इन दो देवताओं की पूजा से प्रसन्न हो जाते हैं 33 करोड़ देवता, मिलता है मनचाहा आशीर्वाद
Edited By Sunil Sharma

Image Credit: flickr.com/Arian Zwegers
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Astrolgoy: प्राचीन काल से ही हिंदू धर्मावलंबियों में कुलदेवता और कुलदेवी की पूजा की जाती रही है। कुलदेवता तथा कुलदेवी वे देव होते हैं जिन्हें परिवार कई पीढ़ियों ने पूज रहा है। कुछ जगहों पर इन्हें इष्ट देवता या परिवार के देवता भी कहा जाता है। माना जाता है कि इनकी पूजा करने से घर-परिवार में सब कुछ सही रहता है। साथ ही उस घर में कभी दुर्भाग्य भी नहीं आता है।
आचार्य अनुपम जौली बताते हैं कि सनातम धर्म में प्रत्येक परिवार का एक कुलदेवता और एक कुलदेवी होती है। कुलदेवता परब्रह्म का अंश माना जाता है जबकि कुलदेवी मां भगवती आद्यशक्ति का ही स्वरूप होती है। परिवार में कई पीढ़ियों से इनकी पूजा हो रही होती है, तथा ये घर के संरक्षक देव माने जाते हैं। इनकी कृपा से व्यक्ति जो भी चाहें, आसानी से प्राप्त कर सकता है।
बहुत से स्थानों पर तो यह भी कहा जाता है कि यदि आपकी सुख, समृद्धि या सिद्धियां चाहिए तो किसी भी अन्य देवता की आराधना से पूर्व कुलदेवता या कुलदेवी को प्रसन्न कर लेना चाहिए। इससे तुरंत सिद्धी प्राप्त होती है। आमतौर पर बहुत से घरों में हनुमानजी, भैरव, गणेश जी या अन्य स्थानीय देवताओं को कुलदेवता माना जाता है। इसी प्रकार कुलदेवी के रूप में मां काली के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है।
शास्त्रों में इन्हें घर और परिवार का संरक्षक देवता कहा जाता है। यदि ये प्रसन्न रहेंगे तो परिवार भी सुखी रहेगा और घर में शांति रहेगी। परन्तु इन्हें नाराज कर दिया जाए तो सब कुछ अच्छा होते हुए भी व्यक्ति को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती है। इनकी पूजा से निम्न लाभ होते हैं।
– आचार्य अनुपम जौली
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
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