हिंदी न्यूज़/एंटरटेनमेंट/'अजीब लगता है कि…', लक्ष्मी मांचू ने ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप विवाद पर तोड़ी चुप्पी, कही ये बड़ी बात
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‘अजीब लगता है कि…’, लक्ष्मी मांचू ने ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप विवाद पर तोड़ी चुप्पी, कही ये बड़ी बात
लक्ष्मी मांचू ने आखिरकार अपने नाम से जुड़े बेटिंग ऐप विवाद पर चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने इस मामले को हास्यास्पद बताते हुए कहा की हमेशा उन लोगों को निशाना बनाया जाता है, जिनसे नहीं जोड़ा जाना चाहिए.
तेलुगु एक्ट्रेस लक्ष्मी मांचू हाल ही में एक विवाद में फंस गई थीं. उनका नाम एक बेटिंग ऐप से जोड़ा गया। लंबे समय तक चुप रहने के बाद अब उन्होंने पहली बार इस पर अपना पक्ष रखा है। लक्ष्मी का कहना है कि उन्हें यह सब हास्यजनक लगता है, क्योंकि लोग हमेशा किसी विवाद के अंत में आकर उन पर उंगली उठाते हैं. कथित तौर पर उन पर अवैध तरीके से पैसा जुटाने वाले ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स को सपोर्ट करने का आरोप था. इसमें नाम सामने आने के बाद वह विवादों में घिर गई थीं. चलिए बताते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा.
दरअसल, तेलुगु एक्ट्रेस लक्ष्मी मांचू ने पूजा तलवार के साथ बातचीत की और इस दौरान उन्होंने बेटिंग ऐप से जुड़े मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, 'आप जानते हैं, ये ईडी की बैठक है.' उन्होंने इसके लिए सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा, 'अजीब लगता है कि हमारी सरकार उस इंसान के पीछे पड़ जाएगी. मैं तो सोचती हूं कि इसकी शुरुआत किसने की थी.'
इसके साथ ही लक्ष्मी ने मीडिया के इस मुद्दे को कवर करने के तरीके पर भी चिंता जताई कि खबरों में उनके नाम को कैसे पेश किया जा रहा है, जबकि असल में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें किस तरह की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि कई अन्य हस्तियां ऐसे काम कर रही हैं, लेकिन उन पर उसी तरह ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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जांच के मुद्दे और असली सवाल
जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि ये ऐप्स कैसे काम करते हैं, आर्थिक लेन-देन कहां तक हो रहे हैं. पैसा कैसे आ रहा है और प्रचार के लिए किन लोगों को पैसे दिए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर कई राज्यों में FIR दर्ज की गई है। एजेंसी ने 3 एक्टर्स के बयानों को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग' एक्ट के तहत दर्ज किया है।
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गौरतलब है कि इस मामले में कई सिलेब्रिटी-इन्फ्लुएंसर के नाम सामने आ चुके हैं. इसमें प्राकाश राज, विजय देवरकोंडा, राणा दग्गुबाती जैसे अन्य कलाकारों के नाम शामिल हैं, जिनके खिलाफ ED की पूछ-ताझ जारी है। लक्ष्मी मांचू को भी इस जांच के सिलसिले में हैदराबाद में ED कार्यालय आना पड़ा था, जहां उनसे कई घंटे तक पूछताछ हुई। ED की जांच का फोकस उन प्रचार अभियानों पर भी है जिनके जरिए लोगों को इन ऐप्स को चलने के लिए आकर्षित किया गया।
तेलुगु एक्ट्रेस लक्ष्मी मांचू हाल ही में एक विवाद में फंस गई थीं. उनका नाम एक बेटिंग ऐप से जोड़ा गया। लंबे समय तक चुप रहने के बाद अब उन्होंने पहली बार इस पर अपना पक्ष रखा है। लक्ष्मी का कहना है कि उन्हें यह सब हास्यजनक लगता है, क्योंकि लोग हमेशा किसी विवाद के अंत में आकर उन पर उंगली उठाते हैं. कथित तौर पर उन पर अवैध तरीके से पैसा जुटाने वाले ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स को सपोर्ट करने का आरोप था. इसमें नाम सामने आने के बाद वह विवादों में घिर गई थीं. चलिए बताते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा.
दरअसल, तेलुगु एक्ट्रेस लक्ष्मी मांचू ने पूजा तलवार के साथ बातचीत की और इस दौरान उन्होंने बेटिंग ऐप से जुड़े मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, ‘आप जानते हैं, ये ईडी की बैठक है.’ उन्होंने इसके लिए सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा, ‘अजीब लगता है कि हमारी सरकार उस इंसान के पीछे पड़ जाएगी. मैं तो सोचती हूं कि इसकी शुरुआत किसने की थी.’
इसके साथ ही लक्ष्मी ने मीडिया के इस मुद्दे को कवर करने के तरीके पर भी चिंता जताई कि खबरों में उनके नाम को कैसे पेश किया जा रहा है, जबकि असल में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें किस तरह की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि कई अन्य हस्तियां ऐसे काम कर रही हैं, लेकिन उन पर उसी तरह ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि ये ऐप्स कैसे काम करते हैं, आर्थिक लेन-देन कहां तक हो रहे हैं. पैसा कैसे आ रहा है और प्रचार के लिए किन लोगों को पैसे दिए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर कई राज्यों में FIR दर्ज की गई है। एजेंसी ने 3 एक्टर्स के बयानों को ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग’ एक्ट के तहत दर्ज किया है।
गौरतलब है कि इस मामले में कई सिलेब्रिटी-इन्फ्लुएंसर के नाम सामने आ चुके हैं. इसमें प्राकाश राज, विजय देवरकोंडा, राणा दग्गुबाती जैसे अन्य कलाकारों के नाम शामिल हैं, जिनके खिलाफ ED की पूछ-ताझ जारी है। लक्ष्मी मांचू को भी इस जांच के सिलसिले में हैदराबाद में ED कार्यालय आना पड़ा था, जहां उनसे कई घंटे तक पूछताछ हुई। ED की जांच का फोकस उन प्रचार अभियानों पर भी है जिनके जरिए लोगों को इन ऐप्स को चलने के लिए आकर्षित किया गया।