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जेम्स विल्सन से षणमुखम चेट्टी तक… 166 साल पुराना है बजट का इतिहास, जानिए- दिलचस्प किस्से

भारत का पहला केंद्रीय बजट 7 अप्रैल, 1860 को जेम्स विल्सन ने पेश किया गया था. वह भारतीय परिषद के वित्त सदस्य और 'द इकोनॉमिस्ट' अखबार के संस्थापक थे. उस समय भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था.

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Edited By : Arif Khan Updated: Jan 22, 2026 16:48
ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया ने जेम्स विल्सन को भारत भेजा था.

केंद्रीय बजट देश के आर्थिक ढांचे में अत्यधिक अहमियत रखता है, जिसकी जड़ें औपनिवेशिक काल से जुड़ी हैं. यह दस्तावेज सरकार की वित्तीय स्थिति को दर्शाता है, जिसमें राजस्व, व्यय और राजकोषीय नीतियां शामिल होती हैं. वर्षों से, बजट में काफी बदलाव होते आए हैं. आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में पेश करेंगी. आज हम बताएंगे कि भारत का सबसे पहला बजट किसने पेश किया था.

बजट का इतिहास

भारत का पहला केंद्रीय बजट 7 अप्रैल, 1860 को जेम्स विल्सन ने पेश किया गया था. वह भारतीय परिषद के वित्त सदस्य और ‘द इकोनॉमिस्ट’ अखबार के संस्थापक थे. उस समय भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था. यह बजट 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम के बाद ब्रिटिश शासन की ओर से झेली गई वित्तीय कठिनाइयों का समाधान था.

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इनकम टैक्स की हुई थी शुरुआत

विद्रोह के बाद, ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया ने वित्तीय प्रणाली में सुधार, टैक्स स्ट्रक्चर शुरू करने और नई पेपर करेंसी लागू करने के लिए जेम्स विल्सन को भारत भेजा था. उनकी प्रमुख पहलों में से एक इनकम टैक्स की शुरुआत थी. उस वक्त 200 रुपए सालाना से ज्यादा कमाई वालों को टैक्स देना पड़ता था. इनकम टैक्स आज भी सरकारी राजस्व का एक अहम सोर्स बना हुआ है.

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आजादी के बाद का पहला बजट

आजाद मिलने के बाद स्वतंत्र राष्ट्र भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर, 1947 को पहले वित्त मंत्री आर.के. षणमुखम चेट्टी ने पेश किया था. यह बजट देश के बंटवारे की पृष्ठभूमि में पेश किया गया था. बंटवारे ने अर्थव्यवस्था को काफी हद तक अस्त-व्यस्त कर दिया था. भारत को बड़े पैमाने पर पलायन, शरणार्थी संकट, राजस्व पैदा करने वाले क्षेत्रों का नुकसान और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. देश में अनाज की भारी किल्लत थी, जिसे दूर करने के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही थी.

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सेना को मिला था सबसे ज्यादा बजट

यह बजट कोई पूर्ण बजट नहीं था. यह 15 अगस्त, 1947 से 31 मार्च, 1948 तक यानी 7.5 महीने की अवधि के लिए था, क्योंकि इसे साल के बीच में तैयार किया गया था. कुल राजस्व का अनुमान 171.15 करोड़ रुपये लगाया गया था, जबकि कुल खर्च 197.29 करोड़ रुपये था. इस प्रकार, पहले बजट में 26.14 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा दर्ज किया गया. बजट के कुल खर्च का करीब 46 फीसदी हिस्सा सेना को दिया गया था. उस वक्त कश्मीर में तनाव बढ़ रहा था.

कौन थे शनमुखम चेट्टी?

1892 में पैदा हुए शनमुखम चेट्टी वित्तमंत्री बनने से पहले एक बिजनेसमैन थे. वे कोचीन के दीवान रहे थे. वह एक प्रसिद्ध वकील, अर्थशास्त्री और राजनेता थे. उनका ताल्लुक कांग्रेस पार्टी से नहीं था. बल्कि वह कांग्रेस के राजनीतिक धुर विरोधी माने जाने वाली ‘जस्टिस पार्टी’ से थे. उनकी काबिलियत को देखते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपनी पहली कैबिनेट में वित्त मंत्री के रूप में चुना. चेट्टी के इस्तीफे के बाद, जॉन मथाई ने भारत के वित्त मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला और 1949-50 तथा 1950-51 के लिए देश के अगले दो केंद्रीय बजट पेश किए.

First published on: Jan 22, 2026 04:47 PM

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