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एंटरटेनमेंट

सत्यजीत रे की वो 12 मिनट की शॉर्टफिल्म, जिसने सिनेमा को दिया नया नजरिया, नहीं किया एक भी डायलॉग का इस्तेमाल

Two A Film Fable review: सिनेमा जगत के महान निर्देशक सत्यजीत रे की ये शॉर्ट फिल्म सभी के दिलों पर राज करती है. इस फिल्म में एक भी डायलॉग नहीं है. उस जमाने में ऐसी कला और प्रर्दशन देखना काफी मुश्किल था.

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Edited By : Archi Tiwari Updated: Jan 22, 2026 18:55
Satyajit Ray short film, Two A Film Fable review
Satyajit Ray short film, Two A Film Fable review

Satyajit Ray Short Film: सिनेमा जगत में सत्यजीत रे की फिल्में हमेशा कल्ट क्लासिक रहती हैं. जब फिल्मों का कोई नामो निशान नहीं था, तब भी सत्यजीत रे ऐसी फिल्में और अलग अलग तरीके एक्सपेरिमेंट करते थे, जो सभी के होश उड़ा देती थीं. इन्हीं में से फिल्म Two: A Film Fable भी शामिल है.

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सत्यजीत रे की फिल्में

सत्यजीत रे ने कई बेहतरीन फिल्में बनाईं, जैसे पाथेर पांचाली और चारुलता. लेकिन उनकी Two: A Film Fable फिल्म ने सिनेमा की दुनिया में नया नजरिया दिया. यह सिर्फ 12 मिनट लंबी है और इसमें एक भी डायलॉग नहीं है. साल 1964 में बनी यह ब्लैक एंड व्हाइट शॉर्ट फिल्म आज भी लोगों को हैरान करती है.

कैसे बनी ये फिल्म?

अमेरिकन कंपनी ESSO World Theater ने सत्यजीत रे से शॉर्ट फिल्म बनाने की बात कही. साथ ही कहा कि वह फिल्म अंग्रेजी भाषा में होनी चाहिए और सेट बंगाली होना चाहिए. लेकिन इस मांग से परे हट सत्यजीत रे ने सोचा. उन्हें साइलेंट फिल्में बड़ी पसंद थी. इसीलिए उन्होंने इस फिल्म को बिना डायलॉग के बनाया. कोई डायलॉग नहीं, सिर्फ तस्वीरें, संगीत और भावनाएं. रे खुद ने कहानी लिखी, निर्देशन किया और बैकग्राउंड म्यूजिक भी बनाया.

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क्या है कहानी?

फिल्म दो लड़कों की कहानी दिखाती है. एक लड़का बहुत अमीर है. वह बड़े घर में रहता है, उसके पास ढेर सारे महंगे खिलौने हैं. दूसरा लड़का गरीब है. वह झुग्गी-झोपड़ी में रहता है और उसके पास सिर्फ एक बांसुरी है. अमीर लड़का अपनी खिड़की से गरीब लड़के को देखता है. वह अपने खिलौनों को दिखाकर घमंड करता है. पहले वह खिलौना बंदर दिखाता है, फिर रोबोट, कार और अन्य चीजें. गरीब लड़का अपनी बांसुरी बजाता है और खुश रहता है.

अमीर लड़का उस गरीब लड़के को प्रभावित करना चाहता है. लेकिन उसकी चीजें धीरे धीरे टूटने लगती हैं. वहीं गरीब लड़का अपनी बांसुरी में ही खुश रहता है. यह फिल्म दर्शाता है कि असली खुशी पैसे से नहीं बल्कि मन की शांति से आती है. इसमें किसी प्रकार का भेवभाव संभव नहीं.

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First published on: Jan 22, 2026 06:55 PM

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