Happy Birthday PM Modi: विजन से लेकर अमल करने तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में लिए गए कुछ बड़े फैसलों ने भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई है.
वो 5 फैसले कौन से थे, जिन्होंने भारतीय बाजार को बदल दिया
जीएसटी (GST – Goods and Services Tax)
1 जुलाई 2017 को देश भर में एक राष्ट्र, एक कर (One Nation, One Tax) की अवधारणा के तहत जीएसटी लागू किया गया. राज्य स्तरीय विभिन्न करों (VAT, चुंगी आदि) को समाप्त कर सप्लाई चेन को सरल बनाया गया. लॉजिस्टिक्स लागत कम हुई और असंगठित बाजार (Informal Sector) का एक बड़ा हिस्सा औपचारिक अर्थव्यवस्था (Formal Economy) से जुड़ा.
डिजिटल इंडिया और यूपीआई (UPI Revolution)
कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) की नींव मजबूत की गई. छोटे रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े शोरूम तक डिजिटल भुगतान सुलभ हुआ. इससे फिनटेक (Fintech) सेक्टर में क्रांति आई और ई-कॉमर्स व रिटेल बाजार में लेनदेन तेज और पारदर्शी हो गया.
जन धन – आधार – मोबाइल (JAM त्रिशूल)
देश के हर नागरिक को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री जन धन योजना शुरू की गई और इसे आधार व मोबाइल से जोड़ा गया. सरकारी सब्सिडी सीधे बैंक खातों (DBT) में पहुंचने लगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तरलता (Liquidity) व क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ी.
मेक इन इंडिया और PLI योजना
भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए मेक इन इंडिया और विनिर्माण कंपनियों को प्रोत्साहन देने के लिए PLI योजनाएं शुरू की गईं. इलेक्ट्रॉनिक्स खासकर मोबाइल असेंबलिंग, ऑटोमोबाइल और डिफेंस सेक्टर में भारी विदेशी निवेश (FDI) आया. भारत कई उत्पादों का आयातक बनने के बजाय निर्यातक बनने की ओर अग्रसर हुआ.
आईबीसी (Insolvency and Bankruptcy Code – IBC)
डूबते कर्ज (NPA) और बीमार कंपनियों की समस्या से निपटने के लिए 2016 में दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता लागू की गई. बैंकों का पैसा फंसा रहने के बजाय परिसंपत्तियों का समयबद्ध निपटान संभव हुआ. इससे बैंकिंग सेक्टर का एनपीए कम हुआ और कॉर्पोरेट क्रेडिट कल्चर में सुधार आया.