Hari Hara Veera Mallu Review: पवन कल्याण के फैंस की लगी लॉटरी, जबरदस्त एक्शन-धांसू रिएक्शन

Hari Hara Veera Mallu Sword vs Spirit Movie Review: बॉक्स ऑफिस पर आज रिलीज हुई हरि हारा वीरा मल्लू पावर स्टार पवन कल्याण के फैंस के लिए खास है। 17वीं सदी के मुगल साम्राज्य की पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म में पवन कल्याण वीरा मल्लू औरंगजेब की सेना के खिलाफ विद्रोह करता है। इस फिल्म के लिए पवन कल्याण ने केवल 20 करोड़ रुपए लिए, जोकि पिछली फिल्म ब्रो से आधे से भी कम थे।

Hari Hara Veera Mallu movie review

Movie name: Hari Hara Veera Mallu

Director: Director Krish

Movie Casts: Pawan Kalyan, Bobby Deol, Nargis Fakri, Nidhi Aggarwal

★★★★★

Hari Hara Veera Mallu Sword vs Spirit Movie Review (अश्विनी कुमार): साउथ सिनेमा के सुपरस्टार आंध्र प्रदेश के डिप्टी CM पवन कल्याण की फिल्म हरि हारा वीरा मल्लू – पार्ट वन, टलते-टलते आखिर थियेटर्स तक पहुंची है। पहले कोरोना और फिर पॉवर स्टार पवण कल्याण की राजनीतिक एंट्री के चलते दो पार्ट वाली इस कहानी के पहले पार्ट में ही पूरे 5 साल लग गए। पवन कल्याण के लिए ये फिल्म बेहद खास है, क्योंकि राजनीति में जीत के बाद बॉक्स ऑफिस और फैन्स के दिल पर जीत की कहानी – हरि हारा वीरा मल्लू के कामयाबी से ही लिखी जानी है।

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बड़े स्केल पर तैयार की गई है फिल्म

ज़ाहिर है फिल्म बड़े स्केल पर तैयार की गई है, हैवी कॉस्ट्यूम, बड़े सेट्स और कहानी – मुगल साम्राज्य और कोहिनूर के साथ – सनातन धर्म का भगवा रंग फैलाते दिखती है। पॉवर स्टार के लिए ये फिल्म इतनी अहम है कि उन्होंने क्लाइमेक्स के 18 मिनट का फाइट सेक्वेंस खुद कोरियोग्राफ़ किया है, जिनसे उनके मार्शल ऑर्ट्स की झलक दिखती है। फिल्म के लिए हैदराबाद में चारमीनार, लाल किला, और मछलीपट्टनम पोर्ट जैसे ऐतिहासिक स्मारकों के सेट बनाए गए।

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हरि हारा वीरा मल्लू की कहानी का सार समझें

हरि हारा वीरा मल्लू – पार्ट वन – सोर्ड वर्सेज़ स्पिरिट ( तलवार वर्सेज़ आत्मा) फिल्म की कहानी 17वीं सदी के मुगल साम्राज्य के दौर की है। 1684 के साल में, जब छत्रपति शिवाजी के निधन को 4 साल बात चुके हैं, तब ये कहानी हमें वीर मल्लू (पवन कल्याण) से मिलवाती है, जो एक डाकू है, लेकिन बेहद अहम मकसद लिए हुए ये डाकू, असल में सनातन धर्म की रक्षा करने वाला वीर है। मुगल बादशाह औरंगजेब (बॉबी देओल) के हिंदुओं पर – जजिया टैक्स लगा रहा है। और वीर मल्लू – कोहिनूर हीरा चुराकर, पूरे शहर को मुगलों से आज़ाद करना चाहता है।

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फिल्म की कहानी पर डिबेट हो सकती है

