---विज्ञापन---

टाटा संस में बड़ा उलटफेर, नोएल टाटा के विरोध के बावजूद एन चंद्रशेखरन फिर बने चेयरमैन

टाटा संस में बड़ा उलटफेर हुआ है. बोर्ड की बैठक में नोएल टाटा के विरोध के बावजूद एन चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने का फैसला बहुमत से पलट गया. प्रस्ताव पास होते ही एन चंद्रशेखरन को फिर मिला 5 साल का नया कार्यकाल. जानें क्यों अहम है टाटा ग्रुप का यह बड़ा फैसला.

---विज्ञापन---

देश के सबसे बड़े कारोबारी घराने टाटा समूह में बहुत बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को अगले 5 साल के लिए फिर से एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के साथ ही चंद्रशेखरन का पिछले महीने पद से हटने का फैसला पलट गया है. गुरुवार को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में यह अहम फैसला लिया गया. हालांकि, यह फैसला सर्वसम्मति से नहीं हुआ. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के दोबारा कार्यकाल का विरोध किया और इसके खिलाफ वोट डाला. इसके बावजूद बोर्ड के अधिकांश सदस्यों के समर्थन से यह प्रस्ताव बहुमत से पास हो गया. टाटा ट्रस्ट की टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है.

अगस्त में किया था हटने का ऐलान

गौरतलब है कि अगस्त में चंद्रशेखरन ने ऐलान किया था कि वे 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद पद छोड़ देंगे. उन्होंने कहा था कि वे टाटा ग्रुप में अपने 40 साल पूरे कर चुके हैं और अब पद पर आगे नहीं बने रहना चाहते. लेकिन अब बोर्ड ने उनके फैसले को बदलते हुए उन्हें दोबारा जिम्मेदारी सौंप दी है. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के फैसले के बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा पहले ही शुरू की जा चुकी चेयरमैन चयन प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा या फिर बंद कर दिया जाएगा. टाटा संस और टाटा ट्रस्ट ने निदेशक मंडल की बैठक में लिए गए फैसलों पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

---विज्ञापन---

आरबीआई के आदेश के बीच बड़ा फैसला

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने का निर्देश दिया था. इस क्रम में कंपनी ने 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी चुकाया है. इस बात को लेकर भी ग्रुप में अंदरूनी चर्चाएं तेज थीं. नोएल टाटा लंबे समय से टाटा संस की सूचीबद्धता के खिलाफ रहे हैं. वहीं, टाटा संस में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी समूह कंपनी की सूचीबद्धता के पक्ष में है. चंद्रशेखरन को दोबारा कमान मिलने से टाटा समूह में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है, हालांकि कंपनी की ओर से अभी आधिकारिक बयान आना बाकी है.

कौन हैं एन चंद्रशेखरन?

साधारण परिवार से निकलकर देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह की कमान संभालने वाले एन चंद्रशेखरन की कहानी बेहद प्रेरणादायक है. एन चंद्रशेखरन इस जिम्मेदारी को पिछले कई सालों से पूरी मजबूती और सादगी के साथ निभा रहे हैं नटराजन चंद्रशेखरन, जिन्हें कॉरपोरेट जगत में लोग प्यार से ‘चंद्रा’ कहते हैं. एन चंद्रशेखरन का जन्म तमिलनाडु के मोहनूर गांव में एक तमिल परिवार में हुआ था. उन्होंने कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एप्लाइड साइंसेज में ग्रेजुएशन किया और फिर त्रिची के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से एमसीए (MCA) की डिग्री हासिल की. साल 1987 में वे देश की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से एक इंटर्न के तौर पर जुड़े. साल 2009 में, महज 46 साल की उम्र में, उन्हें टीसीएस का सीईओ और एमडी बनाया गया. वे इस पद को संभालने वाले सबसे युवा अधिकारियों में से एक थे.

---विज्ञापन---

टाटा संस की कमान और बड़े फैसले

साल 2017 में जब टाटा ग्रुप एक बड़े लीडरशिप संकट से जूझ रहा था, तब रतन टाटा और बोर्ड ने चंद्रशेखरन पर भरोसा जताया. वे टाटा संस के पहले ऐसे गैर-पारसी और पहले पेशेवर चेयरमैन बने, जो टाटा परिवार से ताल्लुक नहीं रखते थे. उनके चेयरमैन रहते हुए टाटा समूह ने कई बड़े मुकाम हासिल किए-चाहे वो एयर इंडिया की घर वापसी हो, बिगबास्केट का अधिग्रहण हो, या फिर सेमीकंडक्टर और ईवी जैसे भविष्य के सेक्टर्स में बड़ा निवेश. सटीक फैसले लेने में माहिर एन चंद्रशेखरन आज भारतीय उद्योग जगत की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में गिने जाते हैं.

First published on: Sep 17, 2026 04:06 PM

End of Article

About the Author

Vijay Kumar

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola