Nitin Arora
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Senior Citizens Fare Concession: कोरोना वायरस महामारी से पहले वरिष्ठ नागरिकों को बहुत राहत थी, लेकिन अब स्थिति पहले जैसी नहीं है। इसी कारण एक संसदीय स्थायी समिति ने कोरोना वायरस महामारी से पहले रेलवे द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली किराया रियायत को फिर से शुरू करने की सिफारिश की है। भारतीय रेलवे 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुषों को किराए में 40 प्रतिशत की छूट देता था और महिलाओं के लिए न्यूनतम आयु 58 वर्ष होने पर 50 प्रतिशत की छूट दी जाती थी।
ये रियायतें मेल/एक्सप्रेस/राजधानी/शताब्दी/दुरंतो समूह की ट्रेनों के सभी वर्गों के किराए में दी गई थीं, लेकिन 20 मार्च, 2020 को वापस ले ली गईं।
अब भाजपा सांसद राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता वाली रेलवे की स्थायी समिति ने सोमवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की गई अनुदान की मांग पर अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश की। इसने पिछली रिपोर्ट में भी यही सिफारिश की थी।
समिति ने कहा कि रेलवे द्वारा दी गई जानकारी से अब कोविड की स्थिति सामान्य हो गई है और राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने सामान्य वृद्धि हासिल कर ली है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘समिति ने यात्री आरक्षण प्रणाली पर अपनी 12वीं कार्रवाई रिपोर्ट (17वीं लोकसभा) में यह भी इच्छा व्यक्त की थी कि वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली रियायतें जो पूर्व-कोविड समय में उपलब्ध थीं, की समीक्षा की जा सकती है और कम से कम स्लीपर क्लास और 3ए क्लास में विचार किया जा सकता है ताकि कमजोर और वास्तव में जरूरतमंद नागरिक इन वर्गों में सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इसलिए, समिति अपनी उपर्युक्त रिपोर्ट में निहित अपनी पूर्व की सिफारिशों को दोहराती है और रेलवे से आग्रह करती है कि इस समिति को सूचित करते हुए विशेष रूप से स्लीपर क्लास और 3ए क्लास में वरिष्ठ नागरिकों के लिए किराए में रियायतों की बहाली के लिए सहानुभूतिपूर्वक विचार करें।’
हालांकि, रेलवे ने कहा कि रियायत फिर से शुरू करने की उसकी कोई तत्काल योजना नहीं है। इसने कहा कि पहले से ही सभी यात्रियों को 50-55 प्रतिशत की रियायत दी जा रही है।
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