एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखना सही या गलत? जानिए कैसे बिगाड़ सकता है आपका सिबिल स्कोर

कई क्रेडिट कार्ड रखना आम बात है, लेकिन अगर उनका गलत इस्तेमाल किया जाए तो यह आपके सिबिल स्कोर को गिरा सकता है. जानिए कितने कार्ड रखना सही है, किन गलतियों से बचना चाहिए और कैसे संभालें अपना क्रेडिट रिकॉर्ड.

Credit Card

क्रेडिट कार्ड यूजर है तो जरा संभल कर. (Photo-Freepik)

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कई लोगों के लिए महीने की शुरुआत सैलरी से होती है और महीने का अंत क्रेडिट कार्ड के बिलों से. अगर आपके पास भी एक नहीं, बल्कि दो-तीन कार्ड हैं और हर महीने उनके भुगतान में मुश्किल हो रही है, तो ये आदत आपकी जेब के साथ-साथ आपके सिबिल स्कोर को भी नुकसान पहुंचा सकती है. एक छोटी सी गलती आपकी लोन मंजूरी की राह रोक सकती है.

भारत में बढ़ रहा क्रेडिट कार्ड कल्चर

आज के दौर में क्रेडिट कार्ड सिर्फ खरीदारी का साधन नहीं, बल्कि स्टेटस और सुविधा का प्रतीक बन चुका है. ऑफर्स, कैशबैक और रिवॉर्ड पॉइंट्स के कारण बहुत से लोग अब एक से ज्यादा कार्ड रखने लगे हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में हर तीसरे कार्डधारक के पास दो या उससे ज्यादा कार्ड हैं. लेकिन इस सुविधा के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है. क्योंकि जितने ज्यादा कार्ड, उतना ज्यादा बिल और उतनी ज्यादा संभावना गलती की.

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कौन होता है बैंक की नजर में भरोसेमंद ग्राहक

अगर आपके पास दो कार्ड हैं, और हर एक की लिमिट 1 लाख रुपये है, तो आपकी कुल लिमिट 2 लाख रुपये हुई. अगर आप सिर्फ 50,000 रुपये का खर्च करते हैं, तो आपका क्रेडिट यूजेशन रेश्यो 25% रहेगा. बैंक ऐसे ग्राहकों को भरोसेमंद मानते हैं जो अपनी लिमिट का कम इस्तेमाल करते हैं. यानी, जितना कम उधार का इस्तेमाल, उतनी ज्यादा विश्वसनीयता. यही तरीका आपके क्रेडिट स्कोर को मजबूत बनाता है.

कई कार्ड्स का गलत इस्तेमाल कैसे बन सकता है मुसीबत

बहुत से लोग सोचते हैं कि ज्यादा कार्ड मतलब ज्यादा फायदे. लेकिन यह सोच कई बार उलटी पड़ जाती है. जब आप बार-बार नए कार्ड्स के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक आपकी फाइल पर हार्ड इनक्वायरी (Hard Inquiry) दर्ज करते हैं. इससे बैंक को लगता है कि आप लगातार उधार की तलाश में हैं, और यह बात आपके सिबिल स्कोर को नीचे गिरा देती है.

पेमेंट चूकने से सिबिल स्कोर पर असर

अगर आप एक भी कार्ड का भुगतान समय पर नहीं करते हैं, तो इसका असर आपके पूरे सिबिल स्कोर पर पड़ता है. क्रेडिट ब्यूरो ऐसे व्यवहार को “डिफॉल्ट” मानता है और उसे आपके रिकॉर्ड में जोड़ देता है. यह एक छोटी-सी गलती भविष्य में लोन लेने के मौके कम कर सकती है. इसी तरह, पुराने कार्ड बंद करने से भी सिबिल स्कोर पर नेगेटिव असर पड़ता है, क्योंकि इससे आपकी क्रेडिट हिस्ट्री (Credit History) छोटी हो जाती है.

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कितने कार्ड रखना है बेहतर?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपकी इनकम मीडियम लेवल की है, तो दो से तीन क्रेडिट कार्ड काफी हैं. बिजनेस करने वालों या ज्यादा ट्रैवल करने वालों के लिए चार कार्ड तक ठीक हैं बशर्ते हर कार्ड का बिल समय पर भरा जाए. ज्यादा कार्ड रखने से “प्लास्टिक प्रेशर” बढ़ता है, यानी बिल और ट्रैकिंग का झंझट भी बढ़ता है.

एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखना बुरा नहीं है, लेकिन उनका इस्तेमाल समझदारी से करना जरूरी है. ये कार्ड आपके लिए फाइनेंशियल इंडेपेन्डेंस का जरिया बन सकते हैं- अगर आप लिमिट का ध्यान रखें, बिल समय से चुकाएं और जरूरत से ज्यादा खर्च से बचें.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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