ईरान अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ गया है. ईरान ने 14 सूत्री शांति प्रस्ताव दिया लेकिन ट्रंप ने इसे ठुकरा दिया. उन्होंने कहा कि ईरान ने 47 साल में दुनिया के साथ जो किया उसके लिए पूरी कीमत नहीं चुकाई. ईरान की सेना ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका कोई नई मूर्खता करता है तो वे पूरी तरह तैयार हैं. दोनों तरफ सैनिक तैनाती तेज हो गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद का केंद्र बन गया है.
क्या है ईरान का 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव?
ईरान ने अमेरिका को 14 सूत्री योजना सौंपी जिसमें स्थायी शांति, क्षेत्रीय संघर्ष खत्म करना, अमेरिकी सैनिकों की वापसी, सारे प्रतिबंध हटाना और नुकसान का मुआवजा शामिल है. ईरान अस्थायी युद्धविराम नहीं मानना चाहता. वह 30 दिन में पूर्ण समाधान और भविष्य में हमले की कोई गारंटी मांग रहा है. ट्रंप ने कहा कि प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं लगता. उन्होंने दो विकल्प दिए. या तो ईरान पर हमला कर उसे खत्म कर दें या कोई डील करें. लेकिन उन्होंने मानवीय आधार पर हमला न करने की बात भी कही.
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दोनों देशों की सैन्य तैयारी और होर्मुज पर टकराव
ईरानी सेना के अधिकारी मोहम्मद जाफर असदी ने कहा कि उनकी फौज अमेरिकी किसी भी मूर्खता का करारा जवाब देने को तैयार है. ईरान होर्मुज पर अपना शिकंजा कायम रखे हुए है. अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी लगा रखी है. ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को पाइरेट कहा और जहाजों पर कब्जे को मुनाफे का धंधा बताया. अमेरिका ने एयरक्राफ्ट कैरियर, B1 बॉम्बर और USS बॉक्सर जैसे जहाज तैनात किए हैं. ईरान ने भी चेतावनी दी कि अगर हमला हुआ तो खाड़ी देशों में भी जवाबी कार्रवाई होगी.
भविष्य में क्या होगा युद्ध या समझौता?
दुनिया इस टकराव को लेकर चिंतित है क्योंकि होर्मुज बंद होने से तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. ईरान न्यूक्लियर, मिसाइल और प्रतिबंध हटाने पर मजबूत रुख रखे हुए है. ट्रंप समझौता चाहते हैं लेकिन ईरान पर दबाव भी बनाए हुए हैं. दोनों तरफ धमकियां जारी हैं. फिलहाल स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है. कोई भी छोटी गलती बड़े युद्ध में बदल सकती है. वैश्विक अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व की स्थिरता इस पर निर्भर कर रही है.










