Rupee at All Time Low: ₹96 के पार फिसला रुपया! क्या पहली बार शतक लगाएगा डॉलर? जानें आपकी जेब और देश पर क्या होगा असर
यूएई न्यूक्लियर प्लांट पर हमले और $111 प्रति बैरल पहुंचे कच्चे तेल के कारण भारतीय रुपया 18 मई 2026 को ₹96.17 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गिरा है। जानिए क्या डॉलर ₹100 पार करेगा और इसका आप पर क्या असर होगा।
News24 AI द्वारा निर्मित • संपादकीय टीम द्वारा जांचा गया
रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के मुख्य कारण
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 21 पैसे गिरकर 96.17 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
UAE के न्यूक्लियर प्लांट पर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक बढ़कर $111 प्रति बैरल हो गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी प्रीमियर शी जिनपिंग के बीच व्यापार वार्ता बेनतीजा रही, जिससे विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से पैसा निकाला।
कमजोर रुपये का आम आदमी पर असर
रुपये के कमजोर होने से पेट्रोल-डीजल, फल, सब्जियां, विदेश में पढ़ाई और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आयातित सामान महंगे हो सकते हैं।
ग्लोबल मार्केट से आज सोमवार की सुबह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर आई है। शेयर बाजार खुलते ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हमारा भारतीय रुपया (Rupee) 21 पैसे और टूटकर 96.17 के अब तक के सबसे निचले और ऐतिहासिक स्तर (All-Time Low) पर पहुंच गया है। पिछले हफ्ते शुक्रवार को ही रुपये ने इतिहास में पहली बार 96 का मनोवैज्ञानिक स्तर पार किया था, और आज कमजोरी का यह सिलसिला और बढ़ गया है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या रुपया इसी तरह गिरता रहेगा? क्या डॉलर वाकई ₹100 का आंकड़ा छूने वाला है? और सबसे जरूरी बात, इस गिरते रुपये का आपकी और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा? आइए, आसान भाषा में इस पूरे गणित को समझते हैं।
UAE के न्यूक्लियर प्लांट पर हमला और $111 पर क्रूड ऑयल पश्चिम एशिया (मिड-ईस्ट) में जारी ईरान युद्ध के बीच रविवार रात एक बेहद चौंकाने वाली घटना हुई। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक न्यूक्लियर प्लांट पर हमला कर दिया गया, जिसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पूरी तरह खटाई में पड़ती नजर आ रही है। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) 1 फीसदी से ज्यादा उछलकर $111 प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात बेनतीजा वैश्विक व्यापार को पटरी पर लाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी प्रीमियर शी जिनपिंग के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इस राजनीतिक गतिरोध और अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों की वजह से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) से अपना पैसा निकालना और सुरक्षित अमेरिकी डॉलर में लगाना शुरू कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' युद्ध के कारण बंद है। भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदता है। जब तेल महंगा होता है, तो भारत को उसे खरीदने के लिए बहुत ज्यादा डॉलर चुकाने पड़ते हैं। डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया कमजोर और डॉलर मजबूत होता जाता है।
क्या डॉलर ₹100 का 'शतक' लगाने वाला है? वित्तीय मामलों की दिग्गज फर्म फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स (Finrex Treasury Advisors) के विश्लेषकों का मानना है कि हालात वाकई गंभीर हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर यह युद्ध तुरंत नहीं रुका और होर्मुज का रास्ता दोबारा नहीं खुला, तो डॉलर की मांग इसी तरह बढ़ती रहेगी। यदि रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में डॉलर की आमद (Inflow) बढ़ाने के लिए तुरंत कोई नई योजना या स्कीम नहीं पेश की, तो बहुत जल्द 1 डॉलर की कीमत ₹100 के स्तर पर पहुंच सकती है।
आम आदमी पर क्या होगा असर? जब रुपया रिकॉर्ड स्तर पर कमजोर होता है, तो उसका सीधा खामियाजा देश के आम नागरिक को भुगतना पड़ता है:
महंगी होंगी गाड़ियां और सफर: पेट्रोल-डीजल के दाम (जो हाल ही में ₹3 बढ़े हैं) और बढ़ सकते हैं। जब ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा, तो फल, सब्जियां और राशन की कीमतें भी बढ़ेंगी।
