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Kundali Reading: ये हैं कुंडली के 10 सबसे ‘खतरनाक दोष’, जो करियर, विवाह और धन पर डालते हैं बुरा असर

Kundali Reading: ज्योतिष के अनुसार कुंडली में ग्रहों की खराब स्थिति से बनने वाले दोष जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं. क्या आपकी कुंडली में भी ऐसे दोष हैं? ये करियर, रिश्तों और मानसिक शांति पर असर डाल सकते हैं, आइए जानें ये 10 खतरनाक दोष कौन-से हैं?

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Written By: Shyamnandan Updated: Apr 9, 2026 19:43
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Kundali Reading: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के जीवन की दिशा तय करती है. जब शुभ ग्रह कमजोर हो जाते हैं या क्रूर और पापी ग्रहों का प्रभाव बढ़ता है, तब कई तरह के दोष बनते हैं. ये दोष धीरे-धीरे जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करते हैं. करियर रुकता है, रिश्तों में तनाव आता है और मानसिक शांति भी कम हो जाती है. आइए जानते हैं, कुंडली के 10 सबसे खतरनाक दोष कौन-से हैं?

कालसर्प दोष: संघर्ष और देरी

जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब यह दोष बनता है. जीवन में बार-बार रुकावट और मेहनत के बाद भी देर से सफलता मिलती है. इस दोष में अचानक उतार-चढ़ाव और स्थिरता की कमी भी अक्सर देखने को मिलती है.

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मंगल दोष: रिश्तों में तनाव

मंगल के विशेष भावों में होने से यह दोष बनता है. विवाह में देरी, पति-पत्नी के बीच विवाद और अलगाव की स्थिति बन सकती है. कई मामलों में यह आक्रामक स्वभाव और अहं टकराव को भी बढ़ा देता है.

पितृ दोष: पूर्वजों का प्रभाव

राहु या केतु का सूर्य से संबंध इस दोष को बनाता है. इससे संतान सुख, करियर और पारिवारिक शांति प्रभावित होती है. यह दोष अक्सर बिना स्पष्ट कारण के बार-बार बाधाएं और नुकसान कराता है.

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गुरु चांडाल दोष: गलत फैसले

जब गुरु के साथ राहु या केतु हों, तब यह दोष बनता है. इससे सोचने की क्षमता कमजोर होती है और गलत निर्णय लिए जाते हैं. व्यक्ति कई बार सही और गलत का अंतर समझने में भी भ्रमित रहता है.

ग्रहण दोष: मानसिक तनाव

सूर्य या चंद्रमा के साथ राहु या केतु होने पर यह दोष बनता है. इससे डर, चिंता और मानसिक अस्थिरता बढ़ती है. यह दोष व्यक्ति के आत्मविश्वास को भी कमजोर कर देता है.

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केमद्रुम योग: अकेलापन और खालीपन

जब चंद्रमा के आसपास कोई ग्रह नहीं होता, तब यह योग बनता है. व्यक्ति अकेलापन और असंतोष महसूस करता है. इस योग में आर्थिक अस्थिरता और सामाजिक दूरी भी देखने को मिल सकती है.

विष योग: निराशा और अवसाद

शनि और चंद्रमा की युति से यह योग बनता है. व्यक्ति अक्सर उदास रहता है और जीवन में उत्साह कम हो जाता है. यह योग लंबे समय तक मानसिक दबाव और नकारात्मक सोच को बढ़ाता है.

अंगारक योग: क्रोध और जोखिम

मंगल और राहु के मेल से यह योग बनता है. इससे गुस्सा बढ़ता है और दुर्घटनाओं की संभावना भी रहती है. यह योग अचानक विवाद और कानूनी परेशानियां भी खड़ी कर सकता है.

शापित दोष: जीवन में अस्थिरता

शनि और राहु या केतु की युति से यह दोष बनता है. इसे पिछले कर्मों से जुड़ा माना जाता है और यह अचानक समस्याएं लाता है. इस दोष में मेहनत के बावजूद परिणाम देर से या अधूरे मिलते हैं.

केंद्राधिपति दोष: शुभ ग्रहों का कमजोर असर

जब गुरु, बुध या शुक्र केंद्र में होकर भी अपेक्षित फल नहीं देते, तब यह दोष बनता है. इससे करियर और धन संबंधी परेशानी हो सकती है. व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार फल नहीं मिल पाता और प्रगति रुक जाती है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 09, 2026 07:43 PM

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