LPG Crisis : पेट्रोलियम मंत्रालय ने 26 मार्च 2026 को देश की ऊर्जा स्थिति पर एक विस्तृत डेटा जारी किया है। मंत्रालय के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत को अब पहले से कहीं अधिक कच्चा तेल मिल रहा है। भारत ने अपनी रणनीति बदलते हुए अब 41 से अधिक देशों से तेल खरीदना शुरू कर दिया है, जिससे खाड़ी देशों पर निर्भरता कम हुई है।
तेल का 60 दिनों का बैकअप
मंत्रालय ने उन रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि भारत के पास केवल 6 दिनों का स्टॉक बचा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत के पास कुल 74 दिनों की रिजर्व क्षमता है। वर्तमान में वास्तविक स्टॉक कवर 60 दिनों का है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और रणनीतिक गुफाओं (Strategic Caverns) में जमा तेल शामिल है। देश की सभी रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं।
LPG पर भारत का तगड़ा प्रहार
घरेलू रसोई गैस की मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने दोतरफा रणनीति अपनाई है। एक तरफ सरकार ने घरेलू उत्पादन में वृद्धि की है। LPG कंट्रोल ऑर्डर के बाद घरेलू रिफाइनरियों ने उत्पादन 40% बढ़ा दिया है। अब रोजाना 50,000 मीट्रिक टन गैस का उत्पादन भारत में ही हो रहा है। वहीं दूसरी ओर भारत की जरूरतों के लिए 800,000 मीट्रिक टन (8 लाख MT) LPG के कार्गो अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं। ये कार्गो भारत के 22 आयात टर्मिनलों पर पहुंचेंगे।
पैनिक बुकिंग में आई कमी
मंत्रालय ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में अफवाहों के कारण सिलेंडरों की डिमांड 50 लाख से बढ़कर 89 लाख तक पहुंच गई थी, जो अब वापस सामान्य होकर 50 लाख पर आ गई है। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए कमर्शियल सिलेंडर के आवंटन को बढ़ाकर 50% कर दिया गया है।










