अमेरिका में बसने और US Green Card हासिल करने का सपना देख रहे भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए हाल ही में आई एक रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है. वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक National Foundation for American Policy (NFAP) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर कोई भारतीय प्रोफेशनल जनवरी 2026 या उसके बाद EB-2 कैटेगरी के तहत ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करता है, तो उसे अपनी बारी आने के लिए 179 साल तक का इंतजार करना पड़ सकता है.
यानी कि ग्रीन कार्ड मिलने से पहले इंसान की कई पीढ़ियां गुजर जाएंगी. आइए समझते हैं कि आखिर यह पूरा माजरा क्या है और भारतीयों के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है.
ग्रीन कार्ड क्या है और यह इतना खास क्यों है?
ग्रीन कार्ड (Green Card) किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने का कानूनी अधिकार (Permanent Residency) देता है. एच-1बी (H-1B) जैसे टेम्परेरी वर्क वीजा के उलट, ग्रीन कार्ड मिलने के बाद व्यक्ति को बार-बार वीजा रिन्यू कराने की टेंशन नहीं रहती.
179 साल का इंतजार क्यों?
इस ऐतिहासिक और डरावने बैकलाग (Backlog) के पीछे अमेरिकी इमिग्रेशन कानून की दो मुख्य शर्तें हैं. पहली शर्त सालाना 1.4 लाख का फिक्स कोटा. अमेरिका हर साल एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड (EB) कैटेगरी में कुल 140,000 ग्रीन कार्ड जारी करता है. खास बात यह है कि इस गिनती में सिर्फ नौकरी करने वाला मुख्य व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उसके पति/पत्नी और बच्चे (Dependents) भी शामिल होते हैं. दूसरी शर्त है 7% की कंट्री कैप (Country Limit). कानून के मुताबिक, किसी भी एक देश के नागरिकों को कुल ग्रीन कार्ड का अधिकतम 7% (यानी करीब 9800 से 10000) ही मिल सकता है. अब समस्या यह है कि लक्जमबर्ग या आइसलैंड जैसे छोटे देशों के लिए भी वही 7% कोटा है और भारत जैसे 1.4 अरब की आबादी वाले देश के लिए भी वही 7%.
यह 179 साल का आंकड़ा एक गणितीय अनुमान है, कोई गारंटी नहीं. लेकिन यह दिखाता है कि कतार कितनी विशाल हो चुकी है.
बैकलाग में 79% कब्जा भारतीयों का
NFAP रिपोर्ट के मुताबिक, एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड की कतार में कुल 12.6 लाख से ज्यादा लोग फंसे हैं. इनमें से अकेले भारतीय 9.96 लाख (लगभग 10 लाख) हैं. यानी ग्रीन कार्ड की लाइन में खड़ा हर 5 में से 4वां इंसान भारतीय है.
क्या सच में 179 साल लगेंगे?
इमिग्रेशन कानून के जानकारों का कहना है कि यह डेटा सिर्फ मौजूदा गति और बैकलॉग की भयावहता को दिखाता है. अगर किसी भारतीय का EB-2 में I-140 अप्रूव हो जाता है, तो वे H-1B वीजा को 6 साल की लिमिट के बाद भी अनलिमिटेड समय के लिए एक्सटेंड कराते रह सकते हैं और अमेरिका में कानूनी रूप से काम कर सकते हैं. समय-समय पर अमेरिकी संसद (Congress) में कंट्री-कैप (7% लिमिट) हटाने या कोटा बढ़ाने के बिल पेश होते रहते हैं. अगर आने वाले वर्षों में कानून बदलता है, तो यह वेटिंग टाइम काफी कम भी हो सकता है.
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