नई कार खरीदना हर किसी के लिए खुशी की बात होती है, लेकिन कार घर आते हीं लोग उस अपनी पंसद के हिसाब से मॉडिफाई करवाने लगते हैं. कोई इसमें नई लाइट्स लगवाता है, कोई म्यूजिक सिस्टम बदलवाता है तो कोई दूसरी एक्सेसरीज जोड़ देता है, लेकिन कई बार ये बदलाव बाद में भारी पड़ जाते हैं. अगर मॉडिफिकेशन कंपनी के नियमों के खिलाफ हुआ, तो कार की वॉरंटी खत्म हो सकती है.ऐसे में किसी बड़ी खराबी पर आपको अपनी जेब से पूरा खर्च उठाना पड़ सकता है. इसलिए नई कार में कोई भी बदलाव कराने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना बेहद जरूरी है.
कौन-से बदलाव वॉरंटी पर डाल सकते हैं असर?
कार कंपनियां सिर्फ उन्हों पार्ट्स और सिस्टम की जिम्मेदारी लेती हैं, जिनका इस्तेमाल उनके तय नियमों के मुताबिक किया गया हो. अगर कार में ऐसे बदलाव किए जाते हैं जो कंपनी की मंजूरी के बिना हों, तो वॉरंटी पर असर पड़ सकता है.
लोकल गैरेज में वायरिंग से छेड़छाड़ पड़ सकती है भारी
कई लोग पैसे बचाने के लिए लोकल गैरेज में जाकर नई वायरिंग करवा लेते हैं या इलेक्ट्रिकल सिस्टम में बदलाव करा देते है. अगर इस दौरान कार की ओरिजिनल वायरिंग काटी या बदली जाती है, तो कंपनी इसे अनऑथराइज्ड मॉडिफिकेशन मान सकती है. बाद में इलेक्ट्रिकल सिस्टम में खराबी आने पर वॉरंटी क्लेम खारिज किया जा सकता है.
ये भी पढ़ें-बारिश में कार के शीशों पर जम जाती है धुंध? 30 सेकंड की ये ट्रिक कर देगी बिल्कुल साफ
आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज भी बन सकती हैं परेशानी
तेज आवाज वाले हॉर्न, एक्स्ट्रा LED लाइट्स, लोकल म्यूजिक सिस्टम या दूसरी इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज लगवाना कई लोगों को पसंद होता है, लेकिन अगर ये एक्सेसरीज कंपनी की मंजूरी के बिना लगाई गई हैं और इनसे कार के सिस्टम पर असर पड़ता है, तो कंपनी वॉरंटी देने से माना कर सकती है.
लोकल CNG किट लगवाने से भी हो सकता है नुकसान
कुछ लोग कम खर्च के लिए बाहर से सीएनजी किट लगवा लेते हैं. अगर ये किट कंपनी को मंजरू नहीं है या इसकी फिटिंग सही से नहीं की गई है, तो कार के कई सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं, ऐसी कंडिशन में भी कंपनी वॉरंटी क्लेम से इनकार कर सकती है.
समय पर सर्विस नहीं कराना भी पड़ सकता है महंगा
नई कार की तय समय पर सर्विस कराना जरूरी है. अगर सर्विस शेड्यूल का पालन नहीं किया जाता या कंपनी की सलाह के मुताबिक इंजन ऑयल और दूसरे फ्लूइड्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता, तो भी वॉरंटी पर असर पड़ सकता हैं. वॉरंटी क्लेम के दौरान सर्विस रिकॉर्ड की जांच भी की जाती है.
वॉरंटी सुरक्षित रखने के आसान तरीके
अगर आप चाहते हैं कि कार की वॉरंटी लंबे समय तक बनी रहे, तो हमेंश सर्टिफाइड सर्विस सेंटर से ही सर्विस और रिपेयर करवाएं. कंपनी की मंजूर एक्सेसरीज और ओरिजिनल पार्ट्स का इस्तेमाल करें. बिना गाइडलाइन पढ़ें कोई मॉडिफिकेशन कराने से बचें.
