NEET-SS Qualifying Percentile: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वो नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट-सुपर स्पेशियलिटी (NEET-SS) एडमिशन के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल को मौजूदा 50 पर्सेंटाइल से घटाकर 30 पर्सेंटाइल करने के लिए तैयार है. इस प्रपोजल का मकसद बड़ी तादाद में सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को भरना है जो काउंसलिंग का दूसरा राउंड पूरा होने के बाद खाली रह जाती हैं.
1857 सीटें अभी भी खाली हैं
सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए एक नोट में सरकार ने कहा कि 1,857 सुपर-स्पेशियलिटी सीटें अभी खाली हैं. इन सीटों का एक बड़ा हिस्सा बहुत ज्यादा स्पेशलाइज्ड मेडिकल और सर्जिकल स्ट्रीम से जुड़ा है. केंद्र ने कहा कि स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड के लिए क्वालिफाइंग लिमिट को खास तौर पर 30 पर्सेंटाइल तक कम किया जा सकता है. इसने कहा कि इस कदम से ज्यादा कैंडिडेट हिस्सा ले पाएंगे और अवेलेबल ट्रेनिंग कैपेसिटी का बेहतर इस्तेमाल कर पाएंगे.
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट में केंद्र का पक्ष रखा. सरकार के मुताबिक, लिमिट कम करने से करीब 6000 और कैंडिडेट स्पेशल काउंसलिंग राउंड के लिए एलिजिबल हो सकते हैं. इससे खाली सीटों की संख्या से लगभग 3 गुना कैंडिडेट पूल बन जाएगा.
तमिलनाडु सीटों के लिए स्पेशल अरेंजमेंट
केंद्र ने तमिलनाडु में 40 खाली इन-सर्विस सीटों पर भी बात की. उसने कहा कि ये सीटें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और मामले के हालात के हिसाब से राज्य सरकार को वापस कर दी जाएंगी. इसके बाद तमिलनाडु को अपना स्ट्रे वैकेंसी राउंड कंडक्ट करने और पूरा करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया जाएगा. उस प्रोसेस के बाद भी खाली रहने वाली कोई भी सीट मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) को ट्रांसफर कर दी जाएगी. इसके बाद MCC उन सीटों के साथ-साथ दूसरी खाली सुपर-स्पेशियलिटी सीटों को कवर करते हुए एक स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड कंडक्ट करेगी, और ये प्रोसेस 2 हफ्ते में पूरा हो जाएगा.
ये बात तब कही गई जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से खाली सीटों को लेकर चिंताओं के बीच NEET-SS कट-ऑफ कम न करने के अपने फैसले पर फिर से सोचने को कहा. ये मामला तमिलनाडु में खाली 152 इन-सर्विस सुपर-स्पेशियलिटी सीटों को ऑल-इंडिया कोटे में ट्रांसफर करने को चुनौती देने वाली एक याचिका के दौरान उठा.