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खाकी द बंगाल चैप्टर: क्राइम और पॉलिटिक्स का बेजोड़ फ्यूजन, देखने से पहले पढ़ें रिव्यू

नेटफ्लिक्स पर नीरज पांडे की 'खाकी द बंगाल चैप्टर' रिलीज हो चुकी है। इस सीरीज की कहानी एकदम अलग और कमाल की है। सीरीज को देखने से पहले आप इसका रिव्यू कर सकते हैं।

ओटीटी एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां पर फिल्में और सीरीज का आना जाना लगा रहता है। ऐसे में फैंस भी कंफ्यूज रहते हैं कि वो क्या देखें और क्या ना देखें? नई फिल्में और सीरीज जो सिनेमाघरों में रिलीज ना होकर सीधा ओटीटी पर आ जाती हैं, फैंस उन्हें देखने के लिए ज्यादा एक्साइटेड होते हैं। नेटफ्लिक्स पर नीरज पांडे की ‘खाकी द बंगाल चैप्टर’ रिलीज हो चुकी है। अगर आप भी इस सीरीज को देखने से पहले इसका रिव्यू पढ़ना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं कि कैसी है ‘खाकी द बंगाल चैप्टर’?

राजनीति और क्राइम

‘द बंगाल चैप्टर’ एक बेहतरीन क्राइम थ्रिलर हो सकती थी, अगर इसमें कुछ चीजें ना होती, जो बेहतरीन क्राइम थ्रिलर को रोक देती हैं। हालांकि, कई सालों में ऐसी क्राइम थ्रिलर देखने को मिलती है। ‘खाकी: द बंगाल चैप्टर’ की कहानी की बात करें तो ये भी कुछ ऐसी ही है, जिसमें कई उतार-चढ़ाव हैं। इस सीरीज की कहानी में राजनीति और क्राइम के फ्यूजन को दिखाया गया है।

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सीरीज की कहानी

इस सीरीज की कहानी पर आए, तो ये एक ईमानदार पुलिस वाले अर्जुन मोइत्रा (जीत) पर आधारित है। सीरीज की कहानी में बंगाल के एक नेता बरुण दास है, जो अपनी राजनीति चमकाने के लिए क्रिमिनल्स का सपोर्ट लेते हैं। इसमें इतना क्राइम दिखाया गया है कि सीरीज में कई मर्डर होते हैं। ना सिर्फ हत्या बल्कि इनकी जांच भी होती है।

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50 मिनट से 1 घंटे के करीब का एक एपिसोड

अगर आप भी राजनीति और क्राइम से भरी इस सीरीज की आगे की कहानी जानना चाहते हैं, तो इसके लिए आप सीरीज को देख सकते हैं। बता दें कि इस सीरीज में आपको सात एपिसोड मिलेंगे। हर एक एपिसोड 50 मिनट से 1 घंटे के करीब का है। इस सीरीज को देखने के बाद आपको ये नहीं लगेगा कि आप समय बर्बाद हुआ है। इसलिए आप इसे देख सकते हैं। ‘द बंगाल चैप्टर’ को 3.5 स्टार।

यह भी पढ़ें- नेटफ्लिक्स की जिस सीरीज के अनुराग कश्यप ने बांधे तारीफों के पुल, कैसी है Adolescence की कहानी?

First published on: Mar 20, 2025 02:53 PM

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About the Author

Subhash K Jha

सुभाष के झा आजीवन लता मंगेशकर, हिंदी सिनेमा और विश्व सिनेमा के प्रशंसक रहे हैं। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया से लेकर E24 तक लगभग हर प्रमुख अंग्रेजी भाषा के प्रकाशन में अपना योगदान दिया है। लेखन के अवसरों की उनकी तलाश जारी है। उनके आदर्श पर उनकी जीवनी पर काम चल रहा है।

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Nancy Tomar

सुभाष के झा आजीवन लता मंगेशकर, हिंदी सिनेमा और विश्व सिनेमा के प्रशंसक रहे हैं। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया से लेकर E24 तक लगभग हर प्रमुख अंग्रेजी भाषा के प्रकाशन में अपना योगदान दिया है। लेखन के अवसरों की उनकी तलाश जारी है। उनके आदर्श पर उनकी जीवनी पर काम चल रहा है।

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