ये भी पढ़ें- 7 Seater Cars In India: भारत की सबसे सस्ती 7-सीटर कारें, कीमत सिर्फ 5.76 लाख से शुरू, देखें लिस्ट
नई कार खरीदना हर किसी के लिए खुशी की बात होती है, लेकिन कार घर आते हीं लोग उस अपनी पंसद के हिसाब से मॉडिफाई करवाने लगते हैं. कोई इसमें नई लाइट्स लगवाता है, कोई म्यूजिक सिस्टम बदलवाता है तो कोई दूसरी एक्सेसरीज जोड़ देता है, लेकिन कई बार ये बदलाव बाद में भारी पड़ जाते हैं. अगर मॉडिफिकेशन कंपनी के नियमों के खिलाफ हुआ, तो कार की वॉरंटी खत्म हो सकती है.ऐसे में किसी बड़ी खराबी पर आपको अपनी जेब से पूरा खर्च उठाना पड़ सकता है. इसलिए नई कार में कोई भी बदलाव कराने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना बेहद जरूरी है.
कौन-से बदलाव वॉरंटी पर डाल सकते हैं असर?
कार कंपनियां सिर्फ उन्हों पार्ट्स और सिस्टम की जिम्मेदारी लेती हैं, जिनका इस्तेमाल उनके तय नियमों के मुताबिक किया गया हो. अगर कार में ऐसे बदलाव किए जाते हैं जो कंपनी की मंजूरी के बिना हों, तो वॉरंटी पर असर पड़ सकता है.
लोकल गैरेज में वायरिंग से छेड़छाड़ पड़ सकती है भारी
कई लोग पैसे बचाने के लिए लोकल गैरेज में जाकर नई वायरिंग करवा लेते हैं या इलेक्ट्रिकल सिस्टम में बदलाव करा देते है. अगर इस दौरान कार की ओरिजिनल वायरिंग काटी या बदली जाती है, तो कंपनी इसे अनऑथराइज्ड मॉडिफिकेशन मान सकती है. बाद में इलेक्ट्रिकल सिस्टम में खराबी आने पर वॉरंटी क्लेम खारिज किया जा सकता है.
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आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज भी बन सकती हैं परेशानी
तेज आवाज वाले हॉर्न, एक्स्ट्रा LED लाइट्स, लोकल म्यूजिक सिस्टम या दूसरी इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज लगवाना कई लोगों को पसंद होता है, लेकिन अगर ये एक्सेसरीज कंपनी की मंजूरी के बिना लगाई गई हैं और इनसे कार के सिस्टम पर असर पड़ता है, तो कंपनी वॉरंटी देने से माना कर सकती है.
लोकल CNG किट लगवाने से भी हो सकता है नुकसान
कुछ लोग कम खर्च के लिए बाहर से सीएनजी किट लगवा लेते हैं. अगर ये किट कंपनी को मंजरू नहीं है या इसकी फिटिंग सही से नहीं की गई है, तो कार के कई सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं, ऐसी कंडिशन में भी कंपनी वॉरंटी क्लेम से इनकार कर सकती है.
समय पर सर्विस नहीं कराना भी पड़ सकता है महंगा
नई कार की तय समय पर सर्विस कराना जरूरी है. अगर सर्विस शेड्यूल का पालन नहीं किया जाता या कंपनी की सलाह के मुताबिक इंजन ऑयल और दूसरे फ्लूइड्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता, तो भी वॉरंटी पर असर पड़ सकता हैं. वॉरंटी क्लेम के दौरान सर्विस रिकॉर्ड की जांच भी की जाती है.
वॉरंटी सुरक्षित रखने के आसान तरीके
अगर आप चाहते हैं कि कार की वॉरंटी लंबे समय तक बनी रहे, तो हमेंश सर्टिफाइड सर्विस सेंटर से ही सर्विस और रिपेयर करवाएं. कंपनी की मंजूर एक्सेसरीज और ओरिजिनल पार्ट्स का इस्तेमाल करें. बिना गाइडलाइन पढ़ें कोई मॉडिफिकेशन कराने से बचें.
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