Sunil Sharma
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Shaligram Puja Niyam: अयोध्या में बन रहे राम मंदिर का उद्घाटन अगले वर्ष होना है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति स्थापित की जाएगी। इसके लिए नेपाल से विशेष रूप से चुन कर शालिग्राम शिलाएं भारत लाई गई हैं। बताया जा रहा है कि ये शिलाएं लगभग 6 करोड़ वर्ष पुरानी हैं। इन शिलाओं में वे सभी गुण हैं जो भगवान की प्रतिमा बनाने के लिए आवश्यक बताए गए हैं।
ज्योतिषी एम. एस. लालपुरिया के अनुसार शालिग्राम को पुराणों में भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना गया है। यही कारण है कि भगवान विष्णु तथा उनके अवतारों की प्रतिमा निर्मित करने के लिए शालिग्राम पत्थर को ही प्रमुखता दी जाती है। बहुत कम लोग जानते हैं कि घरों में भी शालिग्राम पत्थर रखने का अत्यधिक महत्व बताया गया है। जानिए इस बारे में
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यह वास्तव में नदी में पाए जाने विशेष पत्थर हैं। नदी की धारा के साथ बहते-बहते ये गोल, चिकने और चमकीले बन जाते हैं। यह हर साइज में मिलते हैं। पुराणों के अनुसार शालिग्राम मुख्यतया नेपाल की गंडकी नदी में ही पाए जाते हैं। इनका रंग काला या धूम्र वर्ण होता है। पवित्र होने के काऱण इन्हें घर के पूजा स्थल में रखा जाता है। इनकी भी विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है।
शालिग्राम पत्थऱ को आप अपने नजदीकी किसी भी पूजा-पाठ की दुकान पर जाकर ला सकते हैं। इसकी पूजा-अर्चना भी पूर्णतया भगवान विष्णु के विग्रह समान ही की जाती है। अतः इसे घर में लाने के लिए भी कुछ नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालना करना आवश्यक है। जानिए इन नियमों के बारे में
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
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