कच्चे तेल के दामों में बड़ी गिरावट! ईरान पर ट्रंप के एक फैसले से शांत हुआ अंतरराष्ट्रीय बाजार, भारत पर क्या होगा असर?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमला टालने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 2% गिरीं। जानिए इस फैसले से मिड-ईस्ट तनाव पर क्या असर हुआ और क्या भारत में सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल।

OIL PRICE

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला करने का फैसला टाल दिया है।

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ग्लोबल मार्केट और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आ रही है। पश्चिम एशिया (मिड-ईस्ट) में लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों पर अचानक ब्रेक लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य हमले (Strike) को टालने या रोकने के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 2% से ज्यादा टूट गई हैं। आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि ग्लोबल मार्केट में अचानक यह बड़ा बदलाव क्यों आया और आने वाले दिनों में तेल की कीमतें किस दिशा में जाने वाली हैं।

डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से कैसे संभला बाजार?

पिछले कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में तनाव इस कदर बढ़ गया था कि निवेशकों को डर था कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव शुरू हो सकता है। अगर ऐसा होता, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो जाती और क्रूड ऑयल $111 प्रति बैरल के भी पार जा सकता था।

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लेकिन जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला न करने या बातचीत का रास्ता चुनने का संकेत दिया, बाजार से युद्ध का डर (War Premium) कम हो गया। इसके तुरंत बाद वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) और अमेरिकी क्रूड (WTI) की कीमतों में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

अब आगे कहां जाएंगे दाम?
कमोडिटी मार्केट के बड़े विश्लेषकों और विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में आई यह गिरावट अस्थाई भी हो सकती है और लंबी भी, जो इन बातों पर निर्भर करेगी:

सप्लाई में सुधार: अगर अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक बातचीत आगे बढ़ती है, तो तेल उत्पादक देशों (OPEC+) की तरफ से सप्लाई सामान्य बनी रहेगी, जिससे कीमतें $80-$85 प्रति बैरल के दायरे में वापस आ सकती हैं।

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चीन और अमेरिका की डिमांड: अगर वैश्विक स्तर पर औद्योगिक मांग (Industrial Demand) सुस्त रहती है, तो कच्चे तेल के दामों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

भारत के लिए क्यों बेहद अहम है यह खबर?
भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में 2% की गिरावट आने का सीधा मतलब है कि भारत का आयात बिल कम होगा।

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इससे भारतीय तेल विपणन कंपनियों (HPCL, BPCL, IOCL) का घाटा कम होगा और आने वाले दिनों में देश के आम नागरिकों को पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों से बड़ी राहत मिल सकती है।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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