अब आधा रह जाएगा दिल्ली से नेपाल का सफर! 40000 करोड़ में 742 किमी लंबा एक्सप्रेसवे बना रहा है NHAI
Shamli Gorakhpur Expressway: दिल्ली-एनसीआर से नेपाल बॉर्डर तक ₹40,000 करोड़ की लागत से 742 किलोमीटर लंबा शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे बनेगा. इसके शुरू होने से यात्रा का समय घटकर मात्र 8 घंटे रह जाएगा.
Shamli Gorakhpur Expressway: वर्तमान समय में दिल्ली-एनसीआर से सड़क मार्ग द्वारा नेपाल जाना एक बेहद थकाऊ और लंबा सफर माना जाता है जो लोगों की पूरी एनर्जी को खत्म कर देता है. लेकिन बहुत जल्द एक नई और महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना इस पूरे परिदृश्य को बदलने जा रही है. आगामी 'शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे' के बन जाने से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से नेपाल सीमा तक पहुंचने का समय घटकर महज 8 घंटे रह जाएगा. यह नया हाई-स्पीड कॉरिडोर यात्रा के मौजूदा समय को करीब आधा कर देगा जिससे लोगों के लिए एक क्विक इंटरनेशनल रोड ट्रिप पर जाना बेहद आसान हो जाएगा. यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे संकरी गलियों और स्थानीय शहरों के भारी जाम से बचाकर सीधा और सुगम रास्ता देगा.
शामली से शुरू होकर कुशीनगर तक जाएगा रूट
यह नया हाईवे उत्तर प्रदेश के व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाकों को बाईपास करते हुए बनाया जा रहा है. दिल्ली या पानीपत की तरफ से आने वाले वाहन चालक शामली से इस एक्सप्रेसवे पर आसानी से चढ़ सकेंगे. वहां से यह सीधे कुशीनगर और नेपाल सीमा के मुख्य चेकपॉइंट्स तक एक स्मूथ कनेक्टिविटी प्रदान करेगा. लगभग 742 किलोमीटर लंबे इस पूरे हाईवे के निर्माण पर केंद्र सरकार करीब 40,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करने जा रही है. नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई इस प्रोजेक्ट पर बहुत तेजी से काम कर रहा है और बिजनौर व पीलीभीत समेत सौ से ज्यादा गांवों में जमीन अधिग्रहण के लिए प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी गई है.
इस महापरियोजना के निर्माण कार्य को रफ्तार देने के लिए एनएचएआई ने पूरे रूट को दो समर्पित टीमों में बांट दिया है. एक टीम पश्चिमी हिस्से के 348 किलोमीटर के काम को देख रही है, जबकि दूसरी टीम पूर्वी हिस्से की जिम्मेदारी संभाल रही है. शुरुआत में यह एक्सप्रेसवे चार लेन का बनाया जाएगा, जिसे भविष्य में जरूरत के अनुसार छह या आठ लेन तक आसानी से चौड़ा किया जा सकेगा. प्राधिकरण ने इस पूरे प्रोजेक्ट को साल 2030 तक पूरा करके आम जनता के लिए खोलने का एक स्पष्ट लक्ष्य रखा है. यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड के हरिद्वार को जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश के करीब 18 अलग-अलग जिलों से होकर गुजरेगी, जिसमें मुजफ्फरनगर, बरेली और गोरखपुर जैसे बड़े शहर शामिल हैं.
व्यापार और पर्यटन को मिलेगा जबरदस्त बूस्ट
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सफर के कुछ घंटे ही कम नहीं करेगा बल्कि उत्तर भारत के कई छोटे और कटे हुए कस्बों को एक मुख्य आर्थिक नेटवर्क से जोड़ देगा. इससे स्थानीय व्यवसायों, पर्यटन और रोजगार को एक बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा. भारत और नेपाल के बीच होने वाला व्यापार अब काफी सस्ता और तेज हो जाएगा क्योंकि मालवाहक ट्रकों को स्थानीय ट्रैफिक जाम में कई दिनों तक फंसना नहीं पड़ेगा. भविष्य में इस रूट को गोरखपुर से सीधे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक बढ़ाने की भी एक बड़ी योजना है जो पूरे उत्तर और पूर्वी भारत को एक अखंड हाई-स्पीड कॉरिडोर से जोड़ देगी.
