नई कार खरीदते ही भूलकर भी न करें ये काम, नहीं तो कंपनी तुरंत खत्म कर सकती है वॉरंटी

नई कार खरीदते ही उसे स्टाइलिश बनाने के लिए मॉडिफिकेशन कराना कई लोगों की पहले पसंद होता है, लेकिन कुछ बदलाव ऐसे होते हैं जिनकी वजह से कंपनी आपकी कार की वॉरंटी रद्द कर सकती है. जानिए कौन-से मॉडिफिकेशन सबसे ज्यादा जोखिम भरे हैं और वॉरंटी सुरक्षित रखने के आसान तरीके.

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नई कार लेते ही भूलकर भी न कराएं ये 5 मॉडिफिकेशन.

नई कार खरीदना हर किसी के लिए खुशी की बात होती है, लेकिन कार घर आते हीं लोग उस अपनी पंसद के हिसाब से मॉडिफाई करवाने लगते हैं. कोई इसमें नई लाइट्स लगवाता है, कोई म्यूजिक सिस्टम बदलवाता है तो कोई दूसरी एक्सेसरीज जोड़ देता है, लेकिन कई बार ये बदलाव बाद में भारी पड़ जाते हैं. अगर मॉडिफिकेशन कंपनी के नियमों के खिलाफ हुआ, तो कार की वॉरंटी खत्म हो सकती है.ऐसे में किसी बड़ी खराबी पर आपको अपनी जेब से पूरा खर्च उठाना पड़ सकता है. इसलिए नई कार में कोई भी बदलाव कराने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना बेहद जरूरी है.

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कौन-से बदलाव वॉरंटी पर डाल सकते हैं असर?

कार कंपनियां सिर्फ उन्हों पार्ट्स और सिस्टम की जिम्मेदारी लेती हैं, जिनका इस्तेमाल उनके तय नियमों के मुताबिक किया गया हो. अगर कार में ऐसे बदलाव किए जाते हैं जो कंपनी की मंजूरी के बिना हों, तो वॉरंटी पर असर पड़ सकता है.

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लोकल गैरेज में वायरिंग से छेड़छाड़ पड़ सकती है भारी

कई लोग पैसे बचाने के लिए लोकल गैरेज में जाकर नई वायरिंग करवा लेते हैं या इलेक्ट्रिकल सिस्टम में बदलाव करा देते है. अगर इस दौरान कार की ओरिजिनल वायरिंग काटी या बदली जाती है, तो कंपनी इसे अनऑथराइज्ड मॉडिफिकेशन मान सकती है. बाद में इलेक्ट्रिकल सिस्टम में खराबी आने पर वॉरंटी क्लेम खारिज किया जा सकता है.

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आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज भी बन सकती हैं परेशानी

तेज आवाज वाले हॉर्न, एक्स्ट्रा LED लाइट्स, लोकल म्यूजिक सिस्टम या दूसरी इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज लगवाना कई लोगों को पसंद होता है, लेकिन अगर ये एक्सेसरीज कंपनी की मंजूरी के बिना लगाई गई हैं और इनसे कार के सिस्टम पर असर पड़ता है, तो कंपनी वॉरंटी देने से माना कर सकती है.

लोकल CNG किट लगवाने से भी हो सकता है नुकसान

कुछ लोग कम खर्च के लिए बाहर से सीएनजी किट लगवा लेते हैं. अगर ये किट कंपनी को मंजरू नहीं है या इसकी फिटिंग सही से नहीं की गई है, तो कार के कई सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं, ऐसी कंडिशन में भी कंपनी वॉरंटी क्लेम से इनकार कर सकती है.

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समय पर सर्विस नहीं कराना भी पड़ सकता है महंगा

नई कार की तय समय पर सर्विस कराना जरूरी है. अगर सर्विस शेड्यूल का पालन नहीं किया जाता या कंपनी की सलाह के मुताबिक इंजन ऑयल और दूसरे फ्लूइड्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता, तो भी वॉरंटी पर असर पड़ सकता हैं. वॉरंटी क्लेम के दौरान सर्विस रिकॉर्ड की जांच भी की जाती है.

वॉरंटी सुरक्षित रखने के आसान तरीके

अगर आप चाहते हैं कि कार की वॉरंटी लंबे समय तक बनी रहे, तो हमेंश सर्टिफाइड सर्विस सेंटर से ही सर्विस और रिपेयर करवाएं. कंपनी की मंजूर एक्सेसरीज और ओरिजिनल पार्ट्स का इस्तेमाल करें. बिना गाइडलाइन पढ़ें कोई मॉडिफिकेशन कराने से बचें.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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