बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव के कर्ज से जुड़ा मामला काफी गहरा गया है. एक्टर को 5 फरवरी को कोर्ट के आदेश पर तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा था. वो जेल में 12 दिनों तक रहे. फिर उन्हें अंतरिम जमानत दे दी गई. उन्होंने भतीजी की शादी की हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की याचिका दायर की थी. कोर्ट ने डेढ़ करोड़ रुपये जमा कराने के बाद रिहा किया है. इस बीच अब कर्ज देने वाले बिजनेसमैन का दर्द छलका है. उन्होंने बताया कि वो उन्हें एक्टर के आगे गिड़गिड़ाना पड़ा. फिर भी पैसे नहीं मिले.
दरअसल, राजपाल को कर्ज देने वाले बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल ने हाल ही में न्यूज पिंच से बात की और इसी बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्हें कर्ज कैसे दिया गया. उन्होंने 16 साल से चल रहे केस की पूरी कहानी बताई और कहा कि वो पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार कठेरिया के जरिए राजपाल से मिले थे.
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माधव गोपाल ने किया एग्रीमेंट का जिक्र
बिजनेसमैन के अनुसार, माधव गोपाल से एक्टर राजपाल यादव ने साल 2012 में फिल्म 'अता पता लापता' के लिए आर्थिक मदद की मांग की थी और उनसे कहा था कि लगभग पूरी हो चुकी थी, लेकिन बिना तुरंत फंडिंग के ये मूवी डूब जाएगी. माधव ने ये भी दावा किया कि उन्होंने पैसा सख्ती से कर्ज के तौर पर दिया था ना कि निवेश के लिए. माधव ने कहा कि एग्रीमेंट में साफ लिखा था कि भुगतान फिल्म की कमाई, सेंसर सर्टिफिकेट या रिलीज से जुड़ा नहीं हेगा. बिजनेसमैन ने बताया कि इस एग्रीमेंट में फिक्स्ड अमाउंड और फिक्स्ड टाइमलाइन थी. राजपाल ने इसके लिए पर्सनल गारंटी भी दी थी.
राजपाल के आगे पैसों के लिए गिड़गिड़ाए माधव
इतना ही नहीं, माधव गोपाल ने बताया कि वो राजपाल के घर गए और बच्चे की तरह उनके सामने रोए. उन्होंने एक्टर से कहा कि दूसरों से उधार लेकर उन्हें मदद की थी. उन्होंने अभिनेता से ये भी कहा था कि वो उन्हें पैसे देने की तारीख तक बता दें या फिर नया एग्रीमेंट फाइनल कर दें. अग्रवाल ने कहा कि वो उनसे पैसों के लिए भीख मांगते रहे. अग्रवाल बताते हैं कि बाद में उनसे और भी फंड की मांग की गई थी लेकिन उन्होंने मना कर दिया था, जिसके बाद पत्नी राधा ने उन्हें इमोशनली मैसेज भेजे थे और मदद की गुजारिश की थी. इसके बाद वो राजी हो गए थे.
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कैसे शुरू हुआ विवाद?
अग्रवाल ने ये भी बताया कि विवाद आखिर शुरू कैसे हुआ. वो बताते हैं कि जब फिल्म का म्यूजिक अमिताभ बच्चन ने लॉन्च किया तो उन्हें एग्रीमेंट याद आया कि फिल्म की नेगेटिव्स और कमाई पूरी होने पर सौंपनी है. फिर उन्होंने कोर्ट का रुख किया और फिल्म की रिलीज पर अस्थायी रोक लग गई. हालांकि, बाद में इस पर से स्टे हटा लिया गया था. राजपाल यादव ने उन्हें आश्वासन दिया कि रिलीज के बाद बकाया भुगतान कर दिया जाएगा लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई और वादा पूरा नहीं हो सका. फिर पैसे कभी नहीं मिल पाए.
10.40 करोड़ रुपये के साथ हुआ था सेटलमेंट
अग्रवाल ने 2013 में कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद मामले को 10.40 करोड़ रुपये के साथ सेटल कर दिया गया. कई चेक जारी किए गए तो चेक बाउंस हो गए. बार-बार डिफॉल्ट होने से उनके पास कानूनी रास्ता अपनाने के अलाना कोई चारा नहीं बचा था. अग्रवाल ने ये भी कहा कि वो एक बिजनेसमैन हैं. उन्हें किसी के बर्बादी में किसी तरह की को दिलचस्पी नहीं. उन्हें सिर्फ अपने पैसे वापस चाहिए.
बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव के कर्ज से जुड़ा मामला काफी गहरा गया है. एक्टर को 5 फरवरी को कोर्ट के आदेश पर तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा था. वो जेल में 12 दिनों तक रहे. फिर उन्हें अंतरिम जमानत दे दी गई. उन्होंने भतीजी की शादी की हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की याचिका दायर की थी. कोर्ट ने डेढ़ करोड़ रुपये जमा कराने के बाद रिहा किया है. इस बीच अब कर्ज देने वाले बिजनेसमैन का दर्द छलका है. उन्होंने बताया कि वो उन्हें एक्टर के आगे गिड़गिड़ाना पड़ा. फिर भी पैसे नहीं मिले.
दरअसल, राजपाल को कर्ज देने वाले बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल ने हाल ही में न्यूज पिंच से बात की और इसी बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्हें कर्ज कैसे दिया गया. उन्होंने 16 साल से चल रहे केस की पूरी कहानी बताई और कहा कि वो पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार कठेरिया के जरिए राजपाल से मिले थे.
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माधव गोपाल ने किया एग्रीमेंट का जिक्र
बिजनेसमैन के अनुसार, माधव गोपाल से एक्टर राजपाल यादव ने साल 2012 में फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए आर्थिक मदद की मांग की थी और उनसे कहा था कि लगभग पूरी हो चुकी थी, लेकिन बिना तुरंत फंडिंग के ये मूवी डूब जाएगी. माधव ने ये भी दावा किया कि उन्होंने पैसा सख्ती से कर्ज के तौर पर दिया था ना कि निवेश के लिए. माधव ने कहा कि एग्रीमेंट में साफ लिखा था कि भुगतान फिल्म की कमाई, सेंसर सर्टिफिकेट या रिलीज से जुड़ा नहीं हेगा. बिजनेसमैन ने बताया कि इस एग्रीमेंट में फिक्स्ड अमाउंड और फिक्स्ड टाइमलाइन थी. राजपाल ने इसके लिए पर्सनल गारंटी भी दी थी.
राजपाल के आगे पैसों के लिए गिड़गिड़ाए माधव
इतना ही नहीं, माधव गोपाल ने बताया कि वो राजपाल के घर गए और बच्चे की तरह उनके सामने रोए. उन्होंने एक्टर से कहा कि दूसरों से उधार लेकर उन्हें मदद की थी. उन्होंने अभिनेता से ये भी कहा था कि वो उन्हें पैसे देने की तारीख तक बता दें या फिर नया एग्रीमेंट फाइनल कर दें. अग्रवाल ने कहा कि वो उनसे पैसों के लिए भीख मांगते रहे. अग्रवाल बताते हैं कि बाद में उनसे और भी फंड की मांग की गई थी लेकिन उन्होंने मना कर दिया था, जिसके बाद पत्नी राधा ने उन्हें इमोशनली मैसेज भेजे थे और मदद की गुजारिश की थी. इसके बाद वो राजी हो गए थे.
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कैसे शुरू हुआ विवाद?
अग्रवाल ने ये भी बताया कि विवाद आखिर शुरू कैसे हुआ. वो बताते हैं कि जब फिल्म का म्यूजिक अमिताभ बच्चन ने लॉन्च किया तो उन्हें एग्रीमेंट याद आया कि फिल्म की नेगेटिव्स और कमाई पूरी होने पर सौंपनी है. फिर उन्होंने कोर्ट का रुख किया और फिल्म की रिलीज पर अस्थायी रोक लग गई. हालांकि, बाद में इस पर से स्टे हटा लिया गया था. राजपाल यादव ने उन्हें आश्वासन दिया कि रिलीज के बाद बकाया भुगतान कर दिया जाएगा लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई और वादा पूरा नहीं हो सका. फिर पैसे कभी नहीं मिल पाए.
10.40 करोड़ रुपये के साथ हुआ था सेटलमेंट
अग्रवाल ने 2013 में कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद मामले को 10.40 करोड़ रुपये के साथ सेटल कर दिया गया. कई चेक जारी किए गए तो चेक बाउंस हो गए. बार-बार डिफॉल्ट होने से उनके पास कानूनी रास्ता अपनाने के अलाना कोई चारा नहीं बचा था. अग्रवाल ने ये भी कहा कि वो एक बिजनेसमैन हैं. उन्हें किसी के बर्बादी में किसी तरह की को दिलचस्पी नहीं. उन्हें सिर्फ अपने पैसे वापस चाहिए.