हिंदी न्यूज़/ज्योतिष/Shani Nakshatra Gochar: 146 दिनों तक रेवती नक्षत्र में रहेंगे कर्मफल स्वामी, इन 3 राशियों पर शनि की कड़ी दृष्टि बढ़ाएगी मुश्किलें
ज्योतिष
Shani Nakshatra Gochar: 146 दिनों तक रेवती नक्षत्र में रहेंगे कर्मफल स्वामी, इन 3 राशियों पर शनि की कड़ी दृष्टि बढ़ाएगी मुश्किलें
Shani Nakshatra Gochar: 17 मई 2026 से शनि रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर लगभग 146 दिनों तक इसी स्थिति में रहेंगे. इस दौरान शनि की धीमी लेकिन गहरी दृष्टि कुछ राशियों के लिए चुनौतियां बढ़ा सकती है. करें करें, कहीं क्या आपकी राशि भी इन 3 राशियों में शामिल तो नहीं है?
Shani Nakshatra Gochar: ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह की चाल का विशेष महत्व है, क्योंकि वे शनैश्चराय अर्थात धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं. शनि जब राशि बदलते हैं तो उसका असर तुरंत दिखाई देता ही है, लेकिन नक्षत्र परिवर्तन भी उतना ही प्रभावशाली और दूरगामी माना है. शनि ग्रह अभी उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं. 17 मई 2026 को शनि रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 9 अक्टूबर 2026 तक, यानी लगभग 146 दिनों तक, वहीं रहेंगे. रेवती 27 नक्षत्रों में अंतिम नक्षत्र है और यह मीन राशि में स्थित है.
ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य के अनुसार, शनि जब रेवती नक्षत्र में आते हैं, तो उनका प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन गहराई से जीवन पर पड़ता है. रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध हैं, इसलिए इस दौरान सोचने-समझने का तरीका, योजनाएं बनाने की क्षमता और बातचीत से जुड़े मामलों में बदलाव आ सकता है. ऐसे समय में किसी भी निर्णय को सोच-समझकर लेना जरूरी होगा. आइए जानते हैं, इस शनि गोचर के दौरान किन तीन राशियों पर इसका सबसे ज्यादा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है?
मेष राशि
इस अवधि में मेष राशि के जातकों को मानसिक दबाव महसूस हो सकता है. काम में देरी और बार-बार रुकावटें परेशान कर सकती हैं. मेहनत के बाद भी अपेक्षित परिणाम देर से मिलेंगे. खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है. धन बचाने में कठिनाई आएगी. करीबी लोगों से विचारों का टकराव संभव है. गलतफहमी के कारण रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है. कार्यस्थल पर आलोचना झेलनी पड़ सकती है. सेहत को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है. नींद की कमी और थकान बढ़ेगी. इस समय धैर्य और संयम ही सबसे बड़ा सहारा होगा. किसी भी नए काम की शुरुआत सोच-समझकर करें, जोखिम लेने से पहले पूरी जानकारी जुटाएं. अनावश्यक बहस से दूर रहना और नियमित दिनचर्या अपनाना आपके लिए लाभकारी रहेगा.
कुंभ राशि वालों के लिए यह गोचर करियर और पारिवारिक जीवन में दबाव ला सकता है. अनचाही जिम्मेदारियां बढ़ेंगी और सहयोग कम मिलेगा. मन में असुरक्षा की भावना आ सकती है. नौकरी में बदलाव का विचार आएगा, लेकिन जल्दबाजी नुकसान दे सकती है. वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद संभव है. परिवार में किसी बात को लेकर तनाव बढ़ सकता है. संपत्ति या वाहन से जुड़े मामलों में अड़चन आ सकती है. पुराने काम अधूरे रह सकते हैं. आर्थिक योजना गड़बड़ा सकती है. इस दौरान सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी होगा. किसी भी कानूनी या दस्तावेजी कार्य में विशेष सावधानी बरतें. घर के बुजुर्गों की सलाह मानना इस समय आपके लिए सहायक सिद्ध होगा.
