Copper Water Benefits: तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना क्यों माना जाता है शुभ, किस तत्व और ग्रह से है संबंध, जानें

Copper Water Benefits: तांबे के पात्र यानी बर्तन में पानी रखना एक बेहद प्राचीन परंपरा है. हिन्दू धर्म में यह आयुर्वेद और ज्योतिष दोनों से संबंधित है. वैदिक ज्योतिष में तांबे का संबंध विशेष ग्रह और तत्व से है. आइए जानते हैं, तांबे के पानी पीने से जुड़े ज्योतिषीय लाभ क्या क्या हैं?

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तांबे के बर्तन में पानी रखना हिन्दू संस्कृति की प्राचीन परंपरा है. (Photo Credit: theaarngroup.com)

Copper Water Benefits: तांबे के लौटे, गिलास या जग में पानी पीना कोई नया नुस्खा या विज्ञान नहीं है. यह हजारों साल पहले हमारे ऋषि-मुनियों ने बताया था कि यह न केवल आयुर्वेदिक बल्कि ज्योतिषीय रूप से एक कारगर और अचूक उपाय है. आपको बता दें कि प्राचीन काल में इसे एक अनुष्ठान माना जाता था. इसके आज विज्ञान भी नतमस्तक है. आइए जानते हैं, संसार में सबसे पहले खोजे गए इस धातु का संबंध किस ग्रह और तत्व से है और इसके क्या-क्या लाभ हैं?

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सूर्य-मंगल की कृपा

वैदिक ज्योतिष में ताम्र यानी तांबे का सीधा संबंध सूर्य देव और मंगल ग्रह से है. तांबा को सूर्य का मुख्य धातु माना गया है. यही कारण है, तांबा के पात्र से जल अर्घ्य देने पर सूर्य की कृपा प्राप्त होती है और आत्मविश्वास, तेज, नेतृत्व क्षमता बढ़ती है.

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वहीं, तांबे का लाल रंग या तांबई रंग मंगल ग्रह का प्रतिनिधि है. इस धातु के उपयोग से मंगल दोष दूर होता है और शरीर में ऊर्जा, साहस और रक्त-संचार सुचारु बना रहता है.

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अग्नि का जल तत्व से मिलना

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तांबा का संबंध मुख्य रूप से अग्नि तत्व हैं. सूर्य और मंगल दोनों ही अग्नि तत्व वाले ग्रह हैं. लेकिन तांबे के पानी का संबंध चंद्रमा से हैं. इस प्रकार तांबे के पात्र में रखा जल अग्नि और जल दोनों तत्वों का संवहन करता है. यही कारण है कि इन तत्वों के तालमेल से मानसिक शांति और शारीरिक ऊर्जा दोनों प्राप्त होती है.

अन्य ज्योतिषीय लाभ

ज्योतिष शास्त्र की शाखा चिकित्सा ज्योतिष की पुस्तकों यह स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि ताम्र जल यानी तांबे के पात्र का पानी पीने से शरीर में ‘त्रिदोष’ यानी कफ, पित्त और वात का संतुलन बना रहता है, जिससे व्यक्ति निरोग रहता है. इससे विचारों की नकारात्मकता दूर होती है, सकरात्मकता आती है. मानसिक तनाव दूर होता है और एकाग्रता बढ़ती है.

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इन नियमों का करें पालन

ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य बताते हैं. तांबे के जल का पूरा लाभ तभी मिलता है जब वह पात्र में कम से कम 8 घंटे रहे. तभी पानी में तांबे एक अंश मिल पाते हैं. साथ ही इसे खाली पेट पीना सर्वोत्तम है. दूसरी बात यह कि तांबे के बर्तन को कभी जमीन पर नहीं रखना चाहिए. इसे हमेशा तिपाई (स्टूल), टेबल या लकड़ी के एक पाटे पर रखें. साथ ही यह भी ध्यान रखें कि भूल से भी तांबे के पात्र में कोई खट्टी चीज न रहे, वरना यह जहर के समान हो सकता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष और धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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