पेरिस के मशहूर एफिल टावर में BAPS प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को दूर रखने की खबरों पर विवाद बढ़ गया है. इस पूरे मामले पर अब भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है. प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए इसे संबंधित पक्षों का अंदरूनी मामला बताया है.
क्या है पूरा विवाद?
पेरिस के विश्व प्रसिद्ध एफिल टावर से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएपीएस (BAPS) स्वामीनारायण संस्था के एक प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान एफिल टावर की महिला कर्मचारियों को कुछ खास हिस्सों या क्षेत्रों से दूर रहने के लिए कहा गया था. इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं और सवाल उठने लगे कि क्या इस यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों पर किसी तरह की पाबंदी लगाई थी.
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विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान
इस पूरे घटनाक्रम और विवाद पर अब भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है. साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से इस संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट की. रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमें पेरिस क्षेत्र में BAPS संस्था द्वारा मंदिर के उद्घाटन की पूरी जानकारी है. जहां तक एफिल टावर से जुड़े इस विशेष मुद्दे का सवाल है, तो यह मामला पूरी तरह से संबंधित पक्षों के बीच का है.”
भारत ने क्यों बनाई दूरी?
विदेश मंत्रालय के इस रुख से साफ है कि भारत सरकार इस मामले को दो निजी और स्थानीय पक्षों के बीच का मानती है. पेरिस में BAPS संस्था के मंदिर उद्घाटन की जानकारी सरकार को है, लेकिन एफिल टावर के प्रबंधन और प्रतिनिधिमंडल के बीच आंतरिक व्यवस्थाओं या नियमों को लेकर क्या बातचीत हुई, उसमें भारत का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं है. प्रवक्ता ने स्पष्ट कर दिया कि इस पर जो भी निर्णय या स्पष्टीकरण होगा, वह संबंधित संस्थाओं और एफिल टावर प्रशासन के दायरे में आता है.
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