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क्यों भारत के लिए LPG की सफलता ही बनी उसकी सबसे बड़ी कमजोरी? लंबी कतार में खड़ा देश

देश में एलपीजी की सफलता की यह चमक अब एक पैराडॉक्स उकेर रही है. भारत सालाना 31 मिलियन टन से अधिक एलपीजी का उपभोग करता है, जबकि घरेलू रिफाइनरियां आधे से भी कम उत्पादन करती हैं.

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Written By: Akarsh Shukla Updated: Mar 13, 2026 19:28

भारत की स्वच्छ रसोई अभियान की चमकदार सफलता अब एक कड़वी सच्चाई उजागर कर रही है. दशक भर पहले जो लाखों परिवारों के लिए स्वास्थ्य और सुविधा का प्रतीक बनी, वह लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) आज आयात की बेड़ियों में जकड़ी हुई एक कमजोर कड़ी साबित हो रही है. मिडिल ईस्ट में छिड़े संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता अवरुद्ध कर दिया, और भारत की रसोईयों तक पहुंचने वाली गैस की सप्लाई चेन रुक सी गई है. इसका नतीजा ये हुआ कि शहरों और गांवों में एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारें, सप्ताह भर की देरी, और एक अजीबोगरीब पैनिक क्रिएट हो गया है, जो सरकार के लिए भी चुनौती बन गया है.

सुविधा कैसे बनी समस्या?


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट कोई अचानक आया तूफान नहीं, बल्कि एक लंबे सफर का परिणाम है. 2016 में शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने गरीब और ग्रामीण परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देकर इतिहास रच दिया. योजना का लक्ष्य था कि लकड़ी, गोबर के उपले और कोयले जैसे पारंपरिक ईंधनों से मुक्ति, ताकि घरों में धुंआ कम हो और महिलाओं-बच्चों के स्वास्थ्य पर असर न पड़े. 2016 में जहां घरेलू एलपीजी कवरेज मात्र 62 प्रतिशत था, वह 2026 तक बढ़कर 95 प्रतिशत से अधिक हो गया.

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भारत में कुल कितने LPG कनेक्शन?


आपको जानकर हैरानी होगी कि आज देश में 33 करोड़ से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन हैं, जिनमें से 10 करोड़ से अधिक उज्ज्वला योजना के तहत वितरित किए गए. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, 2010 में 10.6 करोड़ कनेक्शन थे, जो 2025 तक 33 करोड़ तक पहुंच गए. यह बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए वरदान साबित हुआ, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य में भी क्रांति लाया. धुंए से होने वाली सांस की बीमारियां घटीं, और महिलाओं को घंटों की मेहनत से निजात मिली.

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सालाना कितना LPG उपभोग करता है भारत?


देश में एलपीजी की सफलता की यह चमक अब एक पैराडॉक्स उकेर रही है. भारत सालाना 31 मिलियन टन से अधिक एलपीजी का उपभोग करता है, जबकि घरेलू रिफाइनरियां आधे से भी कम उत्पादन करती हैं. बाकी की पूर्ति सऊदी अरब, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों से आयात पर निर्भर है. ये टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हैं. इस महीने की शुरुआत में मध्य पूर्व युद्ध ने समुद्री यातायात ठप कर दिया. कच्चे तेल के विपरीत, जो भारत अब 40 से अधिक देशों से आयात करता है, एलपीजी आयात अभी भी खाड़ी पर केंद्रित है.

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First published on: Mar 13, 2026 06:47 PM

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