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Cognizant Layoff: क्या है प्रोजेक्ट लीप जिसकी वजह से जा रही है हजारों की नौकरी? अब कहां जाएंगे हटाए गए कर्मचारी? आसान भाषा में समझें पूरा मामला

cognizant layoffs news 2026: कॉग्निजेंट (Cognizant) से आ रही छंटनी की खबरों ने आईटी सेक्टर में खलबली मचा दी है। प्रोजेक्ट लीप (Project Leap) के तहत कंपनी जो बड़े बदलाव कर रही है। आइये जानते हैं क‍ि पूरा मामला क्‍या है और प्रोजेक्‍ट लीप क्‍या है, ज‍िकी वजह से इतनी बड़ी छंटनी का संकट आ गया है?

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Cognizant Layoff News: आईटी जगत की दिग्गज कंपनी कॉग्निजेंट एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई बड़ी डील नहीं बल्कि छंटनी (Layoff) है। कंपनी अपने एक खास मिशन पर काम कर रही है जिसे नाम दिया गया है – प्रोजेक्ट लीप। आइए, डिकोड करते हैं कि आखिर ये माजरा क्या है।

क्या है प्रोजेक्ट लीप (Project Leap)?

इसे आप कंपनी का ‘मेकओवर’ प्लान कह सकते हैं। कॉग्निजेंट अपने कामकाज के पुराने तरीकों को छोड़कर अब AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ऑटोमेशन की दुनिया में लंबी छलांग लगाना चाहती है। इसी छलांग (Leap) को सफल बनाने के लिए कंपनी अपने खर्चों में कटौती कर रही है और उन विभागों को बंद या छोटा कर रही है जिनकी अब उसे ज्यादा जरूरत नहीं है।

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कितने लोगों पर गिरेगी गाज?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉग्निजेंट अपने ग्लोबल वर्कफोर्स से हजारों कर्मचारियों को कम करने की योजना बना रही है। इसमें भारत भी अछूता नहीं है। कंपनी का लक्ष्य करीब 350 मिलियन डॉलर (लगभग 2900 करोड़ रुपये) बचाना है। यह छंटनी मुख्य रूप से नॉन-बिलिंग (वो कर्मचारी जो सीधे किसी क्लाइंट प्रोजेक्ट पर काम नहीं कर रहे) और मिड-लेवल मैनेजमेंट के पदों पर हो सकती है।

आखिर क्यों हो रही है छंटनी?
इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं:

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  1. AI का दबदबा: कंपनी अब इंसानों के बजाय मशीनों और AI से काम लेने पर ज्यादा फोकस कर रही है।
  2. मार्जिन सुधारना: कॉग्निजेंट का मुनाफा (Profit Margin) प्रतिद्वंद्वी कंपनियों (जैसे TCS या Infosys) के मुकाबले कम रहा है। खर्च घटाकर कंपनी अपना मुनाफा बढ़ाना चाहती है।
  3. धीमी ग्लोबल डिमांड: अमेरिका और यूरोप के बाजारों में आईटी सेवाओं की मांग फिलहाल सुस्त है, जिसका असर सीधे तौर पर हायरिंग और छंटनी पर पड़ रहा है।

हटाए गए कर्मचारी अब कहां जाएंगे?
कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वो हर किसी को सीधे घर नहीं भेज रही है। यहां दो रास्ते हैं। पहला रास्‍ता है री-स्किलिंग (Re-skilling) का। कंपनी कई कर्मचारियों को नई टेक्नोलॉजी (जैसे Generative AI) सिखाकर दूसरे प्रोजेक्ट्स में शिफ्ट करने की कोशिश करेगी।

दूसरा रास्‍ता है आउटप्लेसमेंट का। जो कर्मचारी कंपनी की नई रणनीति में फिट नहीं बैठेंगे, उन्हें सेवरेंस पैकेज (हर्जाना) देकर विदा किया जाएगा। बाजार के जानकारों का कहना है कि स्किल्ड लोगों के लिए स्टार्टअप्स और अन्य टेक फर्म्स में मौके बन सकते हैं, लेकिन मिड-लेवल मैनेजर्स के लिए चुनौती बड़ी होगी।

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क्या यह पूरी इंडस्ट्री का हाल है?
सिर्फ कॉग्निजेंट ही नहीं, बल्कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियां भी 2024-25 में इसी तरह की साफ-सफाई कर चुकी हैं। यह दौर अब ज्यादा लोगों का नहीं बल्कि ज्यादा स्किल्ड लोगों का है।

यानी प्रोजेक्ट लीप, कॉग्निजेंट के लिए भविष्य की तैयारी है, लेकिन कर्मचारियों के लिए यह एक कठिन इम्तिहान जैसा है। अगर आप आईटी सेक्टर में हैं, तो संदेश साफ है क‍ि अपनी स्किल्स को अपडेट करते रहिए, क्योंकि अब लीप यानी छलांग वही लगाएगा जो AI के साथ कदम ताल मिला पाएगा।

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First published on: May 07, 2026 12:58 PM

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