Shamli Gorakhpur Expressway: वर्तमान समय में दिल्ली-एनसीआर से सड़क मार्ग द्वारा नेपाल जाना एक बेहद थकाऊ और लंबा सफर माना जाता है जो लोगों की पूरी एनर्जी को खत्म कर देता है. लेकिन बहुत जल्द एक नई और महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना इस पूरे परिदृश्य को बदलने जा रही है. आगामी ‘शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे’ के बन जाने से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से नेपाल सीमा तक पहुंचने का समय घटकर महज 8 घंटे रह जाएगा. यह नया हाई-स्पीड कॉरिडोर यात्रा के मौजूदा समय को करीब आधा कर देगा जिससे लोगों के लिए एक क्विक इंटरनेशनल रोड ट्रिप पर जाना बेहद आसान हो जाएगा. यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे संकरी गलियों और स्थानीय शहरों के भारी जाम से बचाकर सीधा और सुगम रास्ता देगा.
शामली से शुरू होकर कुशीनगर तक जाएगा रूट
यह नया हाईवे उत्तर प्रदेश के व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाकों को बाईपास करते हुए बनाया जा रहा है. दिल्ली या पानीपत की तरफ से आने वाले वाहन चालक शामली से इस एक्सप्रेसवे पर आसानी से चढ़ सकेंगे. वहां से यह सीधे कुशीनगर और नेपाल सीमा के मुख्य चेकपॉइंट्स तक एक स्मूथ कनेक्टिविटी प्रदान करेगा. लगभग 742 किलोमीटर लंबे इस पूरे हाईवे के निर्माण पर केंद्र सरकार करीब 40,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करने जा रही है. नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई इस प्रोजेक्ट पर बहुत तेजी से काम कर रहा है और बिजनौर व पीलीभीत समेत सौ से ज्यादा गांवों में जमीन अधिग्रहण के लिए प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी गई है.
इस महापरियोजना के निर्माण कार्य को रफ्तार देने के लिए एनएचएआई ने पूरे रूट को दो समर्पित टीमों में बांट दिया है. एक टीम पश्चिमी हिस्से के 348 किलोमीटर के काम को देख रही है, जबकि दूसरी टीम पूर्वी हिस्से की जिम्मेदारी संभाल रही है. शुरुआत में यह एक्सप्रेसवे चार लेन का बनाया जाएगा, जिसे भविष्य में जरूरत के अनुसार छह या आठ लेन तक आसानी से चौड़ा किया जा सकेगा. प्राधिकरण ने इस पूरे प्रोजेक्ट को साल 2030 तक पूरा करके आम जनता के लिए खोलने का एक स्पष्ट लक्ष्य रखा है. यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड के हरिद्वार को जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश के करीब 18 अलग-अलग जिलों से होकर गुजरेगी, जिसमें मुजफ्फरनगर, बरेली और गोरखपुर जैसे बड़े शहर शामिल हैं.
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व्यापार और पर्यटन को मिलेगा जबरदस्त बूस्ट
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सफर के कुछ घंटे ही कम नहीं करेगा बल्कि उत्तर भारत के कई छोटे और कटे हुए कस्बों को एक मुख्य आर्थिक नेटवर्क से जोड़ देगा. इससे स्थानीय व्यवसायों, पर्यटन और रोजगार को एक बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा. भारत और नेपाल के बीच होने वाला व्यापार अब काफी सस्ता और तेज हो जाएगा क्योंकि मालवाहक ट्रकों को स्थानीय ट्रैफिक जाम में कई दिनों तक फंसना नहीं पड़ेगा. भविष्य में इस रूट को गोरखपुर से सीधे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक बढ़ाने की भी एक बड़ी योजना है जो पूरे उत्तर और पूर्वी भारत को एक अखंड हाई-स्पीड कॉरिडोर से जोड़ देगी.