विदेश में पढ़ाई और घूमना महंगा: अगर आपका बच्चा विदेश में पढ़ रहा है या आप विदेश यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं, तो अब आपको कॉलेज की फीस और होटल बुकिंग के लिए पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा भारतीय रुपये खर्च करने होंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स का झटका: स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य विदेशी कल-पुर्जे जो विदेशों से आयात होते हैं, उनकी इनपुट कॉस्ट बढ़ जाएगी, जिससे टेक गैजेट्स महंगे हो सकते हैं।
आगे की राह: अब क्या करेगी सरकार और RBI? भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex) फिलहाल मजबूत है, लेकिन कच्चे तेल के $111 पार होने से 'करंट अकाउंट डेफिसिट' (व्यापार घाटा) बढ़ने का खतरा है। इस स्थिति से निपटने के लिए आरबीआई बाजार में खुद डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश कर सकता है। साथ ही, हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देशवासियों से की गई सोने की खरीद कम करने और ईंधन बचाने की अपील अब और भी प्रासंगिक हो गई है।
ग्लोबल मार्केट से आज सोमवार की सुबह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर आई है। शेयर बाजार खुलते ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हमारा भारतीय रुपया (Rupee) 21 पैसे और टूटकर 96.17 के अब तक के सबसे निचले और ऐतिहासिक स्तर (All-Time Low) पर पहुंच गया है। पिछले हफ्ते शुक्रवार को ही रुपये ने इतिहास में पहली बार 96 का मनोवैज्ञानिक स्तर पार किया था, और आज कमजोरी का यह सिलसिला और बढ़ गया है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या रुपया इसी तरह गिरता रहेगा? क्या डॉलर वाकई ₹100 का आंकड़ा छूने वाला है? और सबसे जरूरी बात, इस गिरते रुपये का आपकी और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा? आइए, आसान भाषा में इस पूरे गणित को समझते हैं।
UAE के न्यूक्लियर प्लांट पर हमला और $111 पर क्रूड ऑयल पश्चिम एशिया (मिड-ईस्ट) में जारी ईरान युद्ध के बीच रविवार रात एक बेहद चौंकाने वाली घटना हुई। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक न्यूक्लियर प्लांट पर हमला कर दिया गया, जिसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पूरी तरह खटाई में पड़ती नजर आ रही है। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) 1 फीसदी से ज्यादा उछलकर $111 प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात बेनतीजा वैश्विक व्यापार को पटरी पर लाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी प्रीमियर शी जिनपिंग के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इस राजनीतिक गतिरोध और अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों की वजह से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) से अपना पैसा निकालना और सुरक्षित अमेरिकी डॉलर में लगाना शुरू कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ युद्ध के कारण बंद है। भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदता है। जब तेल महंगा होता है, तो भारत को उसे खरीदने के लिए बहुत ज्यादा डॉलर चुकाने पड़ते हैं। डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया कमजोर और डॉलर मजबूत होता जाता है।
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आम आदमी पर क्या होगा असर? जब रुपया रिकॉर्ड स्तर पर कमजोर होता है, तो उसका सीधा खामियाजा देश के आम नागरिक को भुगतना पड़ता है:
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विदेश में पढ़ाई और घूमना महंगा: अगर आपका बच्चा विदेश में पढ़ रहा है या आप विदेश यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं, तो अब आपको कॉलेज की फीस और होटल बुकिंग के लिए पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा भारतीय रुपये खर्च करने होंगे।
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इलेक्ट्रॉनिक्स का झटका: स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य विदेशी कल-पुर्जे जो विदेशों से आयात होते हैं, उनकी इनपुट कॉस्ट बढ़ जाएगी, जिससे टेक गैजेट्स महंगे हो सकते हैं।
आगे की राह: अब क्या करेगी सरकार और RBI? भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex) फिलहाल मजबूत है, लेकिन कच्चे तेल के $111 पार होने से ‘करंट अकाउंट डेफिसिट’ (व्यापार घाटा) बढ़ने का खतरा है। इस स्थिति से निपटने के लिए आरबीआई बाजार में खुद डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश कर सकता है। साथ ही, हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देशवासियों से की गई सोने की खरीद कम करने और ईंधन बचाने की अपील अब और भी प्रासंगिक हो गई है।