Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

बिजनेस

भारत के पास कितना तेल भंडार? ईरान-इजरायल युद्ध लंबा खिंचा तो क्या तब तक चल जाएगा काम

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए सवाल उठ रहा है कि क्या उसके पास पर्याप्त भंडारण है अगर यह संकट लंबा खिंचता है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि निकट भविष्य में तेल आपूर्ति में कोई बड़ा व्यवधान नहीं आएगा.

Author
Written By: Akarsh Shukla Updated: Mar 1, 2026 22:12

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है, खासकर जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर आई. शनिवार को इन हमलों के बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का पांचवां हिस्सा संभालता है. प्रमुख शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग से आवाजाही रोक दी है और रविवार को ओमान के पास एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला भी हुआ.

भारत बड़ा तेल आयातक देश


ऐसे में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए सवाल उठ रहा है कि क्या उसके पास पर्याप्त भंडारण है अगर यह संकट लंबा खिंचता है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि निकट भविष्य में तेल आपूर्ति में कोई बड़ा व्यवधान नहीं आएगा. फरवरी की शुरुआत में तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में बताया था कि भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार किसी वैश्विक उथल-पुथल में 74 दिनों तक मांग पूरी कर सकते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा सिर्फ भूमिगत गुफाओं में रखे तेल का नहीं, बल्कि रिफाइनरियों, बंदरगाहों पर फ्लोटिंग स्टॉक और उत्पादों को मिलाकर निकाला गया है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: ट्रैक्‍टर फोटो वाला 5 रुपये का नोट आपके पास भी है? कर सकते हैं लाखों की कमाई!

कितने दिन चलेगा भारत का भंडार?


पुरी ने कहा कि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में गुफाएं हैं, ओडिशा में जल्द शुरू होगी और आदर्श रूप से 90 दिनों का भंडार होना चाहिए, लेकिन 74 दिनों पर वे सुरक्षित महसूस करते हैं और भविष्य में इसे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है. रणनीतिक भंडार अकेले करीब 9.5 दिनों का कवर देते हैं, जबकि तेल विपणन कंपनियों के स्टॉक से अतिरिक्त 67 दिनों की सप्लाई मिलती है.

---विज्ञापन---

अगर युद्ध लंबा चला तो क्या?


हालांकि, अगर युद्ध लंबा चला तो चुनौतियां बढ़ सकती हैं. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा अर्थशास्त्री और पूर्व योजना आयोग सदस्य किरीट परेख ने कहा कि लंबे संघर्ष में भारत को रूस से कच्चे तेल के आयात बढ़ाने चाहिए ताकि बढ़ती कीमतों का दबाव कम हो. अंतरराष्ट्रीय बाजार में हर एक डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का तेल आयात बिल 1.4 अरब डॉलर बढ़ सकता है. गैस की कीमतें भी प्रभावित होंगी क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत गैस आयात करता है. परेख ने सुझाव दिया कि भारत अमेरिका से कह सकता है कि मध्य पूर्व का यह युद्ध अमेरिका ने शुरू किया, इसलिए ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से ज्यादा आयात अनिवार्य हो गया है.

यह भी पढ़ें: ‘एक ही बार में मारे गए 48 ईरानी नेता…’, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा

First published on: Mar 01, 2026 10:12 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.