Kaalchakra: किस नक्षत्र में हुई बीमारी जल्दी नहीं होती है ठीक, पं. सुरेश पाण्डे से जानें रोग की अवधि और उपाय

Kaalchakra Today: ज्योतिष के 27 नक्षत्रों से तय होता है कि कौन सी बीमारी कितने दिन चलेगी. कालचक्र प्रोग्राम में पंडित सुरेश पांडेय मृत्युतुल्य कष्ट देने वाले नक्षत्रों के नाम बता रहे हैं. साथ ही जानिए जल्दी ठीक होने के अचूक उपाय और घर में दवा रखने की सही दिशा.

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नक्षत्रों से जानें बीमारी की अवधि और कष्ट का समय. (Photo Credit: AI/News24)

Kaalchakra Today: ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र हैं, जिनकी मान्यता ग्रहों और राशियों की तरह है. कई बार देखा गया है ये नक्षत्र भविष्यवाणी में राशियों से भी अधिक सटीक सिद्ध होते होते है. ज्योतिष मान्यता है कि व्यक्ति जिस नक्षत्र में बीमार पड़ता है, उसे से तय होता है कि बीमारी कितने दिन रहेगी. आज कालचक्र कार्यक्रम में पंडित सुरेश पांडेय बता रहे हैं कि किस नक्षत्र में बीमार पड़ने से बीमारी के अवधि लंबी खींचती है, उसका कष्ट मृत्युतुल्य होता है. साथ ही पंडित जी जानिए, जल्दी ठीक होने के उपाय क्या है और घर में दवा कहां नहीं रखनी चाहिए?

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कौन-से नक्षत्र बीमारी खींचते हैं लंबा?

पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, 27 नक्षत्रों में से भरणी नक्षत्र में में बीमारी होने पर वह 11 से 30 दिनों तक रहती है. यह कुंडली में अशुभ दशा रही हो, तो यह खतरनाक भी हो सकती है. मघा नक्षत्र बीमारी 20 से 45 दिन तक परेशान करती है. बीमारी की अवधि मूल नक्षत्र में 9 से 20 दिन, आर्द्रा में 10 दिन से एक महीना, पुष्य में 9 से 30 दिन और अश्लेषा में में यह अवधि 9 से 30 तक की हो सकती है. वहीं, लोग विशाखा नक्षत्र में यह 8 से 30 दिन, ज्येष्ठा में 25 से 30 दिन और उत्तराषाढ़ा में 20 से 15 दिन तक बीमार रह सकते हैं. ये सब वो नक्षत्र हैं, जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक बीमार रह सकता है.

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नक्षत्र अनुसार करें ये उपाय

पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, हर नक्षत्र के बीमारी से जल्दी ठीक होने के उपाय अलग-अलग हैं:

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  • भरणी नक्षत्र के लिए शिवलिंग पर शहद का लेप करना चाहिए और ॐ नमः शिवाय का जाप करना लाभकारी है.
  • मघा नक्षत्र के लिए कुष्ठ रोगियों की सेवा और पितरों का श्राद्ध करना चाहिए.
  • मूल नक्षत्र के लिए महामृत्युंजय मंत्र जाप और गणेश की पूजा करनी चाहिए.
  • आर्द्रा में सोमवार का व्रत रख पीपल की जड़ धारण करनी चाहिए.
  • विशाखा के लिए गुंजा की जड़ बाजू में बांधनी चाहिए.
  • ज्येष्ठ के लिए विष्णु सहरसनाम पढ़ना चाहिए.
  • उत्तराषाढ़ा के लिए भूखे व्यक्ति को भोजन कराएं.

इन सबके अलावा पंडित जी बताते हैं कि सबसे बड़ा उपाय है कि रोज गायत्री मंत्र से हवन करें. इससे कोई भी बीमारी जल्दी ठीक हो जाती है.

घर में दवा कहां न रखें?

पंडित जी के अनुसार, दवा रखने की कुछ दिशाएं अशुभ हैं. दक्षिण-पूर्व में दवा रखने से उसका असर शीघ्र नहीं होता है. दक्षिण दिशा में दवा रखने से लंबे समय तक दवा खाने की आदत लग सकती है. उत्तर-पश्चिम दिशा में दवा रखने से दवा की आदी बना सकती है. पश्चिम दिशा भी दवा रखने के लिए उत्तम नहीं है. दवा रखने की सबसे असरकारी दिशा उत्तर-पूर्व, पूर्व और उत्तर है. इसके अलावा, दवा को कभी सिरहाने और बेडरूम में न रखें. किचन, डाइनिंग टेबल, पूजा स्थान और बाथरूम में कभी दवा न रखें.

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देखें वीडियो

कालचक्र के इस कार्यक्रम को आप नीचे दिए वीडियो में देख सकते हैं:

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष और धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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