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ज्योतिष

Kundali Matching: ‘हैप्पी मैरिड लाइफ’ के लिए 36 में से कितने गुण मिलना है जरूरी, जानें ज्योतिष रहस्य

Kundali Matching: विवाह को हिंदू परंपरा में जीवनभर का आध्यात्मिक बंधन माना गया है. ग्रह और नक्षत्र व्यक्ति के स्वभाव व जीवन पर प्रभाव डालते हैं, जिससे गुण मिलान जरूरी माना जाता है. आइए जानते हैं, विवाह के लिए गुण मिलान में कितने गुण मिलने चाहिए?

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Written By: Shyamnandan Updated: Apr 14, 2026 23:23
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Kundali Matching: हिंदू परंपरा में विवाह को केवल सामाजिक रिश्ता नहीं, बल्कि जीवनभर का आध्यात्मिक बंधन माना गया है. यही वजह है कि शादी से पहले कुंडली मिलान की परंपरा आज भी कायम है. ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों और नक्षत्रों का प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव, सोच और भविष्य पर पड़ता है. ऐसे में गुण मिलान दो लोगों के बीच तालमेल समझने का एक अहम तरीका माना जाता है. आइए जानते हैं,’हैप्पी मैरिड लाइफ’ के लिए 36 में से कितने गुण मिलना जरूरी है?

क्या है 36 गुणों का रहस्य?

ज्योतिष शास्त्र में अष्टकूट मिलान के जरिए गुणों की गणना की जाती है. इसमें कुल 8 पहलू शामिल होते हैं, जैसे वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी. इन सभी को मिलाकर अधिकतम 36 अंक बनते हैं. यह प्रक्रिया केवल अंक नहीं बताती, बल्कि यह भी संकेत देती है कि रिश्ते में समझ, सम्मान और स्थिरता कितनी रहेगी.

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कितने गुण मिलना है अनिवार्य?

ज्योतिष मान्यता के अनुसार, विवाह के लिए कम से कम 18 गुणों का मिलना जरूरी माना गया है. अगर गुण इससे कम होते हैं, तो ऐसे रिश्ते में मतभेद और अस्थिरता की आशंका बढ़ जाती है. कई परिवार इस स्थिति में शादी से बचने की सलाह देते हैं या फिर विस्तृत परामर्श लेते हैं.

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क्या है आदर्श संख्या?

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक,18 से 24 गुण मिलने पर विवाह को सामान्य लेकिन ठीक माना जाता है. 24 से 32 गुण मिलना अच्छे तालमेल का संकेत देता है. वहीं 32 से अधिक गुणों का मिलना बहुत शुभ माना जाता है. ऐसे जोड़े अक्सर एक-दूसरे को बेहतर समझते हैं और जीवन के फैसलों में संतुलन बनाए रखते हैं.

इनका भी रखें ध्यान

गुण मिलान के साथ कुंडली के अन्य पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जाता. मांगलिक दोष की जांच जरूरी होती है. इसके अलावा सातवां भाव, जो विवाह से जुड़ा होता है, उसकी स्थिति भी देखी जाती है. यदि यहां राहु या शनि जैसे ग्रह हों, तो जीवन में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं. इसलिए विशेषज्ञ से पूरी कुंडली की जांच कराना बेहतर माना जाता है.

नाड़ी दोष का रखें विशेष ख्याल

अष्टकूट मिलान में नाड़ी को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है, जिसके 8 अंक होते हैं. अगर दोनों की नाड़ी समान हो, तो नाड़ी दोष बनता है. मान्यता है कि इससे संतान और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. हालांकि ज्योतिष में इसके उपाय भी बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर इस दोष को कम किया जा सकता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 14, 2026 11:23 PM

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