ज़ाहिर है हरि हारा वीरा मल्लू के पहले पार्ट की ये कहानी – उस नरेटिव के अगेंस्ट है, जहां मुगलों की तारीफ़ों में कसीदे पढ़े जाते रहे हैं और ये भारत के असली नायकों की हिम्मत और देश की दौलत की लूट पर को दिखाती है। हिस्टॉरिकल एक्यूरेसी को लेकर फिल्म की कहानी पर डिबेट हो सकती है। मगर इसकी कहानी – मुगलों के अत्याचार की, जजिया के नाम पर हिंदुओं और सनातन धर्म को कमज़ोर करने के बेहिसाब जुल्म और विद्रोह करने वालों को चोर और डाकू का लेबल लगाने वाली कोशिशें, आपको झकझोरती हैं।

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इस फिल्म में दो विज़न साफ़ नज़र आते हैं

लंबे-असरे तक रुक-रुक कर बनी इस फिल्म में दो विज़न साफ़ नज़र आते हैं, पहला फिल्म के राइटर – और पहले डायरेक्टर कृष जगरलामुडी का दूसरा जब ए.एम ज्योति कृष्णा ने इस प्रोजेक्ट को ओवरटेक किया। कहानी अपना ग्रिप खोती है, बीच-बीच में आपको लगता है कि ये क्या और क्यों हो रहा है… और सेकेंड हॉफ़ में क्लाइमेक्स के पहले तक, लगता है ज़बरदस्ती फीलर सीन्स भर दिए गए हैं… क्योंकि इसके बाद, जो कुछ होना है वो सेकेंड पार्ट में होगा।

VFX के मामले में फिल्म बहुत कमज़ोर

फर्स्ट हॉफ़ और सेकेंड हॉफ़ के एक्शन सीक्वेंसेज़ – हरि हारा वीरा मल्लू का सबसे दिलचस्प हिस्सा है। ख़ास तौर पर सेकेंड हॉफ़ का क्लाइमेक्स एक्शन ब्लॉक। ऑस्कर विनर – एमएम किरवानी का म्यूज़िक फिल्म के कमज़ोर स्क्रीनप्ले को एलिवेट करता है। सेट डिज़ाइन और सिनेमैटोग्राफ़ी भी ठीक-ठाक है, मगर VFX के मामले में फिल्म बहुत कमज़ोर है। एवरेज से भी नीचे वाले CGI वर्क ने इस कहानी की इंटेसिटी को कमज़ोर किया है।

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वीर मल्लू के किरदार ने फिल्म में डाली जान

पवन कल्याण ने वीर मल्लू के किरदार में पूरी फिल्म का भार अपने कंधों पर उठाया है। उनके एक्शन सीक्वेंसेज़ और क्लाइमेक्स में – धर्म की रक्षा के लिए एक योद्धा के तौर पर उनके डायलॉग्स और डिलिवरी दोनो इमोशनली चार्ज करते हैं। बॉबी देओल ने औरंगजेब के किरदार को थोड़ा कैरिकेचरिस कर दिया है, बावजदू इसके वो ज़ालिम तो बहुत लगते हैं। निधि अग्रवाल और नोरा फतेही के पास स्क्रीन टाइम कम था और उनके कैरेक्टर्स पर कुछ बहुत काम भी नहीं किया गया।

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पवन कल्याण की परफॉरमेंस पर टिकी फिल्म

Hari Hara Veera Mallu: Part 1 – Sword vs Spirit, इतिहास से एक और वीर योद्धा की कहानी को लेकर आती है, जो पॉवर स्टार – पवन कल्याण की परफॉरमेंस पर टिकी है। एक ऐसी फिल्म, जो शुरुआत में ही सेकेंड पार्ट की अनाउंसमेंट कर चुकी हो… उसके प्रेजेंटेशन में थोड़ी और मेहनत की जानी चाहिए थी। ऐतिहासिक एक्शन ड्रामा पसंद करने वालों के लिए ये फिल्म – एक ठीक-ठाक ऑप्शन है।

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