नोबेल शांति पुरस्कार किसे मिलता है और किसे नहीं? क्या डोनाल्ड ट्रंप को मिलेगा, 2026 के अवार्ड के लिए हुए नामित

Nobel Peace Prize

donald trump

डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नोबेल का शांति पुरस्कार पाना चाहते हैं। पिछले साल उन्हें इस अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था, लेकिन अवार्ड वेनेजुएला की महिला ने जीता था। इस बार फिर राष्ट्रपति ट्रंप नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट हुए हैं। साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने 287 नाम शॉर्टलिस्ट किए हैं। इन 287 नामों में डोनाल्ड ट्रंप समेत 208 लोगों और 79 संगठनों के नाम हैं। 10 अक्टूबर 2026 को विजेताओं के नामों की घोषणा की जाएगी।

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डोनाल्ड ट्रंप को किसने नॉमिनेट किया?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कंबोडिया, इजरायल और पाकिस्तान ने नॉमिनेट किया है। दावा किया गया है कि उन्होंने कई देशों के बीच छिड़े युद्ध और सघंर्षों को खत्म कराकर करोड़ों लोगों की जान बचाई है। विश्व शांति का प्रयास किया है।

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क्या ट्रंप को नोबेल अवार्ड दिया जाएगा?

नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के सचिव क्रिस्टियन बर्ग हार्पविकेन कहते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया है। शॉर्टलिस्ट दावेदारों में उनका नाम भी है। बेशक ट्रंप खुद को शांति दूत बताते हैं। 8 युद्ध रुकवाने का दावा करते रहते हैं, लेकिन नॉमिनेट होने का मतलब यह नहीं कि उन्हें पुरस्कार मिल गया है। अवार्ड के लिए नामांकित करना और पुरस्कार जीतना अलग-अलग बातें हैं। ट्रंप को नोबेल पीस प्राइज मिलना चाहिए या नहीं, इसका फैसला नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी करेगी।

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नोबेल शांति पुरस्कार किसे दिया जाता?

नोबेल शांति पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है, जो समाज की भलाई के लिए काम करते हैं। जो मानवाधिकारों का उल्लंघन होने से रोकते हैं। जिन्होंने देशों के बीच भाईचारा बढ़ाया हो। जो मानव अत्याचारों के खिलाफ लड़ते हैं। मौलिक अधिकारों की रक्षा करते हैं। जिन्होंने युद्ध रुकवाने का प्रयास किया हो। शांति स्थापना में योगदान दिया हो। मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ी हो। जो तानाशाही के लिए खिलाफ आवाज उठाकर लोकतंत्र के बढ़ावा देते हैं। जो साफ दिल से बिना किसी फल के मानव कल्याण के लिए काम करते हों।

नोबेल शांति पुरस्कार किन्हें नहीं मिलता?

नोबेल शांति पुरस्कार किसी तानाशाह को नहीं दिया जाता। युद्ध अपराध और मानवाधिकारों का हनन करने वाले को नहीं दिया जाता। 2 देशों के बीच भाईचारे की बजाय संघर्ष को बढ़ावा देने वाला इस अवार्ड का हकदार नहीं है। अगर किसी वैज्ञानिक या साहित्यकार का काम सिर्फ साइंस और लिटरेचर तक सीमित हो तो उसे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया जाएगा। नामांकन भरने वाले लोगों को ही अवार्ड के लिए शॉर्टलिस्ट करके उन्हें पुरस्कार देने या न देने के बारे में विचार-विमर्श किया जाता है, फिर विजेता के नाम का ऐलान होता।

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ट्रंप कई बार आक्रामक रवैया अपना चुके

सितंबर में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप ने कहा कि मुझे नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। मैंने आठ युद्ध रुकवाए हैं। कंबोडिया और थाईलैंड, कोसोवो और सर्बिया, कांगो और रवांडा, पाकिस्तान और भारत, इजरायल और ईरान, मिस्र और इथियोपिया, आर्मेनिया और अजरबैजान का युद्ध रुकवाया है। लेकिन विश्लेषक कहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अकसर मानवीयता के खिलाफ आक्रामक रुख भी अपनाया है। जैसे डेनमार्क से ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की उनकी इच्छा और उस पर कब्जा करने के लिए डेनमार्क को पैसा ऑफर करना।

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जून 2025 में इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर बमबारी अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति ट्रंप के कहने पर ही की थी। ट्रंप ने फरवरी में अमेरिकी सेना को सोमालिया पर हमला करने का आदेश भी दिया था। मार्च में उन्होंने यमन के हूती विद्रोहियों के द्वारा लाल सागर में किए गए हमलों के जवाब में हमले कराए थे। सितंबर में, उन्होंने अमेरिकी सेना को कैरिबियन में नावों पर हमला करने का आदेश दिया , जिनमें वेनेजुएला की 3 नावें शामिल थीं। वेनेजुएला पर हमला करके राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया। ग्रीनलैंड, कनाडा और पनामा नहर को अपने कब्जे में लेने की धमकी भी दी है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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