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Luxury Electric Cars Trend: भारत के अमीरों को भा रही हैं इलेक्ट्रिक कारें! पेट्रोल-डीजल छोड़ अपना रहे EV; ये हैं 4 बड़े कारण

India Luxury EV Market Trends 2026: भारत में रईस खरीदार आम बाजार से 3 गुना तेजी से इलेक्ट्रिक गाड़ियां अपना रहे हैं. जानिए कम टैक्स, होम चार्जिंग और बेजोड़ परफॉर्मेंस की वजह से कैसे लग्जरी सेगमेंट में EVs की बिक्री बढ़ रही है.

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भारत में जहां आम कार खरीदार अभी भी चार्जिंग स्टेशनों की कमी, कम रेंज और ज्यादा कीमतों की वजह से इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) को अपनाने में थोड़ा हिचकिचा रहे हैं, वहीं देश के अमीर और लग्जरी कार खरीदार धड़ाधड़ इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ रुख कर रहे हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी से जून) में जहां देश के कुल कार बाजार में EVs की हिस्सेदारी सिर्फ 8-9 फीसदी रही, वहीं लग्जरी सेगमेंट में हर चौथी-पांचवीं बिकने वाली कार इलेक्ट्रिक रही. आखिर ऐसी क्या वजहें हैं कि भारत का रईस तबका पेट्रोल-डीजल की लग्जरी गाड़ियों को छोड़कर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को इतनी तेजी से अपना रहा है? आइए इसके पीछे की वजहों को समझते हैं.

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चार्जिंग और रेंज की टेंशन से आजादी

आम मध्यमवर्गीय परिवार के लिए EV अक्सर घर की इकलौती कार होती है. बहुमंजिला इमारतों में पार्किंग में चार्जर न होना या लंबी दूरी के सफर में चार्जिंग स्टेशन न मिलना उनके लिए बड़ी समस्या है. लेकिन अमीर परिवारों में ऐसा नहीं है. इनके पास अपने बंगलों या कवर्ड पार्किंग में होम-चार्जर लगाने की पूरी सुविधा होती है, जिससे गाड़ी रातभर में आसानी से चार्ज हो जाती है.

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EV इनके गैराज की अकेली कार नहीं होती. शहर के अंदर रोजमर्रा के सफर के लिए वे EV का इस्तेमाल करते हैं, जबकि लंबी दूरी की यात्रा के लिए गैराज में दूसरी पेट्रोल या डीजल गाड़ियां पहले से मौजूद रहती हैं.

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टैक्स का भारी फायदा
कीमतों के मामले में भी टैक्स स्ट्रक्चर लग्जरी ईवी को बहुत फायदेमंद बनाता है. भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर महज 5% GST लगता है. वहीं, बड़ी पेट्रोल-डीजल की लग्जरी गाड़ियों पर 28% GST के साथ-साथ भारी-भरकम कंपन्सेशन सेस (Compensation Cess) भी चुकाना पड़ता है. लाखों-करोड़ों की गाड़ियों पर यह टैक्स अंतर इतना बड़ा हो जाता है कि लग्जरी इलेक्ट्रिक कार और पेट्रोल-डीजल कार की कीमतों का फासला लगभग खत्म हो जाता है.

साइलेंस, स्पीड और लग्जरी का बेजोड़ अहसास
लग्जरी कार का असली मतलब होता है- केबिन के अंदर शांति, बिना आवाज का सफर और झटके रहित पिकअप. इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इंजन न होने के कारण केबिन के अंदर बिल्कुल शोर नहीं होता, जो प्रीमियम अहसास को कई गुना बढ़ा देता है. इलेक्ट्रिक मोटर का इंस्टेंट टॉर्क गाड़ी को पलक झपकते ही रफ्तार पकड़ने की ताकत देता है, जो ड्राइविंग के शौकीनों को बेहद पसंद आ रहा है.

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विकल्पों की भरमार
पिछले एक-दो सालों में लगभग सभी बड़े ग्लोबल लग्जरी कार निर्माताओं ने भारत में अपनी एक से बढ़कर एक इलेक्ट्रिक सेडान और SUVs उतारी हैं. अब खरीदारों को अपनी मनपसंद बॉडी स्टाइल या ब्रांड से समझौता नहीं करना पड़ता. 50-60 लाख रुपये के सेगमेंट से लेकर 3 से 5 करोड़ की सुपर-लग्जरी रेंज में कई नए विकल्प मौजूद हैं.

आंकड़े बताते हैं कि भारत के कुल कार बाजार में लग्जरी गाड़ियों की हिस्सेदारी भले ही 1.1% से 1.2% के बीच हो, लेकिन देश की कुल इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में इनका योगदान 2.5% से 2.7% है. यानी लग्जरी सेगमेंट आम बाजार से दोगुना तेजी से इलेक्ट्रिक हो रहा है. कम मेंटेनेंस, शानदार परफॉर्मेंस और अनुकूल टैक्स पॉलिसी के चलते आने वाले दिनों में यह ट्रेंड और मजबूत होने वाला है.

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First published on: Sep 02, 2026 06:47 AM

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