रूस से फिर LNG खरीदने की तैयारी में भारत, 'ईरान संकट' के बीच ट्रंप सरकार से मांगी छूट!

यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति बाधित होने के बाद उठाया गया है. केपलर के अनुमान से, युद्ध शुरू होने के बाद फरवरी अंत से भारत ने रूस से 50-60 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीद चुका है.

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अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होने पर भारत ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नया कदम उठाया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से रूस से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) खरीदने के लिए छूट की मांग की है. सूत्रों का कहना है कि भारत और रूस ने यूक्रेन संघर्ष के बाद पहली बार LNG आपूर्ति फिर शुरू करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं.

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भारत और रूस के बीच हो रही डील पर चर्चा!


दो सूत्रों ने बताया कि अगर यह सौदा आगे बढ़ा, तो चर्चाएं कुछ ही हफ्तों में अंतिम रूप ले सकती हैं. हालांकि इस फैसले से पश्चिमी प्रतिबंधों का उल्लंघन हो सकता है. यह समझौता 19 मार्च को नई दिल्ली में रूसी उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन और भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच हुई बैठक में हुआ. एक सूत्र ने कहा कि घरेलू ऊर्जा आयातकों को रूसी एलएनजी खरीद फिर शुरू करने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है. भारत ने अमेरिका से भी प्रतिबंध छूट की संभावना तलाशी है.

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होर्मुज संकट के बाद सरकार उठाने वाली है कदम


यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति बाधित होने के बाद उठाया गया है. केपलर के अनुमान से, युद्ध शुरू होने के बाद फरवरी अंत से भारत ने रूस से 50-60 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीद चुका है. अमेरिका ने वैश्विक तेल मूल्यों को नियंत्रित रखने के लिए भारत को रूसी कच्चे तेल खरीद पर 30 दिनों की छूट दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायस्वाल ने पिछले सप्ताह कहा था कि भारत कई देशों से बातचीत कर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है. हालांकि, रसोई गैस के लिए इस्तेमाल होने वाला रूसी एलपीजी पहले से ही प्रतिबंधों से मुक्त है और भारत आयात जारी रखे हुए है.

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मध्य पूर्व संघर्ष के बाद दुनिया के सामने ‘ईंधन संकट’

मध्य पूर्व संघर्ष ने वैश्विक LNG बाजार को हिला दिया है. ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने और कतर की तरलीकरण इकाइयों पर हमलों से आपूर्ति चेन प्रभावित हुई है, जो वैश्विक एलएनजी व्यापार का 20 प्रतिशत संभालता है. प्रभावित सुविधाओं को बहाल होने में 3 से 5 वर्ष लग सकते हैं, जिससे सालाना 12.8 मिलियन टन क्षमता प्रभावित हो रही है. एसएंडपी ग्लोबल, आईसीआईएस, केपलर और राइस्टाड एनर्जी जैसे विश्लेषकों ने वैश्विक आपूर्ति अनुमान 35 मिलियन टन तक घटा दिए हैं. यह कमी 500 एलएनजी कार्गो के बराबर है, जो जापान की सालाना जरूरत का आधा या बांग्लादेश की पांच वर्ष की मांग पूरी कर सकती है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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