भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला एक दशक (2014 से 2026 तक) ऐतिहासिक बदलावों का दौर रहा है. सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिए गए जोर ने देश की अर्थव्यवस्था का चेहरा तो बदला ही, साथ ही कई सेक्टर्स के निवेशकों की किस्मत भी चमका दी.
अगर आपने बीते कुछ सालों में शेयर बाजार को ट्रैक किया है, तो आपने गौर किया होगा कि कैसे कई सुस्त पड़े शेयर रातों-रात मल्टीबैगर बन गए. आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं उन 5 मुख्य सेक्टर्स के बारे में, जिन्होंने निवेशकों को बंपर रिटर्न दिया है:
किन सेक्टर्स ने दिया जोरदार रिटर्न
डिफेंस सेक्टर: आत्मनिर्भर भारत का सबसे बड़ा फायदा
पहले भारत अपनी जरूरत के ज्यादातर रक्षा उपकरण विदेश से खरीदता था. नीति में बदलाव कर घरेलू निर्माण (Make in India) पर जोर दिया गया और रक्षा निर्यात को बढ़ावा मिला. HAL, BEL और Mazagon Dock जैसी कंपनियों के पास ऑर्डर बुक की बाढ़ आ गई. बीते 5 वर्षों में Nifty India Defence Index ने निवेशकों को बहुगुणित (Multi-fold) रिटर्न दिया है.
रेलवे सेक्टर: पटरियों से लेकर ट्रेनों का मॉडर्नाइजेशन
वंदे भारत एक्सप्रेस, स्टेशनों का पुनर्विकास, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और रेलवे का 100% विद्युतीकरण का असर दिखने लगा है. IRFC, RVNL और IRCTC जैसी कंपनियों के शेयर जो कई सालों तक एक ही दायरे में फंसे थे, वे अचानक मल्टीबैगर बन गए. रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को मिले रिकॉर्ड बजटीय आवंटन से निवेशकों का पैसा कई गुना बढ़ा.
इंफ्रास्ट्रक्चर : हाइवे, एयरपोर्ट्स और पोर्ट्स की क्रांति
पीएम गति शक्ति और भारतमाला जैसी योजनाओं के जरिए देश में प्रतिदिन रिकॉर्ड किलोमीटर हाईवे, नए एयरपोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स पार्कों का निर्माण हुआ. इससे सीमेंट, कैपिटल गुड्स, इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी कंपनियों (जैसे L&T) के मुनाफे में भारी बढ़ोतरी हुई. बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च ने सीधे कंपनियों की वैल्यूएशन बढ़ा दी.
रिन्यूएबल एनर्जी : ग्रीन एनर्जी का नया दौर
साल 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा का लक्ष्य, नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और सोलर रूफटॉप जैसी योजनाओं से नया दौर शुरू हुआ है. सोलर पैनल्स, विंड टरबाइन और ग्रीन पावर जनरेट करने वाली कंपनियों के प्रति निवेशकों का क्रेज बहुत बढ़ा. इस सेक्टर से जुड़ी नई और पुरानी दोनों कंपनियों के वैल्यूएशन में जबरदस्त उछाल देखा गया.
पीएसयू स्टॉक्स : सरकारी शेयर बने बाजार के नए स्टार
पहले सरकारी कंपनियों (PSUs) को सुस्त माना जाता था. लेकिन कॉरपोरेट गवर्नेंस में सुधार, रिकॉर्ड डिविडेंड और पीएसयू बैंकों के एनपीए (NPA) में ऐतिहासिक गिरावट ने इनकी तस्वीर बदल दी. इससे BSE PSU Index ने पिछले 3-4 सालों में बेंचमार्क इंडेक्स (Sensex/Nifty) को पछाड़ते हुए रिकॉर्ड रिटर्न दिया. चाहे सरकारी बैंक हों या पावर/माइंस सेक्टर की पीएसयू- सभी ने निवेशकों को मालामाल किया.