Bahuchara Mata Mandir: कहां है मुर्गे वाली माता का मंदिर, मिलती है किन्नर जन्म से मुक्ति, मानते हैं कुलदेवी

Bahuchara Mata Mandir: देश का प्रसिद्ध बहुचरा माता मंदिर किन्नर समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां मुर्गे वाली माता की पूजा होती है और किन्नर जन्म से मुक्ति की मान्यता जुड़ी है. आइए जानते हैं, कहां है मुर्गे वाली माता का मंदिर और क्यों है प्रसिद्ध?

Bahuchara-Mata-Mandir

Bahuchara Mata Mandir: भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी अलग परंपराओं और मान्यताओं के लिए पहचाने जाते हैं. बहुचरा माता मंदिर भी इन्हीं में से एक है. यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि किन्नर समाज के लिए विशेष महत्व रखता है. इसे मुर्गे वाली माता का मंदिर भी कहते हैं. जानिए, कहां है यह मंदिर, क्या है यहां की परंपराएं, कथाएं और मान्यताएं, जो इसे बेहद खास बनाती हैं?

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कहां स्थित है बहुचरा मंदिर?

बहुचरा माता मंदिर गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित है. यह स्थान स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. मंदिर का वातावरण शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ माना जाता है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

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क्यों कहलाती हैं मुर्गे वाली माता?

इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां बड़ी संख्या में मुर्गे खुले घूमते नजर आते हैं. मान्यता है कि माता बहुचरा मुर्गे की सवारी करती हैं. इसी कारण उन्हें मुर्गे वाली माता भी कहा जाता है. श्रद्धालु यहां मुर्गों का दान करते हैं, जो एक विशेष परंपरा का हिस्सा है.

किन्नर समाज की गहरी आस्था

बहुचरा माता को किन्नर समाज अपनी कुलदेवी मानता है. देश के अलग-अलग हिस्सों से किन्नर यहां आकर पूजा करते हैं. माता को अर्धनारीश्वर रूप में पूजने की परंपरा भी यहां देखने को मिलती है. मान्यता है कि माता का आशीर्वाद जीवन के दुख दूर करता है और नई दिशा देता है.

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संतान प्राप्ति से जुड़ी मान्यता

इस मंदिर से जुड़ी एक प्रमुख मान्यता संतान प्राप्ति की है. कहा जाता है कि जो दंपति सच्चे मन से यहां प्रार्थना करते हैं, उनकी इच्छा पूरी होती है. संतान प्राप्ति के बाद बच्चे के बाल मंदिर में अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जाती है. साथ ही मुर्गों का दान करना शुभ माना जाता है.

ऐतिहासिक कथा और चमत्कार

मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित कथा अलाउद्दीन खिलजी के समय की बताई जाती है. कहा जाता है कि जब उसने मंदिर को लूटने की कोशिश की, तो उसके सैनिकों ने यहां के मुर्गों को खा लिया. इसके बाद वे गहरी नींद में चले गए और उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. यह घटना मंदिर की दिव्यता और चमत्कार से जोड़ी जाती है.

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किन्नर परंपरा की पौराणिक कहानी

एक अन्य कथा के अनुसार, एक राजा ने संतान प्राप्ति के लिए माता की पूजा की. उन्हें पुत्र हुआ, लेकिन वह नपुंसक था. बाद में माता के निर्देश पर उसने त्याग और साधना का मार्ग अपनाया. इसी घटना के बाद से किन्नर समाज ने बहुचरा माता को अपनी कुलदेवी मान लिया.

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मिलती है किन्नर जन्म से मुक्ति

मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार जो श्रद्धालु सच्चे मन से बहुचरा माता की पूजा करता है, उसे अगले जन्म में किन्नर रूप में जन्म नहीं लेना पड़ता. किन्नर समाज भी इसी विश्वास के साथ यहां आकर विशेष पूजा करता है और माता से जीवन में सम्मान व मुक्ति का आशीर्वाद मांगता है.

मंदिर की विशेष परंपराएं

मंदिर में पूजा के दौरान विशेष रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है. यहां भक्त नारियल, फूल और मुर्गों का दान करते हैं. नवरात्र के समय यहां भव्य आयोजन होते हैं. इस दौरान मंदिर में अलग ही उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है.

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यात्रा और दर्शन का अनुभव

मंदिर तक पहुंचना आसान है और यहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं. श्रद्धालु सुबह से शाम तक दर्शन कर सकते हैं. मंदिर परिसर में अनुशासन और साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाता है. यहां आने वाले भक्त न सिर्फ पूजा करते हैं, बल्कि इस अनोखी परंपरा को करीब से महसूस भी करते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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