका) के बीच स्थित है. अपने सबसे संकरे बिंदु पर यह 29 किमी चौड़ा है. वर्तमान में इस क्षेत्र पर ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों का नियंत्रण है. हुती यमन के एक बड़े हिस्से पर काबिज हैं और उनके पास आधुनिक मिसाइलें और ड्रोन हैं.
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ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के शीर्ष सलाहकार और अनुभवी राजनयिक अली अकबर वेलायती ने साफ शब्दों में बाब अल-मंदेब बंद करने की धमकी दी है. वेलायती की इस चेतावनी का मतलब है कि यदि अमेरिका ने ईरान पर हमला किया या होर्मुज को जबरन खोलने की कोशिश की, तो ईरान के सहयोगी (हुती) लाल सागर के इस गेट को बंद कर देंगे.
वेलायती ने धमकी दी है कि अगर व्हाइट हाउस अपनी बेवकूफी भरी गलतियों को दोहराने की हिम्मत करता है, तो उसे जल्द ही एहसास हो जाएगा कि एक ही कदम से ग्लोबल एनर्जी और ट्रेड का फ्लो रुक सकता है. यह ट्रंप के उस अल्टीमेटम का जवाब है जिसमें उन्होंने बुधवार तक होर्मुज न खुलने पर ईरान के पावर प्लांट और पुलों को उड़ाने की धमकी दी है.
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जब से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद किया है, बाब अल-मंदेब का महत्व कई गुना बढ़ गया है. पहले सऊदी अरब अपना तेल आमतौर पर होर्मुज के रास्ते भेजता था. होर्मुज बंद होने के बाद, सऊदी ने अपनी ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ का इस्तेमाल बढ़ा दिया है, जो तेल को लाल सागर के बंदरगाह ‘यानबू’ तक ले जाती है. यहां से तेल बाब अल-मंदेब के रास्ते एशिया और यूरोप जाता है.
2024 में हर दिन लगभग 4.1 बिलियन बैरल कच्चा तेल यहां से गुजरा है. यह दुनिया के कुल तेल व्यापार का 5 प्रतिशत है. दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का 10 प्रतिशत व्यापार भी इसी रास्ते से होता है. चीन, भारत और वियतनाम जैसे देशों से यूरोप जाने वाले कंटेनर जहाज इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं.
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असली खतरा तब है जब होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों एक साथ बंद हो जाएं. होर्मुज से 20% और बाब अल-मंदेब से 5% तेल की आवाजाही होती है. दोनों बंद होने का मतलब है कि दुनिया की एक-चौथाई ऊर्जा आपूर्ति ठप हो जाएगी.
पेट्रोल-डीजल की कीमतें रातों-रात दोगुनी या तिगुनी हो सकती हैं. इसका असर सीधा माल ढुलाई पर पड़ेगा, जिससे खाने-पीने की चीजें और दवाइयां महंगी हो जाएंगी. स्वेज नहर के रास्ते यूरोप जाने वाला सारा व्यापार रुक जाएगा. कारखानों में कच्चे माल की कमी होगी और बिजली संकट गहरा जाएगा.
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इतिहास गवाह है कि हुती ऐसा करने की क्षमता रखते हैं. इजरायल-गाजा युद्ध के दौरान उन्होंने लाल सागर में जहाजों पर मिसाइलें दागकर शिपिंग कंपनियों को रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया था. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कुछ जहाजों पर भी हमले हुए तो कोई भी कमर्शियल जहाज उस रास्ते से जाने का जोखिम नहीं उठाएगा.
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