ट्यूबलेस टायर क्यों हैं लोगों की पहली पसंद? कितनी होती है इनकी लाइफ, फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

आज ज्यादातर कार और बाइक में ट्यूबलेस टायर का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इनमें ट्यूब नहीं होती फिर भी हवा बाहर क्यों नहीं निकलती? आइए जानते हैं ट्यूबलेस टायर कैसे काम करते हैं, इनके क्या फायदे हैं और इन्हें कितने समय बाद बदलना चाहिए.

tubeless tyre

गाड़ियों में क्यों लगाए जाते हैं ट्यूबलेस टायर? जानिए कैसे काम करते हैं और क्या हैं बड़े फायदे. (AI Generated Image)

Tubeless Tyre vs Tube Tyre: अगर आपने हाल के वर्षों में कार या बाइक के टायरों पर ध्यान दिया हो, तो एक बात साफ दिखाई देती है कि अब ज्यादातर गाड़ियों में ट्यूबलेस टायर ही लगाए जा रहे हैं. कभी ऐसा समय था जब लगभग हर वाहन में ट्यूब वाले टायर होते थे, लेकिन तकनीक के विकास के साथ ट्यूबलेस टायर ने उनकी जगह ले ली है. इसकी वजह भी साफ है ये टायर ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं, लंबे समय तक चलते हैं और इनकी देखभाल भी अपेक्षाकृत आसान होती है. यही कारण है कि आज ऑटोमोबाइल कंपनियां नई गाड़ियों में इन्हें ही प्राथमिकता दे रही हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ट्यूबलेस टायर क्या होते हैं, ये कैसे काम करते हैं और इनके क्या फायदे हैं.

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ट्यूबलेस टायर क्या होते हैं?

ट्यूबलेस टायर ऐसे टायर होते हैं जिनके अंदर अलग से कोई ट्यूब नहीं होती. इसमें हवा सीधे टायर के अंदर भरी जाती है. टायर के अंदर एक खास तरह की एयरटाइट परत बनाई जाती है, जो हवा को बाहर निकलने से रोकती है. इसके अलावा टायर और व्हील रिम के बीच इतना मजबूत सील बन जाता है कि हवा लंबे समय तक अंदर ही बनी रहती है. यही वजह है कि ट्यूबलेस टायर बिना ट्यूब के भी पूरी तरह सुरक्षित तरीके से काम करते हैं.

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ट्यूबलेस टायर कैसे काम करते हैं?

ट्यूबलेस टायर में हवा सीधे टायर और रिम के बीच बने एयरटाइट हिस्से में भरी जाती है. जब इसमें हवा भरी जाती है तो टायर थोड़ा फैल जाता है और रिम के किनारों से मजबूती से चिपक जाता है. इससे टायर और रिम के बीच एक मजबूत सील बन जाती है, जो हवा को बाहर निकलने नहीं देती. इसी वजह से ट्यूबलेस टायर में हवा लंबे समय तक बनी रहती है और टायर सामान्य तरीके से काम करता रहता है.

ट्यूबलेस टायर के फायदे

ट्यूबलेस टायर का सबसे बड़ा फायदा सुरक्षा से जुड़ा होता है. अगर इसमें पंचर हो भी जाए तो हवा अचानक बाहर नहीं निकलती, बल्कि धीरे-धीरे कम होती है. इससे गाड़ी पर कंट्रोल बनाए रखने में मदद मिलती है और दुर्घटना का खतरा कम हो जाता है. इसके अलावा ये टायर वजन में हल्के होते हैं और चलते समय ज्यादा गर्म भी नहीं होते, जिससे वाहन की परफॉर्मेंस बेहतर रहती है. छोटे-मोटे पंचर को भी आसानी से ठीक किया जा सकता है, क्योंकि इसके लिए कई बार टायर को रिम से निकालने की जरूरत नहीं पड़ती.

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ट्यूबलेस टायर की औसत लाइफ

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल भी आता है कि ट्यूबलेस टायर कितने समय तक चल सकते हैं और इन्हें कब बदलना चाहिए. सामान्य तौर पर कारों के ट्यूबलेस टायर करीब 40,000 से 60,000 किलोमीटर तक चल सकते हैं. वहीं बाइक के टायर आमतौर पर 20,000 से 30,000 किलोमीटर के बाद बदलने की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि टायर की असली उम्र इस बात पर भी निर्भर करती है कि वाहन कैसे चलाया जाता है, सड़क की हालत कैसी है और टायर की देखभाल कितनी अच्छी तरह की जाती है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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