अब बिना पेट्रोल के चलेगी गाड़ियां! E100 की हुई एंट्री, क्या ले पाएगा पेट्रोल की जगह? जानें फायदे और नुकसान

क्या अब पेट्रोल का दौर खत्म होने वाला है? सरकार ने E100 फ्यूल को मंजूरी देकर बड़ा दांव खेल दिया है. जानिए क्या है यह नया ईंधन, कौन-सी गाड़ियां इस पर चलेंगी और इससे आम लोगों व किसानों को क्या फायदा मिलने वाला है.

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अब 100% इथेनॉल से दौड़ेंगी गाड़ियां! नितिन गडकरी ने कर दिया बड़ा ऐलान. (AI Generated Image)

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E100 Fuel Approved: भारत में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर फ्यूल सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने E100 फ्यूल को मंजूरी दे दी है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि अब फ्लेक्स फ्यूल तकनीक से लैस वाहनों में 100 प्रतिशत इथेनॉल यानी E100 ईंधन का इस्तेमाल किया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी.

E100 फ्यूल को मिली आधिकारिक मंजूरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि E100 फ्यूल से जुड़ी फाइल को मंजूरी दे दी गई है. इसके साथ ही देश में शुद्ध इथेनॉल आधारित ईंधन के इस्तेमाल का रास्ता साफ हो गया है. भारत पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर चुका है और अब सरकार अगला बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है.

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क्या होता है E100 फ्यूल?

E100 एक ऐसा ईंधन है जिसमें 100 प्रतिशत इथेनॉल होता है और इसमें पेट्रोल की कोई मिलावट नहीं होती. इथेनॉल एक नवीकरणीय ईंधन है, जिसे गन्ने, मक्के, खराब हो चुके अनाज और कृषि अवशेषों से तैयार किया जाता है. फिलहाल देश में E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल वाला फ्यूल इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि E100 पूरी तरह इथेनॉल आधारित ईंधन है.

सरकार E100 पर इतना जोर क्यों दे रही है?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. इससे हर साल भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है. सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की वजह से अब तक देश को कच्चे तेल के आयात में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है. इसके अलावा किसानों को करीब 80 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय भी मिली है. सरकार का मानना है कि E100 के व्यापक इस्तेमाल से यह फायदा और बढ़ सकता है.

क्या E100 पूरी तरह पेट्रोल की जगह ले लेगा?

भविष्य में E100 पेट्रोल का विकल्प बन सकता है, लेकिन इसमें अभी समय लगेगा. मौजूदा पेट्रोल कारों और बाइक्स में सीधे E100 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इथेनॉल का रासायनिक व्यवहार पेट्रोल से अलग होता है और यह सामान्य फ्यूल सिस्टम के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है. यही वजह है कि E100 के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए फ्लेक्स फ्यूल इंजन की जरूरत होती है.

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किन गाड़ियों में इस्तेमाल होगा E100?

ऑटोमोबाइल कंपनियां E100 और फ्लेक्स फ्यूल तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं. मारुति सुजुकी अपनी लोकप्रिय कार वैगनआर का फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप पेश कर चुकी है, जो E100 पर चल सकती है. इसके अलावा टोयोटा, एमजी और हुंडई भी इस तकनीक पर काम कर रही हैं. दोपहिया वाहनों की बात करें तो हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर और एचएफ डीलक्स के फ्लेक्स फ्यूल वर्जन भी पेश किए हैं.

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E100 के बड़े फायदे

E100 फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और देश का बड़ा विदेशी मुद्रा खर्च बचेगा. इसके साथ ही गन्ने और मक्के जैसी फसलों की मांग बढ़ने से किसानों की आमदनी में भी इजाफा होगा. पर्यावरण के लिहाज से भी यह बेहतर माना जाता है क्योंकि इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में ज्यादा स्वच्छ तरीके से जलता है और प्रदूषण कम फैलाता है.

E100 के सामने कौन सी चुनौतियां हैं?

हालांकि E100 के कई फायदे हैं, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं. इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा होती है, इसलिए माइलेज में कुछ कमी देखने को मिल सकती है. इसके अलावा देशभर के पेट्रोल पंपों पर E100 की सप्लाई के लिए अलग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा, जिसमें समय और निवेश दोनों लगेंगे. सबसे बड़ी बात यह है कि मौजूदा पेट्रोल वाहनों में इसका इस्तेमाल संभव नहीं होगा, इसलिए ग्राहकों को फ्लेक्स फ्यूल वाहन खरीदने होंगे.

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भारत के फ्यूल सेक्टर में बड़ा बदलाव

E20 के बाद अब E100 को मंजूरी मिलना भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. सरकार का लक्ष्य आयातित तेल पर निर्भरता कम करना, किसानों को लाभ पहुंचाना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है. आने वाले वर्षों में फ्लेक्स फ्यूल वाहनों और E100 इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ देश में ईंधन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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