Kaalchakra: रत्न धारण करने से मिलते हैं शुभ परिणाम, जानिए इन्हें धारण करने के नियम
Kaalchakra Today: आज 25 अप्रैल के कालचक्र में रत्न शास्त्र के अनुसार रत्नों को धारण करने के फायदों के बारे में जानते हैं. इसके साथ ही जानते हैं कि, रत्नों को किस तरह से धारण करना शुभ और फलदायी होता है. चलिए इसके बारे में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय से विस्तार से जानते हैं.
Kaalchakra Today 29 April 2026: आज 29 अप्रैल 2026, दिन बुधवार को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है. आज के कालचक्र में रत्नों के महत्व और इन्हें धारण करने से मिलने वाले लाभ के बारे में जान सकते हैं. रत्न शास्त्र के अनुसार, रत्न को कब और कैसे धारण करना चाहिए इसके बारे में आप कालचक्र वीडियो में विस्तार से जान सकते हैं. रत्न शास्त्र में रत्नों के और इन्हें धारण करने के नियमों के बारे में जानने के लिए आज 29 अप्रैल 2026 के कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय से जान सकते हैं.
रत्नों को अंगूठी के रूप में उंगली में धारण किया जाता है. तर्जनी उंगली में हमेशा पुखराज रत्न धारण करना चाहिए. इसके अलावा मध्यमा उंगली में नीलम, गोमेद और लहसुनिया रत्न धारण कर सकते हैं. अनामिका उंगली में माणिक्य, मूंगा और हीरा धारण करना चाहिए. कनिष्ठिका में पन्ना और मोती धारण कर सकते हैं. शास्त्रों के अनुसार, रत्न धारण करने से पहले किसी विशेषज्ञ को कुंडली दिखा देनी चाहिए.
रत्नों को अंगूठी में जड़वाकर उंगली में धारण करने से इसका प्रभाव 90 से 95 प्रतिशत तक मिलता है. जबकि, गले में रत्न को लॉकेट के रूप में धारण करने से इसका प्रभाव कम होता है. गले में हमेशा भगवान के लॉकेट और रुद्राक्ष धारण करना अधिक शुभ माना जाता है. व्यक्ति को तीन रत्न से ज्यादा धारण नहीं करने चाहिए. कुंडली का विशलेषण करने के बाद ही रत्न धारण करने चाहिए. रत्न के लिए धातु का चयन भी विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Kaalchakra Today 29 April 2026: आज 29 अप्रैल 2026, दिन बुधवार को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है. आज के कालचक्र में रत्नों के महत्व और इन्हें धारण करने से मिलने वाले लाभ के बारे में जान सकते हैं. रत्न शास्त्र के अनुसार, रत्न को कब और कैसे धारण करना चाहिए इसके बारे में आप कालचक्र वीडियो में विस्तार से जान सकते हैं. रत्न शास्त्र में रत्नों के और इन्हें धारण करने के नियमों के बारे में जानने के लिए आज 29 अप्रैल 2026 के कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय से जान सकते हैं.
रत्नों को अंगूठी के रूप में उंगली में धारण किया जाता है. तर्जनी उंगली में हमेशा पुखराज रत्न धारण करना चाहिए. इसके अलावा मध्यमा उंगली में नीलम, गोमेद और लहसुनिया रत्न धारण कर सकते हैं. अनामिका उंगली में माणिक्य, मूंगा और हीरा धारण करना चाहिए. कनिष्ठिका में पन्ना और मोती धारण कर सकते हैं. शास्त्रों के अनुसार, रत्न धारण करने से पहले किसी विशेषज्ञ को कुंडली दिखा देनी चाहिए.
रत्नों को अंगूठी में जड़वाकर उंगली में धारण करने से इसका प्रभाव 90 से 95 प्रतिशत तक मिलता है. जबकि, गले में रत्न को लॉकेट के रूप में धारण करने से इसका प्रभाव कम होता है. गले में हमेशा भगवान के लॉकेट और रुद्राक्ष धारण करना अधिक शुभ माना जाता है. व्यक्ति को तीन रत्न से ज्यादा धारण नहीं करने चाहिए. कुंडली का विशलेषण करने के बाद ही रत्न धारण करने चाहिए. रत्न के लिए धातु का चयन भी विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें.