31 जुलाई की तारीख निकल चुकी है और अगर आपने अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल नहीं किया है, तो रुकिए! पेनल्टी के डर से पैनिक करने की जरूरत नहीं है. भारतीय आयकर कानून टैक्सपेयर्स को ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कई विकल्प देता है.

बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) भरें

डेडलाइन निकलने के बाद भरे जाने वाले रिटर्न को बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) कहा जाता है. धारा 139(4) के तहत आप इसे 31 दिसंबर तक फाइल कर सकते हैं. अगर आपकी कुल सालाना कमाई 5 लाख रुपये या उससे कम है, तो आपको केवल 1000 रुपये की लेट फीस देनी होगी. अगर आपकी सालाना कमाई 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो लेट फीस 5000 रुपये होगी. लेक‍िन अगर आपकी कमाई बेसिक टैक्स एग्जॉम्प्शन लिमिट से कम है, तो कोई लेट फीस नहीं लगेगी.

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पर इस बात पर ध्यान दें क‍ि लेट फीस के अलावा अगर आपका कोई टैक्स बकाया है, तो धारा 234A के तहत 1% प्रति माह की दर से ब्याज भी देना होगा.

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क्या 31 अगस्त वाली डेडलाइन आपके लिए है?
अगर आप नौकरीपेशा (Salaried) नहीं हैं और फ्रीलांसिंग, छोटा-मोटा बिजनेस करते हैं (जिनका ऑडिट होना जरूरी नहीं है), तो आपके लिए ITR भरने की आखरी तारीख 31 अगस्त है। ऐसे में अगर आप इस कैटेगरी में आते हैं, तो आप बिना किसी लेट फीस के 31 अगस्त तक अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

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क्या 31 द‍िसंबर की तारीख भी छूट जाए तो?
अगर आप 31 द‍िसंबर की डेडलाइन भी मिस कर देते हैं, तो भी दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं होता. इसके बाद आपके पास ITR-U (Updated Return) फाइल करने का विकल्प रहता है. इसे आप असेसमेंट ईयर खत्म होने के 24 महीने के भीतर भर सकते हैं, हालांकि इसमें अतिरिक्त टैक्स पेनल्टी (25% से 50% तक) देनी पड़ती है.

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लेट रिटर्न भरने के नुकसान
लेट रिटर्न भरने का सबसे बड़ा नुकसान ये है क‍ि बिजनेस या शेयर मार्केट (कैपिटल गेन्स) से हुए नुकसान को आप अगले सालों में सेट-ऑफ (एडजस्ट) करने के लिए आगे नहीं ले जा सकते. हालांकि, हाउस प्रॉपर्टी का नुकसान कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है. अगर आपका TDS कटा है और आप रिफंड क्लेम कर रहे हैं, तो बिलेटेड रिटर्न के कारण रिफंड मिलने में समय लग सकता है.

अब आपको तुरंत क्या करना चाहिए?
फॉर्म 26AS और AIS डाउनलोड करें:
इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर अपना Annual Information Statement (AIS) जांचें.
टैक्स कैलकुलेट करें: अगर कोई टैक्स देनदारी बनती है, तो उसे सेल्फ-असेसमेंट टैक्स के रूप में तुरंत जमा करें ताकि ब्याज कम से कम लगे.
बिलेटेड ITR फाइल करें: 31 दिसंबर का इंतजार न करें, जितनी जल्दी हो सके बिलेटेड रिटर्न फाइल कर दें.