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए यह समय भावनात्मक परीक्षा का हो सकता है. प्रेम संबंधों में दूरी या गलतफहमी बढ़ सकती है. संतान से जुड़ी चिंता सताएगी. निवेश करते समय सावधानी जरूरी है, वरना नुकसान हो सकता है. कार्यक्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज होगी. विरोधी सक्रिय रह सकते हैं. आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है. मन बार-बार नकारात्मक विचारों में उलझ सकता है. सेहत में पेट या नसों से जुड़ी परेशानी उभर सकती है. धैर्य, अनुशासन और सकारात्मक सोच से ही हालात संभाले जा सकेंगे. किसी पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचें और अपने योजनाओं को गोपनीय रखें. ध्यान और योग को दिनचर्या में शामिल करने से मानसिक संतुलन बेहतर बना रहेगा.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Shani Nakshatra Gochar: ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह की चाल का विशेष महत्व है, क्योंकि वे शनैश्चराय अर्थात धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं. शनि जब राशि बदलते हैं तो उसका असर तुरंत दिखाई देता ही है, लेकिन नक्षत्र परिवर्तन भी उतना ही प्रभावशाली और दूरगामी माना है. शनि ग्रह अभी उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं. 17 मई 2026 को शनि रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 9 अक्टूबर 2026 तक, यानी लगभग 146 दिनों तक, वहीं रहेंगे. रेवती 27 नक्षत्रों में अंतिम नक्षत्र है और यह मीन राशि में स्थित है.
ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य के अनुसार, शनि जब रेवती नक्षत्र में आते हैं, तो उनका प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन गहराई से जीवन पर पड़ता है. रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध हैं, इसलिए इस दौरान सोचने-समझने का तरीका, योजनाएं बनाने की क्षमता और बातचीत से जुड़े मामलों में बदलाव आ सकता है. ऐसे समय में किसी भी निर्णय को सोच-समझकर लेना जरूरी होगा. आइए जानते हैं, इस शनि गोचर के दौरान किन तीन राशियों पर इसका सबसे ज्यादा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है?
---विज्ञापन---
मेष राशि
इस अवधि में मेष राशि के जातकों को मानसिक दबाव महसूस हो सकता है. काम में देरी और बार-बार रुकावटें परेशान कर सकती हैं. मेहनत के बाद भी अपेक्षित परिणाम देर से मिलेंगे. खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है. धन बचाने में कठिनाई आएगी. करीबी लोगों से विचारों का टकराव संभव है. गलतफहमी के कारण रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है. कार्यस्थल पर आलोचना झेलनी पड़ सकती है. सेहत को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है. नींद की कमी और थकान बढ़ेगी. इस समय धैर्य और संयम ही सबसे बड़ा सहारा होगा. किसी भी नए काम की शुरुआत सोच-समझकर करें, जोखिम लेने से पहले पूरी जानकारी जुटाएं. अनावश्यक बहस से दूर रहना और नियमित दिनचर्या अपनाना आपके लिए लाभकारी रहेगा.
कुंभ राशि वालों के लिए यह गोचर करियर और पारिवारिक जीवन में दबाव ला सकता है. अनचाही जिम्मेदारियां बढ़ेंगी और सहयोग कम मिलेगा. मन में असुरक्षा की भावना आ सकती है. नौकरी में बदलाव का विचार आएगा, लेकिन जल्दबाजी नुकसान दे सकती है. वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद संभव है. परिवार में किसी बात को लेकर तनाव बढ़ सकता है. संपत्ति या वाहन से जुड़े मामलों में अड़चन आ सकती है. पुराने काम अधूरे रह सकते हैं. आर्थिक योजना गड़बड़ा सकती है. इस दौरान सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी होगा. किसी भी कानूनी या दस्तावेजी कार्य में विशेष सावधानी बरतें. घर के बुजुर्गों की सलाह मानना इस समय आपके लिए सहायक सिद्ध होगा.
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए यह समय भावनात्मक परीक्षा का हो सकता है. प्रेम संबंधों में दूरी या गलतफहमी बढ़ सकती है. संतान से जुड़ी चिंता सताएगी. निवेश करते समय सावधानी जरूरी है, वरना नुकसान हो सकता है. कार्यक्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज होगी. विरोधी सक्रिय रह सकते हैं. आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है. मन बार-बार नकारात्मक विचारों में उलझ सकता है. सेहत में पेट या नसों से जुड़ी परेशानी उभर सकती है. धैर्य, अनुशासन और सकारात्मक सोच से ही हालात संभाले जा सकेंगे. किसी पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचें और अपने योजनाओं को गोपनीय रखें. ध्यान और योग को दिनचर्या में शामिल करने से मानसिक संतुलन बेहतर बना रहेगा.