SEBI और NSE विवाद खत्म! सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बाद NSE ने चुकाए 1491 करोड़ रुपये, जानें क्या था पूरा मामला
SEBI और NSE के बीच को-लोकेशन और डार्क-फाइबर मामला खत्म. सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद NSE ने चुकाए 1491.21 करोड़ रुपये. जानें क्या था विवाद और आगे क्या होगा.
SEBI vs NSE Settlement: सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी, NSE ने चुकाए 1491 करोड़ रुपये
शेयर बाजार में पिछले कई सालों से चले आ रहे देश के सबसे बड़े और हाई-प्रोफाइल विवादों में से एक पर अब पूरी तरह से विराम लग गया है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बाजार नियामक सेबी (SEBI) के बीच को-लोकेशन (Co-location) और डार्क-फाइबर (Dark-Fibre) मामलों में समझौता हो गया है.
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने इस समझौते (Settlement) पर अपनी मुहर लगा दी है, जिसके तहत NSE ने सेबी को 1491.21 करोड़ का भुगतान किया है. आइए, समझते हैं कि यह पूरा विवाद आखिर था क्या और इस फैसले का बाजार पर क्या असर पड़ेगा.
विज्ञापन
Supreme Court has approved the settlement reached between the Securities and Exchange Board of India (SEBI) and the National Stock Exchange (NSE) in proceedings arising from the co-location and dark-fibre matters.
In compliance with SEBI’s consent mechanism, the NSE has payed…
सेबी के कंसेंट मैकेनिज्म (Consent Mechanism – एक तरह का आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट) के तहत एनएसई के 1491.21 करोड़ रुपये की राशि जमा करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने इससे जुड़े सभी लंबित (Pending) मामलों को समाप्त (Dispose of) कर दिया है. इस समझौते के साथ ही पिछले कई सालों से NSE पर लटक रही कानूनी तलवार अब पूरी तरह से हट गई है.
आखिर क्या थे को-लोकेशन और डार्क-फाइबर मामले? अगर आप शेयर बाजार में नए हैं या आसान भाषा में समझना चाहते हैं, तो आपको बता दें कि यह विवाद दो मुख्य बातों पर आधारित था. पहला को-लोकेशन मामला (Co-location Issue). एनएसई कुछ बड़े और चुनिंदा ब्रोकर्स को अपने सर्वर के बिल्कुल पास (उसी बिल्डिंग में) सर्वर लगाने की सुविधा देता था. आरोप था कि इससे उन ब्रोकर्स को बाकी आम निवेशकों की तुलना में कुछ मिलीसेकंड्स पहले मार्केट डेटा मिल जाता था, जिससे वे करोड़ों का मुनाफा कमा लेते थे.
विज्ञापन
दूसरा डार्क-फाइबर मामला (Dark-Fibre Issue). इसमें आरोप था कि कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी (डार्क फाइबर लाइन्स) की ऐसी सुविधा दी गई, जिससे उनके ट्रेड्स दूसरों के मुकाबले काफी तेजी से प्रोसेस होते थे.
इन आरोपों के बाद सेबी ने सख्त रुख अपनाया था और मामला कोर्ट तक पहुंच गया था.
विज्ञापन
इस समझौते का शेयर बाजार और निवेशकों पर क्या असर होगा? NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है. इतने सालों से चल रहा कानूनी विवाद अब खत्म होने से निवेशकों और बाजार का भरोसा और मजबूत होगा. NSE के IPO का रास्ता साफ होगा. इस मामले के खत्म होने से अब एनएसई के बहुप्रतीक्षित आईपीओ (NSE IPO) की राह में आ रही सबसे बड़ी कानूनी अड़चन दूर हो गई है.