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चीन ने क्यों किया ताइवान का घेराव, दोनों देशों के बीच क्या है विवाद? जो युद्धपोत और फाइटर जेट तैनात

ताइवान के आसपास चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. ताइवान के रक्षा मंत्रालय (MND) ने रविवार सुबह बताया कि उसने अपने आस-पास 2 चीनी सैन्य विमानों, 8 चीनी नौसैनिक युद्धपोतों और 4 सरकारी जहाजों की मौजूदगी दर्ज की है. ताइवानी सेना ने इन सभी गतिविधियों पर नजर रखी और जवाबी कदम उठाए.

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ताइवान के आसपास चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. ताइवान के रक्षा मंत्रालय (MND) ने रविवार सुबह बताया कि उसने अपने आस-पास 2 चीनी सैन्य विमानों, 8 चीनी नौसैनिक युद्धपोतों और 4 सरकारी जहाजों की मौजूदगी दर्ज की है. ताइवानी सेना ने इन सभी गतिविधियों पर नजर रखी और जवाबी कदम उठाए.

ताइवानी रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?

ताइवानी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रविवार सुबह 6 बजे तक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के दो विमान और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) के आठ जहाज ताइवान के आसपास सक्रिय पाए गए. मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी और बताया कि ताइवान की सशस्त्र सेनाएं पूरे घटनाक्रम पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं.

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पहले भी दर्ज की गई चीनी सैन्य मौजूदगी

बता दें कि इससे एक दिन पहले शनिवार को भी चीन की सैन्य मौजूदगी दर्ज की गई थी. ताइवान ने 5 चीनी सैन्य विमानों, 9 युद्धपोतों और 5 सरकारी जहाजों का पता लगाया था. इनमें से एक विमान ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा को पार करते हुए ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में भी प्रवेश कर गया था. इसके बाद ताइवानी सेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की.

क्या है चीन-ताइवान के बीच का विवाद?

ताइवान को लेकर चीन और ताइपे के बीच विवाद दशकों पुराना है. बीजिंग ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और भविष्य में उसके एकीकरण की बात करता है. वहीं ताइवान खुद को एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक प्रशासन के रूप में संचालित करता है, जिसकी अपनी सरकार, सेना और आर्थिक व्यवस्था है.

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चीन ने पूरी की पनडुब्बियों की टेस्टिंग

चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच ताइवान भी अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में जुटा है. इसी महीने ताइवान की पहली स्वदेशी पनडुब्बी ने काऊशुंग बंदरगाह से समुद्री परीक्षणों का एक और दौर पूरा किया. रिपोर्ट के मुताबिक, यह पनडुब्बी का 15वां समुद्री परीक्षण और नौवां डाइविंग टेस्ट था. इसे ताइवान की समुद्री सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.

ऐसे हुआ ताइवान का जन्म

साल 1945 में जब दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुआ तो जापान हार गया, लेकिन चीन के भीतर कुओमिंतांग और कम्युनिस्टों का गृहयुद्ध दोबारा शुरू हो गया. अब लड़ाई सीधे चीन की मुख्य भूमि पर राज करने की थी. चिआंग काई-शेक की सेना ने कम्युनिस्टों के गढ़ पर हमले किए, लेकिन माओ त्से तुंग की युद्ध रणनीति के आगे वे टिक नहीं पाए. कम्युनिस्ट सेना ने राष्ट्रवादियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. आखिरकार 1 अक्टूबर 1949 को माओ त्से तुंग ने बीजिंग में ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के गठन का ऐलान कर दिया. जान बचाने के लिए चिआंग काई-शेक अपने 20 लाख समर्थकों के साथ भागकर ताइवान द्वीप पहुंच गए और वहां ‘रिपब्लिक ऑफ चाइना’ नाम से नई सरकार बना ली.

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First published on: Jun 22, 2026 11:08 AM

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